New Delhi: दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसे में 7 लोगों की मौत के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सभी PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों के सुरक्षा ऑडिट की मांग की गई है।
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में PG और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित PG, निजी हॉस्टल और अन्य छात्र आवासों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिश की है।
New Delhi: सभी PG और निजी हॉस्टलों की जांच की मांग
एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि सत्य निकेतन जैसी घटनाओं को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत है। रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास मौजूद छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच की सिफारिश की गई है।
इस जांच में केवल इमारत की मजबूती ही नहीं, बल्कि स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर, मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में हुए निर्माण या बदलाव, जमीन के अनुमत इस्तेमाल और फायर सेफ्टी व्यवस्था की भी जांच करने की बात कही गई है।
New Delhi: 7 लोगों की गई जान
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक बहुमंजिला इमारत ढह गई थी। इस इमारत में छात्रों के लिए ‘Hostel Daze’ नाम से बॉयज PG संचालित किया जा रहा था। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। मलबे से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन सात लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
प्रारंभिक जानकारी में बेसमेंट के आसपास निर्माण कार्य और पानी जमा होने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि हादसे की सटीक वजह अभी जांच का विषय है।
New Delhi: 2022 में भी हुआ था हादसा
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की यह पहली घटना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2022 में भी इसी इलाके में एक इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हुई थी और चार लोग घायल हुए थे।
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सवाल खड़ा किया है कि खतरनाक इमारतों की पहचान, नियमित निरीक्षण और भवन नियमों के पालन की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में 10 सितंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे से जुड़े मामले पर आगे सुनवाई के लिए 10 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर मामले से जुड़ी कार्यवाही को अपने पास भी लिया जा सकता है।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट भी हादसे पर सख्त रुख अपना चुका है और PG व हॉस्टलों की सुरक्षा तथा भवन नियमों के पालन को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा है।
New Delhi: अब सवाल सिर्फ सत्य निकेतन का नहीं
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे PG और निजी हॉस्टल कारोबार की सुरक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास कई आवासीय इमारतों का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किया जाता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इन इमारतों में निर्माण, अग्नि सुरक्षा, निकासी मार्ग और संरचनात्मक मजबूती निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा जांच का दायरा कितना व्यापक होगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।
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Author: UP Tak News
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