New Delhi: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत इस मामले में कल अपना फैसला सुना सकती है। याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने संबंधी जारी नोटिस को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए अनुमति की आवश्यकता, पुलिस की कार्रवाई की वैधता और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। दिल्ली पुलिस ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर भी आपत्ति जताई।
New Delhi: क्या है पूरा मामला?
नेहा बोरा ने अदालत में याचिका दायर कर शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। यह नोटिस मंडी हाउस में प्रस्तावित बैठक और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बाद जारी किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नोटिस जारी करते समय कानूनी प्रक्रिया और जरूरी तथ्यों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। नेहा बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित पेश हुए।
New Delhi: नेहा बोरा के वकील ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि संबंधित नोटिस कानूनी और संवैधानिक रूप से त्रुटिपूर्ण है। उनके अनुसार, अधिकारियों ने बॉन्ड की मांग करने से पहले कानून के तहत आवश्यक संतुष्टि दर्ज नहीं की।
उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के विरोध में मंडी हाउस में बैठक बुलाने का आह्वान किया गया था। याचिकाकर्ता का पक्ष था कि सोशल मीडिया पोस्ट में हिंसा या किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए लोगों को उकसाने की बात नहीं कही गई थी।
वकील ने यह भी दलील दी कि कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन का आयोजन किसी अन्य संगठन ने किया था, जबकि नेहा बोरा का आह्वान मंडी हाउस में बैठक से संबंधित था।
New Delhi: ‘तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं’
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए अनुमति की आवश्यकता का मुद्दा भी उठा। याचिकाकर्ता के वकील ने नोटिस में बिना अनुमति राष्ट्रीय ध्वज फहराने से संबंधित आरोप पर सवाल उठाया।
उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह का आरोप नोटिस में शामिल करना तथ्यों पर उचित विचार किए बिना कार्रवाई किए जाने का संकेत है। वकील ने नोटिस को ‘कट-एंड-पेस्ट’ तरीके से तैयार किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों ने मामले की परिस्थितियों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कानूनी रूप से आवश्यक जांच और प्रासंगिक सामग्री पर विचार किए बिना अंतरिम बॉन्ड भरने की मांग नहीं की जानी चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध क्यों किया?
दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि BNSS की धारा 126 और 130 को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता और संबंधित कार्रवाई सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से की गई निवारक कार्रवाई है।
पुलिस ने अदालत को बताया कि नेहा बोरा के खिलाफ पहले से छह एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के समय मंडी हाउस क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत नहीं, बल्कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता से अलग कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता नहीं—बल्कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बजाय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता?
पुलिस का मुख्य तर्क था कि घटना के समय क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी और अधिकारियों के पास शांति भंग होने की आशंका के आधार मौजूद थे। इन आधारों में कलंदरा, एफआईआर और जनरल डायरी की प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अदालत की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सुरक्षा उपायों के महत्व पर जोर दिया। अदालत की टिप्पणी थी कि जब किसी मामले में व्यक्ति की स्वतंत्रता दांव पर हो, तो कानून की प्रक्रिया और उसमें निर्धारित आवश्यकताएं ही नागरिक के लिए प्रमुख सुरक्षा उपाय होती हैं।
अदालत ने जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति से बॉन्ड भरवाने के सामाजिक और मानसिक प्रभाव पर भी चिंता जताई। सुनवाई में इस बात पर चर्चा हुई कि ऐसी कार्रवाई से व्यक्ति पर पहले से ही गलत छवि का ठप्पा लग सकता है।
अदालत के समक्ष यह तर्क भी रखा गया कि इस तरह की कार्रवाई का संबंध संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ता है।
अब कल के फैसले पर नजर
नेहा बोरा की याचिका पर फैसला सुरक्षित होने के बाद अब अदालत के अगले आदेश का इंतजार है। मामले में मुख्य सवाल यह है कि संबंधित नोटिस जारी करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं और क्या उपलब्ध तथ्यों के आधार पर बॉन्ड की मांग उचित थी।
अदालत का फैसला यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि निवारक कार्रवाई के मामलों में अधिकारियों को किन प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन करना चाहिए। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
UP Tak News
Note: ⇒ We hope you liked this information, all the sources of this information are taken from all the sources available on the internet, by order of Team UP Tak News
You can read news related to Uttar Pradesh by Clicking here
⇒ Follow Us On Our Social Handle UP TAK NEWS
Author: UP Tak News
UP TAK NEWS वेब बेस्ड न्यूज़ चैनल है जो Uttar Pradesh क्षेत्र में एक सार्थक,सकारात्मक और प्रभावी रिसर्च बेस्ड पत्रकारिता के लिए अपनी जाना जाता है.चैनल के माध्यम से न्यूज़ बुलेटिन, न्यूज़ स्टोरी, डाक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ UP क्षेत्र और अन्य ख़बरों को प्रसारित किया जाता है. राजनीति, युवा, सांस्कृतिक, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कल्चर, फ़ूड, और अन्य क्षेत्र में एक मजबूत पत्रकारिता चैनल का उद्देश्य है. UP TAK NEWS न्यूज़ चैनल की ख़बरों को आप चैनल की वेबसाइट-www.uptaknews.in से भी आप ख़बरों को पढ़ सकते हैं. जुड़े रहिये हमारे साथ |