MP ‘Chita Andolan’: मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी और किसान समुदाय “चिता आंदोलन” के नाम से विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी चिताओं पर लेटकर, प्रतीकात्मक फांसी और जल-सत्याग्रह जैसे तरीकों से यह संदेश दे रहे हैं कि उनके लिए विस्थापन, उजड़ना और अधिकारों का हनन “मौत से बदतर” है।
MP ‘Chita Andolan’:घटना क्या है
यह आंदोलन छतरपुर-पन्ना सीमा पर बरना नदी के पास और कुपी गांव के आसपास फिर से शुरू हुआ, जब अप्रैल में मिला प्रशासनिक आश्वासन पूरा नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिना ग्राम सभा की सहमति, पर्याप्त मुआवजा और पारदर्शी पुनर्वास के परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है।
MP ‘Chita Andolan’: परियोजना का संदर्भ
केन-बेतवा लिंक परियोजना को केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में 44,605 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दिसंबर 2024 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड के सूखा-प्रवण इलाकों में पानी पहुंचाना, सिंचाई बढ़ाना और पीने के पानी की उपलब्धता सुधारना है।
MP ‘Chita Andolan’: विरोध का कारण
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि उनकी जमीन, घर, आजीविका और सांस्कृतिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है, लेकिन बदले में उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला। वे यह भी कह रहे हैं कि ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई और प्रभावित गांवों में सामाजिक प्रभाव आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया।
इंसाफ दो, वरना जान से मार दो
चिता आंदोलन मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में आदिवासी समुदायों द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध प्रदर्शन है।
लोग अपनी जान जोखिम में डालकर लेटकर या बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों की ज़मीन, घर, संस्कृति और आजीविका का डूबना उनके लिए… pic.twitter.com/blWMTIERbs
— Chitra Pandit (@Chitra_speak) July 16, 2026
MP ‘Chita Andolan’: प्रभावित क्षेत्र
रिपोर्ट्स के मुताबिक परियोजना के तहत दौधन बांध का निर्माण छतरपुर-पन्ना क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और इससे कई गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 22 गांव और 7,000 से अधिक परिवारों के प्रभावित होने की बात कही गई है; अन्य रिपोर्टें इससे बड़ी संख्या भी बताती हैं, इसलिए प्रभावित परिवारों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग दावे मौजूद हैं।
MP ‘Chita Andolan’: आंदोलन का स्वरूप
आंदोलन में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों तक की भागीदारी दिख रही है, और कई प्रतिभागी खुले आसमान के नीचे चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, 11 महिलाओं ने चिता पर लेटकर और 6 महिलाओं ने प्रतीकात्मक फांसी लगाकर विरोध दर्ज कराया।
MP ‘Chita Andolan’: प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच तनाव
आंदोलनकारियों का आरोप है कि मानसून में उनके घर तोड़े गए, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं रोकी गईं, और विरोध करने पर फर्जी मुकदमे लगाए गए। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में यह भी दर्ज है कि सरकार ने अतिरिक्त पुनर्वास पैकेज मंजूर किया, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।
MP ‘Chita Andolan’: प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी इन बातों की मांग कर रहे हैं:
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उचित और समान मुआवजा।
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ठोस पुनर्वास और पुनर्स्थापन।
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ग्राम सभा की सहमति और कानूनी प्रक्रिया का पालन।
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कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
MP ‘Chita Andolan’: बड़ा सवाल
यह आंदोलन केवल एक परियोजना-विरोध नहीं, बल्कि विस्थापन, अधिकार, और आदिवासी आजीविका के भविष्य का सवाल बन गया है। सरकार इसे क्षेत्रीय विकास और जल-सुरक्षा की परियोजना बता रही है, जबकि प्रभावित लोग इसे अपने अस्तित्व पर हमला मान रहे हैं।
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Author: UP Tak News
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