Coldrif’s deadly syrup: मध्य प्रदेश और राजस्थान में कथित रूप से खांसी की सिरप से अब तक 14 बच्चों की जान चली गई। इस घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क हो चुकी हैं। सीडीएससीओ ने छह राज्यों में इन फैक्टरियों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच से कुछ गंभीर तथ्य सामने आए हैं। आइए देखें, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है।
Coldrif’s deadly syrup: मध्यप्रदेश और राजस्थान में कथित रूप से खांसी की दवाओं के कारण 14 बच्चों की मौत हुई। इस घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकारें तुरंत सक्रिय हो गईं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र की उन फैक्ट्रियों की जांच शुरू की। ये वे जगहें हैं जहां संदिग्ध दवाएं बनी थीं। सीडीएससीओ ने इस मामले में 19 दवाओं के नमूने एकत्र किए। इनमें खांसी के सिरप, एंटीबायोटिक तथा बुखार की दवाएं शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में छह दवाओं से डाइएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) का पता नहीं चला। ये रसायन बच्चों के किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं। लेकिन कोल्डरिफ सिरप के नमूने में डीईजी की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली। यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम में तैयार हुआ था। तमिलनाडु और मध्यप्रदेश सरकारों ने इस सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही बाजार से इसे हटाने के आदेश जारी किए।
Coldrif’s deadly syrup: केंद्र सरकार ने भी उठाया बड़ा कदम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब सभी राज्यों को निर्देश दिया है। दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दें। पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए डॉक्टर की सलाह लें। सीमित मात्रा में और सावधानी से ही इसका उपयोग करें। साथ ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए हानिकारक दवाओं पर चेतावनी का लेबल लगाना जरूरी होगा।
Coldrif’s deadly syrup: बढ़ती घटनाओं पर गुजरात सरकार भी एक्शन में
मध्यप्रदेश और राजस्थान में कथित तौर पर खराब खांसी की दवाओं से बच्चों की मौत की खबरों के बाद गुजरात सरकार सक्रिय हो गई है। सावधानी के लिए राज्य में बिकने वाली सभी खांसी की दवाओं की जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने गांधीनगर में संवाददाताओं से कहा। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों की दवाओं पर शक हो रहा है, वे गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की खरीद सूची में शामिल नहीं हैं। मंत्री ने कहा कि मीडिया से पता चला है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कुछ बच्चों की मौत खांसी की दवाएं लेने के बाद हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान में डेक्सट्रोमेथोर्फन और मध्यप्रदेश में कोल्डरिफ सिरप से बच्चों की जान गई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। क्या इन दवाओं की खरीद जीएमएससीएल के माध्यम से हुई थी? जांच में सामने आया कि ये कंपनियां राज्य की सूची में नहीं हैं। भले ही कोई सीधी खरीद न हुई हो। फिर भी सरकार ने सतर्कता दिखाई। राज्य में उपलब्ध सभी खांसी की दवाओं में हानिकारक तत्वों की जांच के आदेश दे दिए।
मध्यप्रदेश सरकार ने कोल्डरिफ सिरप पर लगाया बैन
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सात सितंबर से अब तक 11 बच्चों की मौतों के बाद कोल्डरिफ सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इन मौतों को बहुत दुखद बताया। उन्होंने एक्स प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा कि राज्य भर में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री बंद कर दी गई। सिरप बनाने वाली कंपनी के बाकी उत्पादों पर भी पाबंदी लगाई जा रही है। राज्य स्तर पर इस मामले की जांच चल रही है। दोषी लोगों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कफ सिरप कांचीपुरम की फैक्टरी में बनता है। इसलिए तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए पत्र भेजा गया था। शनिवार सुबह रिपोर्ट आने पर बाकी उत्पादों पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
मध्य प्रदेश में सिरप ने ली इन बच्चों की जान
नाम उम्र पता
दिव्यांश चंद्रवंशी 7 वर्ष डुड्डी
अदनान खान 5 वर्ष न्यूटन चिखली
हेतांश सोनी 5 वर्ष उमरेठ
उसैद 4 वर्ष परासिया
श्रेया यादव 18 माह परासिया
विकास यदुवंशी 4 वर्ष दीघावानी
योगिता विश्वकर्मा 5 वर्ष बोरिया
संध्या भोसोम सवा साल परासिया
चंचलेश यदुवंशी — गायगोहान
योजिता ढाकरे दो साल बडकुही
तेलंगाना सरकार ने भी जारी किया अलर्ट
दूसरी ओर, कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले के बाद तेलंगाना सरकार अब सतर्क हो गई है। शनिवार को तेलंगाना ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (डीसीए) ने इस सिरप के संबंध में स्टॉप यूज नोटिस और पब्लिक अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने बताया कि उन्हें मध्यप्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत की घटनाओं के बारे में सूचित किया गया है। ये मौतें कथित तौर पर सिरप के सेवन के बाद हुईं, जिसमें Batch No. SR-13 शामिल है।
क्या है खतरा?
