Prayagraj News: प्रयागराज माघ मेले में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी टकराव में बदल गया है। शिविर में अब नेताजी मुलायम जी की प्रतिमा की जगह राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित की गई है। इस बीच माघ मेले पहुंचे नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे डर की राजनीति करार दिया है।
Prayagraj, UP Tak News: प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि माघ मेले के मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान शिविर में सपा संस्थापक की प्रतिमा नहीं लगाई जाएगी। इसके स्थान पर शिविर में राधा और कृष्ण की मूर्ति यज्ञशाला में स्थापित कर दी गई है। इस जानकारी को माघ मेले में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने साझा किया है। शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुंभ मेले में मुलायम सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी। लेकिन अब समाजवादी पार्टी के बढ़ते प्रभाव से डरकर शिविर के संस्थापक सपा नेता संदीप यादव के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए गए हैं और उनके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है।
Prayagraj News: मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान में ठहरने की व्यवस्था
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा है कि मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान में किसी तरह का कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा है कि कानून व्यवस्था और मेला प्रशासन के विचार को देखते हुए हमने मुलायम सिंह यादव की मूर्ति न रखने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि शिविर में अब राधा कृष्ण की मूर्ति लगा दी गई है। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान में विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। इसके साथ ही यहां पर आने वाले लोगों के ठहरने की भी व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा यहां पर लोगों के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
Prayagraj News: सपा नेता संदीप यादव को बिना वजह परेशान किया जा रहा है।
वहीं शिविर के संस्थापक सपा नेता संदीप यादव के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत की गई कार्रवाई पर माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि ‘संदीप यादव कोई गुंडा नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। वह शहर उत्तरी विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि संदीप यादव पर जो मुकदमे हैं, वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किए गए आंदोलनों के संबंध में दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मुकदमे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी दर्ज किए गए थे। उन्होंने भाजपा सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा कार्यकर्ताओं पर इस तरह के मुकदमे लिखकर उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है।
Prayagraj News: प्रयागराज माघ मेला मुलायम सिंह यादव विवाद क्या है
प्रयागराज के माघ मेला 2026 में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा लगाने को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद के मुख्य बिंदु
विवाद का मुख्य कारण
1. प्रतिमा स्थापना पर रोक: ‘मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान’ द्वारा माघ मेला क्षेत्र के एक शिविर में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित करने और उसका लोकार्पण करने की योजना थी।
2. प्रशासन का नोटिस: प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने 30 दिसंबर 2025 को आयोजकों को नोटिस जारी कर प्रतिमा लगाने पर रोक लगा दी। प्राधिकरण का तर्क है कि धार्मिक मेले में गैर-धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियां मेला नियमों और परंपराओं के विरुद्ध हैं।
विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं
1. साधु-संतों का विरोध: कई हिंदू संतों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि संगम की पवित्र रेती पर केवल देवी-देवताओं की मूर्तियां होनी चाहिए, राजनेताओं की नहीं। कुछ संतों ने मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान कारसेवकों पर हुई फायरिंग की घटना का हवाला देते हुए उन्हें “हिंदू विरोधी” बताया और उनकी प्रतिमा का विरोध किया।
2. समाजवादी पार्टी का रुख: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया। सपा का तर्क है कि यदि 2025 के महाकुंभ के दौरान इसी शिविर में प्रतिमा लगाई जा सकती थी, तो अब माघ मेले में इस पर आपत्ति क्यों है।
वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)
विवाद का समाधान: किसी भी टकराव से बचने के लिए अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा ने शिविर में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा न लगाने का फैसला किया है।
विकल्प: अब मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा के स्थान पर शिविर में भगवान श्री राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित की गई है।
कानूनी कार्रवाई: प्रशासन ने शिविर के आयोजक संदीप यादव के खिलाफ “गुंडा एक्ट” के तहत भी कार्रवाई की है, जिसे सपा ने सरकार की दमनकारी नीति बताया है।
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