Dharmsthala Case: धर्मस्थल मंदिर के एक पूर्व सफाईकर्मी ने सनसनीखेज दावा किया है। उसने कहा कि उसने जंगल और नदी के पास 100 से अधिक अज्ञात लोगों को दफनाया है। यह काम उसने मंदिर प्रशासन के निर्देश पर किया था।
Dharmsthala Case: धर्मस्थला मंदिर क्षेत्र में सफाई कर्मचारी के सनसनीखेज खुलासे ने सबको चौंका दिया है। सफाईकर्मी का आरोप है कि 1995 से 2014 के बीच, मंदिर प्रशासन के कहने पर उसने कई शवों को नदी किनारे और जंगल में दफनाया। उसने यह भी बताया कि कुछ शवों पर यौन शोषण के निशान भी मौजूद थे। कर्मचारी ने कहा कि पुलिस या स्थानीय प्रशासन को इनको दफनाने की कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। मंदिर के सूचना केंद्र से ही शवों को गाड़ने का आदेश मिलता था। इस खुलासे के बाद, एक विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रहा है। सफाईकर्मी की बताई 15 जगहों पर खुदाई की जा रही है। वहां से शवों के अवशेष मिलने की उम्मीद है। इंडिया टुडे से बातचीत में, सफाई कर्मचारी ने घटना से जुड़ी कई बातें बताईं।
Dharmsthala Case: कर्मचारी को मंदिर मिलते थे निर्देश
सफाई कर्मचारी ने बताया कि वह धर्मस्थला मंदिर प्रशासन के लिए काम करता था। उसकी टीम में चार लोग थे. वे मिलकर शवों को दफनाने का काम करते थे। उसने आगे बताया कि शवों को दफनाने के सभी निर्देश सीधे मंदिर के सूचना केंद्र से मिलते थे। इसमें स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत के अधिकारी शामिल नहीं थे। सूचना केंद्र से ही आदेश जारी होते थे कि क्या कार्य करना है। और शवों को कैसे और कहाँ दफनाना है।
Dharmsthala Case: कहां दफनाते थे शव?
“शवों को दफनाने के लिए कोई कब्रिस्तान नहीं था। हमने जंगल में, सड़कों पर और नदियों के किनारे शवों को ठिकाने लगाया. बाहुबली हिल्स पर हमने एक महिला को दफनाया था। तकरीबन 70 शव नेत्रावती स्नान घाट पर गाड़े थे “
सफाई कर्मचारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने कई बार शवों को दफनाते देखा। उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्हें इससे कोई समस्या नहीं थी। कर्मचारी ने बताया कि कुछ शवों पर यौन शोषण और हिंसा के स्पष्ट निशान थे। यह स्पष्ट था कि उनका यौन शोषण हुआ था। लेकिन, इसकी पुष्टि केवल एक मेडिकल विशेषज्ञ ही कर सकते थे। दफनाए गए शवों में बच्चे और बूढ़े सभी शामिल थे। महिलाओं की संख्या अधिक थी। व्हिसलब्लोअर ने एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “अगर 100 शव थे, तो करीब 90 महिलाएं थीं।”
Dharmsthala Case: दफनाने की जगहें ‘गायब’
कर्मचारी का कहना है कि कई दफनाने की जगह अब अनुपलब्ध हैं। घने जंगल और निर्माण कार्यों ने इनकी पहचान मुश्किल बना दी है। खुदाई के बाद पुलिस को अब तक केवल एक कंकाल मिला है। दावा है कि सैकड़ों शवों को दफनाया गया था। पर मिले कंकालों की संख्या इससे काफी कम है। इसके क्या कारण हो सकते हैं? क्या सफाई कर्मचारी का दावा सही है?
सफाई कर्मचारी ने कहा कि लोगों को जो कहना है कहने दीजिए। उन्होंने कहा कि लाशें हमने दफनाई है और हम सच बोल रहे हैं। सफाईकर्मी ने SIT पर अपना भरोसा जताया, लेकिन चिंता जताई कि जांच टीम उन पर भरोसा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा,
मैं उन जगहों को दिखाने आया हूं जहां शवों को दफनाया गया था। मैं अपनी याददाश्त के अनुसार ऐसा कर रहा हूँ। जगहें बहुत बदल गई हैं। उन्हें पहचानने के लिए मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूँ। शवों के अवशेष खोजने के लिए जेसीबी से और अधिक खुदाई की आवश्यकता है।
Dharmsthala Case: 2012 का सौजन्या हत्याकांड
उस समय साल 2012 में 17 वर्षीय सौजन्या का शव धर्मस्थला के पास एक सुनसान क्षेत्र में पाया गया। एक सफाई कर्मचारी ने बताया कि उस रात मंदिर से मुझे एक कॉल आया था। उससे पूछा गया कि वह कहां है। उस समय वह छुट्टी पर था। कॉल करने वाले को पता चला तो वे बहुत क्रोधित हुए। अगले दिन उन्हें लड़की का शव मिला।
Dharmsthala Case: इतने सालों बाद ये सब क्यों बताया?
एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने धर्मस्थला लौटने की वजह बताई। की उसे कंकालों के सपने आ रहे थे। वह अपराधबोध से ग्रसित था। अज्ञात लोगों के शवों को दफनाने का बोझ उसे सता रहा था। उसका एक ही लक्ष्य था। वह शवों को ढूंढकर उनका अंतिम संस्कार करना चाहता है। उसका मंदिर को बदनाम करने का कोई इरादा नहीं था। उसके पास भागने का कोई कारण नहीं है। काम पूरा करके वह परिवार के पास लौटना चाहता है।
यह मामला पिछले महीने सामने आया। एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने दावा किया। उसने और उसके साथियों ने 1995 से 2014 के बीच 100 से अधिक शव दफनाए। इनमें ज्यादातर महिलाएं और नाबालिग लड़कियां थीं। इस दावे के बाद एसआईटी जांच कर रही है। 13 से 15 संदिग्ध जगहों की खुदाई हुई। वहां शवों के अवशेष तलाशे जा रहे हैं।
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