मामले में तेलंगाना सरकार द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कोल्ड्रिफ सिरप के इस बैच में डायएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) नामक एक जहरीला रसायन पाया गया है, जो शरीर के गुर्दों (किडनी) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। इसी कारण तेलंगाना में इस सिरप के उपयोग को तुरंत बंद करने की चेतावनी दी गई है।
तमिलनाडु, राजस्थान और केरल में लगा है प्रतिबंध
तमिलनाडु के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने शनिवार को कहा कि नमूनों में मिलावट पाए जाने के बाद पूरे तमिलनाडु में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हमने निर्माता से स्पष्टीकरण मांगा है। अगले आदेश तक संयंत्र में उत्पादन को बंद कर दिया गया है। राजस्थान सरकार ने भी जयपुर स्थित कायसन फार्मा के सभी 19 दवाओं के वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। राजस्थान में इस कंपनी के डेक्सट्रामेथारफन कफ सिरप की वजह से दो बच्चों की मौत हुई है।
वहीं केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने भी शनिवार को कहा कि राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने राज्य में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी है। यह फैसला अन्य राज्यों से आई रिपोर्टों के बाद लिया गया है। राजस्थान सरकार ने राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया है।
नमूनों में पाया गया रसायन सेहत के लिए घातक
मध्य प्रदेश के राज्य खाद्य एवं औषधि नियंत्रक दिनेश कुमार मौर्य ने शनिवार को बताया कि प्रतिबंधित कोल्ड्रिफ सिरप में डीईजी रसायन की मात्रा अनुमत सीमा (0.1%) से अधिक पाई गई है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में निर्मित कोल्ड्रिफ की जांच रिपोर्ट आने के बाद इसकी आपूर्ति वाले सभी स्थानों का गहन निरीक्षण करने, सैंपलिंग करने और स्टॉक जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन नियंत्रक कार्यालय द्वारा जारी पाबंदी संबंधी निर्देशों के अनुसार, कफ सिरप को डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (48.6% डब्ल्यू/वी) की अधिक मात्रा के कारण मानक गुणवत्ता वाला नहीं पाया गया है। इसलिए इसे पूरे राज्य में प्रतिबंधित कर दिया गया है। डीईजी एक प्रकार का विषाक्त रसायन है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
हिमाचल प्रदेश में बनी दवा के नमूनों की जांच जारी
मध्य प्रदेश के खाद्य एवं औषधि नियंत्रक ने यह भी जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश में बने एक अन्य कफ सिरप की जांच चल रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। मौर्य ने बताया कि कुल 19 नमूने एकत्रित किए गए हैं, जिनमें से 13 हमारे पास हैं और उनकी जांच जारी है। चार नमूनों की रिपोर्ट आ चुकी है और शेष नमूनों की जांच की प्रक्रिया चल रही है।
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