US-Iran War: मध्य पूर्व में तनाव के बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक टकराव का केंद्र बन गया है। ईरान ने अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बाद इसे बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
US-Iran War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल एक समुद्री मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक टकराव का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने इस संकीर्ण जलमार्ग को एक खतरनाक चोकपॉइंट में बदल दिया है। इसके परिणामस्वरूप, यहां से गुजरने वाला वैश्विक तेल व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, तेहरान ने होर्मुज पर सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने न केवल मिसाइल हमलों को तेज कर दिया है, बल्कि दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद कर दिया है। ईरान इस संकीर्ण मार्ग का उपयोग अपने लिए एक ढाल के रूप में कर रहा है।
हालांकि, ईरान ने भारत, रूस, चीन, और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के लिए सीमित मार्ग खोला है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन शत्रु देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता अभी भी बंद है। इस संकट के कारण फारस की खाड़ी में सैकड़ों तेल टैंकर फंसे हुए हैं। युद्ध से पहले, लगभग 80 जहाज इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरते थे, लेकिन अब इस संख्या में काफी कमी आई है, जिसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ रहा है। वर्तमान संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना किसी के लिए भी आसान नहीं है। इसके पीछे न केवल ईरान की धमकी है, बल्कि यहां की भौगोलिक स्थिति भी एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में उभर रही है।
US-Iran War: आखिर होर्मुज क्यों खोलना मुश्किल है?
यहाँ की भौगोलिक चुनौती बनी ईरान का हथियार
होर्मुज स्ट्रेट एक अत्यंत संकरा और उथला समुद्री जलमार्ग है, जहाँ जहाजों को ईरान के बहुत निकट से गुजरना होता है। ईरान का पहाड़ी तटीय क्षेत्र उसे प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है। ईरान ने अपने मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और हथियार इन्हीं पहाड़ी क्षेत्रों, गुफाओं और सुरंगों में छिपा रखे हैं, जिससे जहाजों पर हमला करना बहुत सरल और आसान हो जाता है।
US-Iran War: हमेशा से ईरानी मिसाइल और ड्रोन का खतरा बना रहता है।
यदि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल या ड्रोन से हमला करता है, तो जहाजों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय होता है, या कहें कि केवल कुछ ही मिनट होते हैं। इस स्थिति में, जहाजों को ईरानी मिसाइलों का शिकार बनने का खतरा बना रहता है। अब तक 17 जहाज इस हमले का शिकार हो चुके हैं।
US-Iran War: ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंग बिछा राखी है।
ईरान ने होर्मुज के समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। यदि अमेरिका किसी समझौते के बाद उन्हें हटाने का प्रयास करता है, तो इसमें हफ्तों का समय लग सकता है। इस बीच, जहाजों और सुरक्षा बलों को इसका लगातार खतरा बना रहेगा।
US-Iran War: इसका सैन्य समाधान अमेरिका के लिए आसान नहीं है
जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने जहाजों को सैन्य सुरक्षा देने की बात कही है, लेकिन यह बेहद कठिन और जोखिम भरा होगा। युद्धपोतों को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाना आसान नहीं होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए भारी मात्रा में संसाधन लेंगेंगे और फिर भी सफलता की गारंटी नहीं है।
US-Iran War: ट्रंप के रुख में लगातार बदलाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जाएगा। हालांकि, अब ट्रंप का रुख थोड़ा नरम नजर आ रहा है। उन्होंने 5 दिन के लिए हमले टाल दिए हैं और कहा है कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक रही है।
US-Iran War: ईरान ने लागू किया ‘टोल सिस्टम’
रिपोर्टों के अनुसार, IRGC ने एक प्रकार का टोल सिस्टम लागू कर दिया है। अब जहाजों को विशेष अनुमति, दस्तावेज और कोड के साथ एक निश्चित मार्ग से गुजरना आवश्यक हो गया है। 13 मार्च के बाद से कम से कम 26 जहाज इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जबकि सामान्य मार्ग लगभग बंद हो चुका है।
US-Iran War: बाब-अल-मंदेब पर मंडराया खतरा?
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका-इजरायल ने युद्ध को और बढ़ाया, तो वह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी लक्ष्य बना सकता है। यह जल मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, जो वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यहां भी संकट उत्पन्न होता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।
US-Iran War: क्या है इसका समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से इस संकट का समाधान नहीं हो सकता। जब तक ईरान का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक जहाज कंपनियां इस मार्ग का उपयोग करने से परहेज करेंगी। इस संकट का समाधान कूटनीतिक और राजनीतिक समझौते के माध्यम से ही संभव है। वर्तमान परिस्थितियों में, विश्व की ऊर्जा आपूर्ति एक अत्यंत नाजुक स्थिति में है।
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