UP Banda News: यह खबर उत्तर प्रदेश के एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले से जुड़ी है, जिसमें पॉक्सो एक्ट के तहत अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। एक दंपती पर आरोप था कि उन्होंने 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया।
अदालत का फैसला
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- दंपती को फांसी की सजा सुनाई गई।
- 33 पीड़ित बच्चों में से प्रत्येक को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
- मुआवजा राज्य सरकार द्वारा पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत दिया जाएगा।
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जांच कैसे आगे बढ़ी?
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- बच्चों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 CrPC के तहत दर्ज किए गए।
- मेडिकल जांच और फॉरेंसिक सबूत जुटाए गए।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (मोबाइल/कैमरा आदि) जब्त कर डिजिटल साक्ष्य की जांच की गई।
- चूंकि मामला नाबालिगों से जुड़ा था, इसलिए सुनवाई विशेष POCSO अदालत में इन-कैमरा (बंद कमरे) में हुई।
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सजा इतनी कड़ी क्यों?
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- अदालत ने सजा तय करते समय कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया
- पीड़ितों की संख्या (33 बच्चे)
- अपराध की निरंतरता और सुनियोजित प्रकृति
- बच्चों की उम्र
- मानसिक और शारीरिक आघात
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Banda, UP Tak News: बांदा की विशेष अदालत ने 33 निर्दोष बच्चों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो को विदेशों में बेचने के लिए दोषी ठहराए गए दंपती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
बांदा की एक विशेष अदालत ने प्रारंभिक यौन शोषण के आरोप में एक दंपती को फांसी की सजा सुनाई है। इस दंपती पर 33 निर्दोष बच्चों के साथ घिनौनी हरकतें करने और उनकी अश्लील वीडियो व तस्वीरें विदेशों में बेचकर लाखों रुपये कमाने का गंभीर आरोप था। अदालत ने पीड़ित बच्चों के परिवारों को राज्य और केंद्र सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी आदेश दिया है। यह मामला तब सामने आया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपनी गहन जांच और पुख्ता सबूतों के आधार पर सिंचाई विभाग के निलंबित अवर अभियंता रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को लगभग पांच साल पहले गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उनके घर से पेन ड्राइव, लैपटॉप और मोबाइल जैसे कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए थे। इनमें इस जघन्य अपराध से जुड़े और अहम सुराग मिले थे।
UP Banda News: कोर्ट ने आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई
विशेष अदालत ने गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर दंपती को दोषी ठहराया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर और दुर्लभतम श्रेणी में आता है, जिसमें बच्चों की मासूमियत को नष्ट किया गया। बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालने और समाज में इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए, अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
UP Banda News: पूरा मामला क्या है?
एक दंपती पर आरोप था कि उन्होंने 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया। मामला Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) के तहत चलाया गया। यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है और इसमें कठोर से कठोर सजा का प्रावधान है।
UP Banda News: 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का दिया निर्देश
अदालत ने न केवल आरोपियों को कड़ा दंड दिया है, बल्कि पीड़ित बच्चों के परिवारों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई है। अदालत ने यह आदेश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे के परिवार को राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। यह राशि पीड़ितों के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक सिद्ध होगी।
UP Banda News: पॉक्सो एक्ट में फांसी की सजा कब?
2019 में कानून में संशोधन के बाद 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान जोड़ा गया था। इस मामले में अपराध की गंभीरता और पीड़ितों की संख्या को देखते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया। यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्ती का संदेश देता है।
मामला क्या था?
- आरोप था कि दंपती बच्चों को लालच, भरोसे या दबाव में अपने संपर्क में लाते थे।
- कई मामलों में बच्चों को बहला-फुसलाकर घर या अन्य जगहों पर ले जाया जाता था।
- वहां उनके साथ दुष्कर्म और अन्य यौन अपराध किए जाते थे।
- जांच में यह भी सामने आया कि कुछ घटनाओं की रिकॉर्डिंग की गई थी (डिजिटल सबूत बरामद हुए)।
- कुल 33 बच्चों ने बयान दिए, जिनमें अधिकांश नाबालिग थे।
🧾 किन धाराओं में केस चला?
- मामला Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज हुआ, जिनमें शामिल हैं:
- गंभीर यौन उत्पीड़न
- दुष्कर्म (IPC की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं)
- आपराधिक साजिश
- आईटी एक्ट (यदि डिजिटल रिकॉर्डिंग/प्रसारण पाया गया)
🔎 जांच में क्या मिला?
- बच्चों के 164 CrPC के तहत दर्ज बयान
- मेडिकल रिपोर्ट
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से फॉरेंसिक साक्ष्य
- गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्य
- अदालत ने सबूतों को विश्वसनीय मानते हुए दंपती को दोषी ठहराया।
⚖️ अदालत का फैसला
- दोनों को मृत्युदंड (फांसी)
- 33 पीड़ितों को ₹10-10 लाख मुआवजा
- सजा को “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” मानते हुए कड़ी टिप्पणी
सजा इतनी कड़ी क्यों?
- अदालत ने सजा तय करते समय कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया:
- पीड़ितों की संख्या (33 बच्चे)
- अपराध की निरंतरता और सुनियोजित प्रकृति
- बच्चों की उम्र
- मानसिक और शारीरिक आघात
चित्रकूट में बच्चों का यौन शोषण करने वाले पति-पत्नी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। ये दोनों बच्चों के वीडियो-फोटो डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे।
दोषी पति सिंचाई विभाग का जेई था। उसकी पोस्टिंग चित्रकूट में थी। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों… pic.twitter.com/nTlyvCLiQS
— Srishti (@Srishtivishwak4) February 20, 2026
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Author: UP Tak News
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