Isro Mission 2025: इसरो का साल का आखिरी मिशन क्या है? कैसे भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि बनेगा? जिस मिशन का भारत ने बीड़ा उठाया है, वह सैटेलाइट क्यों खास है? कैसे इसरो की मदद से आने वाले समय में अमेरिकी कंपनी मोबाइल नेटवर्क का पूरा स्वरूप बदल सकती है और स्टारलिंक जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है? आइये जानते हैं…
ISRO BLUEBIRD Mission 2025: भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) इस साल के अपने आखिरी मिशन में इतिहास रचने जा रहा है। 24 दिसंबर (बुधवार) को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी अमेरिका की कंपनी एएसटी स्पेस मोबाइल के एक अहम सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए मंगलवार को 24 घंटे का काउंटडाउन भी शुरू हो गया। एलवीएम3-एम6 मिशन के जरिए अमेरिकी कंपनी के कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाना है। अगर यह मिशन सफल होता है तो भारत से लेकर पूरी दुनिया के लिए यह अहम मौका बनेगा।
ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि आखिरकार इसरो का यह मिशन क्या है? यह भारत के लिए कैसे एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा? जिस मिशन का भारत ने जिम्मा लिया है, वह सैटेलाइट क्यों विशेष है? इसरो की सहायता से आने वाले समय में अमेरिकी कंपनियाँ मोबाइल नेटवर्क का पूरा ढांचा कैसे बदल सकती हैं और स्टारलिंक जैसी कंपनियों के लिए चुनौती कैसे बन सकती हैं? आइए जानते हैं…
Isro Mission 2025: क्या है इसरो का मिशन, क्या इतिहास बनाने की तैयारी?
इसरो के इस मिशन का नाम एलवीएम3-एम6 ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (LVM3-M6 / BlueBird Block-2) है। यह पूरी तरह से कॉमर्शियल लॉन्चिंग है। यह मिशन अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए है। इसरो इसकी लॉन्चिंग के लिए अपने एलवीएम3 रॉकेट का इस्तेमाल करेगा, जो कि इस लॉन्च व्हीकल की छठवीं उड़ान होगी और वाणिज्यिक मिशन के लिए तीसरी। भारत के इस लॉन्च व्हीकल को पहले ही इसकी क्षमताओं के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया जा चुका है।
Isro Mission 2025: कैसे यह मिशन भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनेगा?
भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण मिशन है, क्योंकि लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम3) रॉकेट की छठी उड़ान सफल होने से कमर्शियल स्पेस सेक्टर में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह का वजन लगभग 6,500 किलोग्राम है। यदि भारतीय लॉन्च व्हीकल इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने वाला सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह होगा।
भारत ने अपने एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल के माध्यम से चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट प्रदान करने वाली कंपनी वन वेब के सैटेलाइट लॉन्चिंग मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस मिशन में, इसरो ने एलवीएम का उपयोग करते हुए दो चरणों में कुल 72 सैटेलाइट्स को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया।
मिशन में शामिल सैटेलाइट क्यों महत्वपूर्ण है, और दुनिया को इससे क्या लाभ होगा?
Isro BlueBird Block-2 Mission 2025: बिना टावर की रेंज में आए भी सिग्नल प्राप्त होता रहेगा।
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एक अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जेन) की प्रणाली का हिस्सा है। अगर यह उपग्रह सही कक्षा में स्थापित हो जाता है और कंपनी के परीक्षण सफल होते हैं तो इसके जरिए 4जी और 5जी स्मार्टफोन पर सीधे सेल्युलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी। उपभोक्ता को किसी अतिरिक्त एंटीना या कस्टमाइज्ड हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल सेलफोन को 4जी या 5जी नेटवर्क हासिल करने के लिए मोबाइल टावर की जरूरत होती है, लेकिन इस उपग्रह के सफल होने के बाद टावर का काम खत्म हो सकता है।
Isro BlueBird Block-2 Mission 2025: दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच
चूंकि उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने के साथ कुछ सबसे दूरस्थ स्थानों जैसे हिमालय, महासागरों और रेगिस्तानों तक मोबाइल सेवा पहुंचा सकता है, ऐसे में इन क्षेत्रों में 4जी-5जी नेटवर्क सुविधा पहुंचाना आसान हो जाएगा। इससे वैश्विक स्तर पर डिजिटल असमानता को कम भी किया जा सकता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों, खुले पानी और उड़ानों के दौरान नेटवर्क कवरेज की खामियों को खत्म कर सकता है। आमतौर पर इन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और यहां पहुंच न होने की वजह से पारंपरिक सेल्युलर नेटवर्क यहां फेल हो जाते हैं।
इतना ही नहीं, जब आपदा की स्थिति में टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे तूफान, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होता है, तब भी सैटेलाइट नेटवर्क की स्थिति बेहतर होती है। इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेश यूनियन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक दुनिया भर में 200 करोड़ लोग अब भी इंटरनेट या नेटवर्क कवरेज के बिना रहने के लिए मजबूर हैं।
Isro BlueBird Block-2 Mission 2025: बेहतर स्पीड और क्षमता
इस उपग्रह को 5,600 से अधिक व्यक्तिगत सिग्नल सेल बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह 120 मेगाबाइट्स प्रति सेकंड तक की अधिकतम गति (पीक स्पीड) प्रदान करने में सक्षम है। यह स्पीड वॉइस कॉलिंग, मैसेजिंग, तेज डाटा ट्रांसफर और बिना रुकावट की वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए पर्याप्त है।
लॉन्च सफल होने पर आगे क्या संभावनाएं हो सकती हैं?
अगर इसरो इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो इसके बाद सैटेलाइट कंपनी ऑपरेशनल टेस्टिंग का कार्य करेगी। इसके पश्चात वैश्विक सेवाओं की शुरुआत होगी और विभिन्न देशों से लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया आरंभ होगी।
परीक्षण का चरण
लॉन्च के सफल होने और उपग्रह के स्थापित होने के बाद उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा में टेस्ट किया जाएगा। सबसे पहले उपग्रह अपने एंटीना को खोलेगा, जो कि 223 वर्ग मीटर (2400 वर्ग फीट) का होगा। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार एंटीना होगा, जिससे बड़े क्षेत्र में डायरेक्ट सिग्नल मुहैया कराए जा सकेंगे। उपग्रह का सही स्थिति में संचालन शुरू होने के बाद वाणिज्यिक सेवाएं शुरू होने से पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए कुछ मोबाइल नेटवर्क पहले से तय किए गए हैं।
नेटवर्क फैलाने की शुरुआत
कंपनी का उद्देश्य अमेरिका में कुछ विशेष मोबाइल हैंडसेट में यह सुविधा प्रदान करना है। हालांकि, इसे वैश्विक स्तर पर लॉन्च करने के लिए विभिन्न देशों के नियामकों से अनुमोदन मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया जा सकता है।
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