AI Deepfake Policy: केंद्र सरकार ने AI-जनरेटेड और डीपफेक सामग्री के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर सख्त नियम लागू किए हैं। अब प्लेटफॉर्म को चिन्हित आपत्तिजनक सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा, जबकि पहले यह समय सीमा 36 घंटे थी। उपयोगकर्ताओं को AI सामग्री पोस्ट करते समय उसका खुलासा करना अनिवार्य होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे।
केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित और डीपफेक सामग्री के संबंध में ऑनलाइन प्लेटफार्मों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार, एक्स, इंस्टाग्राम सहित सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्मों को किसी सक्षम प्राधिकरण या अदालत द्वारा चिन्हित एआई-जनित या सिंथेटिक सामग्री को अधिकतम तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी। इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं पर भी जिम्मेदारी डाली गई है। उपयोगकर्ताओं को एआई द्वारा निर्मित या संशोधित सामग्री पोस्ट करते समय उसका खुलासा करना होगा, जबकि प्लेटफार्मों को ऐसी घोषणाओं के सत्यापन के लिए तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।
AI Deepfake Policy: 20 फरवरी से लागू हो जायेंगे नए नियम
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। संशोधन में पहली बार ‘एआइ-जेनरेटेड’ और ‘सिंथेटिक सूचना’ की औपचारिक परिभाषा दी गई है, जिसमें ऐसे ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल कंटेंट शामिल हैं जो कृत्रिम रूप से बनाए गए हैं लेकिन वास्तविकता के समान प्रतीत होते हैं। हालांकि सामान्य संपादन, शैक्षणिक उपयोग या डिजाइन से संबंधित सद्भावनापूर्ण कार्यों को इससे बाहर रखा गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एआइ द्वारा निर्मित कंटेंट को भी सूचना की श्रेणी में माना जाएगा और उस पर वही कानूनी मानक लागू होंगे जो अन्य डिजिटल कंटेंट पर लागू होते हैं। इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के निस्तारण की समय सीमा भी कम कर दी गई है ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
AI Deepfake Policy: कंपनियों को करनी होगी एआइ कंटेंट की लेबलिंग
नए नियमों के अनुसार, जिन प्लेटफॉर्म पर एआइ या सिंथेटिक कंटेंट का निर्माण या साझा किया जाता है, उन्हें ऐसी सामग्री पर स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल लगाना होगा।
साथ ही जहां तकनीकी रूप से संभव हो, स्थायी मेटाडाटा या पहचान चिह्न भी जोड़ना अनिवार्य होगा। एक बार लगाए गए लेबल या मेटाडाटा को हटाने या दबाने की अनुमति नहीं होगी।
आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स लगाएं सरकार ने अवैध, भ्रामक, यौन शोषण से जुड़े, बिना सहमति वाले, फर्जी दस्तावेज, बाल शोषण सामग्री, विस्फोटक या प्रतिरूपण से संबंधित एआइ कंटेंट पर रोक लगाने के लिए प्लेटफार्म को ऑटोमेटेड टूल्स (साफ्टवेयर) तैनात करने का भी निर्देश दिया है।
इन कदमों का लक्ष्य डिजिटल प्लेटफार्मों पर पारदर्शिता को बढ़ाना और उपयोगकर्ताओं, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं, को डीपफेक और भ्रामक सामग्री से सुरक्षित रखना है। मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, प्लेटफार्म को अपने उपयोगकर्ताओं को हर तीन महीने में सरल और प्रभावी तरीके से यह जानकारी प्रदान करनी होगी कि एआई के दुरुपयोग या नियमों के उल्लंघन के क्या परिणाम हो सकते हैं।
AI Deepfake Policy: क्या है 10% विजिबिलिटी रूल?
लेबल के दृश्य भाग के लिए, सरकार ने विशेष भौतिक मानक निर्धारित किए हैं ताकि उपयोगकर्ता को लेबल देखने के लिए अपनी आंखें न सिकोड़नी पड़े और उसे आसानी से लेबल की वास्तविकता का पता चल सके।
विजुअल कंटेंट: लेबल को विजुअल डिस्प्ले क्षेत्र का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा कवर करना चाहिए।
ऑडियो कंटेंट: डिस्क्लोजर क्लिप के कुल समय का कम से कम 10% होना चाहिए।
AI Deepfake Policy: कानून का उल्लंघन करने वाले कंटेंट पोस्ट न हों
आइएएनएस के अनुसार, इंटरनेट मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी उपायों को अपनाना होगा कि कोई उपयोगकर्ता ऐसा एआइ सामग्री साझा न कर सके जो भारतीय कानूनों का उल्लंघन करती हो।
इसमें भारतीय न्याय संहिता 2023, पॉक्सो अधिनियम 2012 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 जैसे कानूनों का विशेष उल्लेख किया गया है।
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