Lucknow News: मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।
लखनऊ | 20 जुलाई 2026: देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन में आयोजित एक छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और दमनकारी नीतियों पर देश भर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इसी क्रम में, प्रसिद्ध शिया इस्लामिक विद्वान, धर्मगुरु एवं सामाजिक चिंतक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने इस पूरी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तीखे शब्दों में केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन की निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग करना सीधे तौर पर संविधान की मूल आत्मा पर प्रहार है।
Lucknow News: शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार
जारी किए गए अपने विस्तृत बयान में मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि एक स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र में अपनी बात को शांतिपूर्ण ढंग से सरकार तक पहुंचाना, विरोध जताना या अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। किसी भी लोकतांत्रिक ढांचे में इस प्रकार के बुनियादी अधिकारों को कुचलने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग किया जाना कतई स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि आज देश का युवा और छात्र वर्ग अपने उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनिश्चितताओं, पारदर्शिता की कमी, निष्पक्ष रोजगार के अवसरों और संस्थागत जवाबदेही की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर है। ऐसे संवेदनशील समय में हुक्मरानों और सरकार का दायित्व यह होना चाहिए कि वे आगे बढ़कर छात्रों से संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याओं को सुनें और उनका व्यावहारिक समाधान निकालें, न कि उनके लोकतांत्रिक संघर्ष को दबाने के लिए दमनकारी हथकंडों का सहारा लें।
Lucknow News: शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक असंतोष और आत्ममंथन की जरूरत
मौलाना ज़ैदी ने वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि यदि देश भर के शिक्षण संस्थानों और युवाओं के बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर इतना व्यापक असंतोष और उबाल दिखाई दे रहा है, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नीतिगत स्तर पर कहीं बहुत बड़ी चूक हो रही है। केंद्र सरकार को इस विषय पर लीपापोती करने के बजाय पूरी गंभीरता से आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत किसी भी रूप में पुलिस के डंडे या दमनकारी उपायों में नहीं होती, बल्कि यह जनता के साथ निरंतर संवाद, संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा और जन-विश्वास पर टिकी होती है। जब सरकारें संवाद के दरवाजे बंद कर लेती हैं, तो लोकतंत्र कमजोर होने लगता है।
Lucknow News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लें नैतिक जिम्मेदारी
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने मौजूदा हालातों और छात्रों पर लगातार हो रही पुलिसिया कार्रवाई का कड़ा संज्ञान लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर विवादों, कुप्रबंधन और छात्रों के लगातार बढ़ते असंतोष की पूरी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए शिक्षा मंत्री को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक और जवाबदेह सरकार में संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कागजों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी ‘नैतिक’ होती है। जब देश का भविष्य कहे जाने वाले छात्र सड़कों पर पिट रहे हों और व्यवस्था उनके प्रति बहरी बन जाए, तो उस पद पर बने रहने का कोई नैतिक औचित्य नहीं रह जाता।
Lucknow News: उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग
अपने संबोधन के अंत में, मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने केंद्र सरकार के समक्ष कुछ प्रमुख और सख्त मांगें रखीं:
- छात्रों की शिकायतों का समाधान: देश के छात्रों और युवाओं की तमाम जायज शिकायतों पर सरकार बिना किसी देरी के सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार करे।
- निष्पक्ष न्यायिक जांच: दिल्ली में छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज की पूरी घटना की एक निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- सुरक्षा की गारंटी: यह पुख्ता तौर पर सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में देश के किसी भी हिस्से में होने वाले शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के दौरान विद्यार्थियों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक या बलपूर्वक दमन न किया जाए।
मौलाना ज़ैदी ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश का भविष्य पूरी तरह से युवाओं के मजबूत कंधों पर टिका हुआ है। यदि समय रहते छात्रों की वाजिब आवाज़ को सुना गया और उनकी समस्याओं का निराकरण किया गया, तो हमारा लोकतंत्र और अधिक प्रबुद्ध एवं मजबूत होगा। इसके विपरीत, यदि उनकी जायज असहमति को बलपूर्वक और तानाशाही रवैये से दबाने का कुचक्र जारी रहा, तो यह देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं से आम जनता के अटूट विश्वास को हमेशा के लिए खंडित कर सकता है।
“लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी ताकत जनता और युवाओं का विश्वास होता है। सरकार को अहंकार त्यागकर छात्रों की आवाज़ सुननी चाहिए, संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के लिए ठोस एवं पारदर्शी कदम उठाने चाहिए। यही सच्चे अर्थों में संविधान की भावना और राष्ट्रहित के अनुकूल है।” — मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी
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Author: UP Tak News
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