Railway News: ऑनलाइन रेलवे टिकट पर ही बीमा क्यों ? सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से स्पष्टीकरण मांगा है।

Railway News: Why is insurance only on online railway tickets? Supreme Court seeks clarification from Railways.

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Railway News: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से यह सवाल किया है कि ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को दुर्घटना बीमा कवर क्यों प्रदान किया जाता है, जबकि ऑफलाइन टिकट लेने वाले यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिलती। अदालत ने इस भेदभाव के बारे में रेलवे से स्पष्टीकरण मांगा है और रेलवे ट्रैक तथा क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए निर्देश दिए हैं।

New Delhi, UP Tak News: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से यह सवाल उठाया है कि दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ही क्यों प्रदान किया जाता है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि ऑफलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को यह सुविधा क्यों नहीं मिलती। अदालत ने कहा कि कोर्ट के सलाहकार ने बताया है कि ऑनलाइन टिकट पर दुर्घटना बीमा उपलब्ध है, जबकि काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों को यह कवर नहीं दिया जाता। इस पर रेलवे से स्पष्टीकरण मांगा गया है।Railway News: Why is insurance only on online railway tickets? Supreme Court seeks clarification from Railways.

Railway News: बीमा सुविधा में फर्क क्यों?

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने रेलवे के वकील से कहा है कि वह इस मुद्दे पर निर्देश लेकर अदालत को बताएं। बेंच ने यह भी कहा कि अदालत के सामने यह सवाल है कि एक ही सेवा के लिए यात्रियों के बीच बीमा सुविधा में फर्क क्यों किया जा रहा है।

Railway News: रेलवे ट्रैक और क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान देने के निर्देश

कोर्ट ने 29 नवंबर को रेलवे को यह निर्देश दिया कि वह रेलवे ट्रैक और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर रेलवे ट्रैक और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि अन्य सुरक्षा से संबंधित पहलू अपने आप स्पष्ट हो सकें। यह मामला रेलवे प्रणाली में सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न चिंताओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

Railway News: CSR में पर्यावरणीय जिम्मेदारी अनिवार्य है: SC

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी, जिसे CSR कहा जाता है, को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कंपनियां पर्यावरण और पारिस्थितिकी के अन्य जीवों की अनदेखी करती हैं, तो वे स्वयं को सामाजिक रूप से जिम्मेदार नहीं मान सकतीं।

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए. एस. चांदुरकर की बेंच ने विलुप्तप्राय प्रजाति गोडावण यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण से जुड़े मामले में यह टिप्पणी की। कोर्ट पर्यावरणविद् एम. के. रंजीतसिंह की 2019 की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह पक्षी राजस्थान और गुजरात में गैर-नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों के कारण खतरे में है। अदालत ने कहा कि ‘सामाजिक जिम्मेदारी’ की कॉरपोरेट परिभाषा में पर्यावरणीय जिम्मेदारी का समावेश होना चाहिए।

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