Ballia UP News: जनपद की प्रतिष्ठित साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था “संकल्प” द्वारा अपने बीस वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह “संकल्प रंगोत्सव” का शुभारंभ आज भव्य रूप से किया गया। यह आयोजन 26 से 28 दिसंबर 2025 तक मनोरंजन हॉल, टी.डी. कॉलेज (श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय), बलिया में आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, जहाँ साहित्य प्रेमियों एवं रंगमंच से जुड़े लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। उद्घाटन सत्र में अतिथियों का सम्मान किया गया तथा संस्था के सचिव द्वारा संकल्प की बीस वर्षों की रंगयात्रा, साधना और संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
प्रथम दिवस के कार्यक्रम के अंतर्गत एक्सप्रेशन कल्चरल सोसायटी, बलिया एवं डीएसडी थिएटर ग्रुप, गाजीपुर द्वारा प्रस्तुत रंग-संगीत की सशक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।
इसके पश्चात “समाज के निर्माण में रंगमंच की भूमिका” विषय पर आयोजित रंग विमर्श सत्र में रंग नाद पत्रिका के संपादक आलोक परणकर, रंग निर्देशक पुंज प्रकाश, रंग निर्देशक अभिषेक पंडित तथा रंग निर्देशक श्रीनारायण पांडेय ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने रंगमंच को सामाजिक चेतना, संवाद और परिवर्तन का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि रंगमंच समाज को आत्ममंथन की दिशा देता है।
संध्या सत्र में चाय अवकाश के उपरांत मुख्य आकर्षण के रूप में दस्तक संस्था, पटना (बिहार) द्वारा प्रसिद्ध साहित्यकार धर्मवीर भारती की अमर कृति “अंधा युग” का प्रभावशाली नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया।
लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस प्रस्तुति के दौरान दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में पूर्ण निस्तब्धता छाई रही। प्रत्येक दृश्य के साथ दर्शक जैसे नाटक के भीतर उतरते चले गए। नाटक के समापन के साथ ही सभागार देर तक तालियों की गूंज से भर उठा और दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों के अभिनय को नमन किया।
“अंधा युग” आधुनिक हिंदी नाट्य साहित्य का एक महत्वपूर्ण काव्य-नाटक है, जो महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की पृष्ठभूमि में मनुष्य के नैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों के पतन की मार्मिक व्याख्या करता है। नाटक की कथा अश्वत्थामा के प्रतिशोधात्मक कृत्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जो युद्ध की समाप्ति के पश्चात भी हिंसा को जीवित रखता है और सभ्यता के नैतिक अंधकार को उजागर करता है।

काव्यात्मक अभिव्यक्ति, सांकेतिक संवाद और सुदृढ़ रंगमंचीय संरचना के माध्यम से यह नाटक न केवल अपने समय का दस्तावेज बनता है, बल्कि हर युग में प्रासंगिक प्रतीत होता है—इसी कारण “अंधा युग” को एक कालजयी कृति के रूप में स्वीकार किया गया है।
काव्यात्मक भाषा, सांकेतिक संवाद और प्रभावी रंगमंचीय संरचना से सुसज्जित इस प्रस्तुति ने नाटक को कालजयी रूप प्रदान किया। युद्ध, सत्ता और मानवीय मूल्यों के टकराव को अत्यंत संवेदनशीलता और गहराई के साथ प्रस्तुत करते हुए इस नाटक ने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया।
नाटक में प्रिंस, सन्नी, विदूषी रत्नम, राहुल, मो. इरशाद, रेयान अहमद, अंकित कुमार एवं शिवम के सशक्त और जीवंत अभिनय को दर्शकों ने मुक्त कंठ से सराहा। दस्तक, पटना की इस प्रस्तुति का निर्देशन, संगीत एवं परिकल्पना वरिष्ठ रंग निर्देशक पुंज प्रकाश का रहा, जिनके कुशल निर्देशन ने संवाद, मौन और दृश्य संरचना के संतुलन के माध्यम से नाटक को विशेष ऊँचाई प्रदान की। नाट्य मंचन के समापन पर सभागार तालियों की गूंज से गूँज उठा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंच पर उपस्थित सभी कलाकारों को संस्था के पदाधिकारियों द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। अंत में संस्था के संस्थापक आशीष त्रिवेदी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी दर्शकों, साहित्य एवं रंगमंच प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों के कार्यक्रमों में अधिक संख्या में उपस्थित होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करने तथा संकल्प रंगोत्सव को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि यह रंगोत्सव केवल नाट्य प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रंग, शब्द, संगीत और विचारों के संवाद का एक साझा मंच है। आगामी दिनों में दिल्ली, जम्मू एवं बलिया के प्रतिष्ठित रंगकर्मियों द्वारा विविध नाट्य प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत की जाएँगी।
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