West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है, हालांकि एक जहाज पहुंच चुका है। सरकार ईरान से फंसे जहाजों पर बातचीत कर रही है और अमेरिका-रूस से भी एलपीजी/एलएनजी की खरीद की गई है।
मंगलवार सुबह एक और जहाज जो एलपीजी से भरा हुआ था, भारतीय तट पर पहुंचा, लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट संकेत दिए गए कि वर्तमान स्थिति अभी स्थिर नहीं है और यदि अगले कुछ दिनों में विदेशी एलपीजी टैंकर भारतीय रिफाइनरियों तक नहीं पहुंचते हैं, तो आने वाले दिनों में संकट और बढ़ सकता है।
West Asia Crisis: ईरान के साथ बातचीत जारी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को दो बार यह कहा कि देश में एलपीजी की स्थिति गंभीर बनी हुई है। होर्मुज जलडमरुमध्य में फंसे एलजीपी और कच्चे तेल के टैंकरों से लदे एक दर्जन भारतीय जहाजों की स्थिति मंगलवार रात खबर लिखे जाने तक स्पष्ट नहीं थी, हालांकि विदेश मंत्रालय ने बताया है कि इस मामले में ईरान के साथ बातचीत चल रही है।
- सरकार ने जानकारी दी है कि होर्मुज मार्ग से एलपीजी से भरा जहाज शिवालिक मुंद्रा पोर्ट पर मंगलवार सुबह 2.30 बजे पहुंचा।
- सोमवार शाम को एक और एलपीजी वाहक जहाज आया था। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इनसे केवल सीमित और अस्थायी राहत ही प्राप्त होगी।
- भारत की विशाल खपत के मुकाबले इन जहाजों की आपूर्ति बेहद कम है।
देश में रोजाना करीब 60 हजार टन एलपीजी की आवश्यकता होती है, जबकि इन दोनों जहाजों में मिलाकर 93 हजार टन एलपीजी होने की जानकारी सामने आई है। इससे दीर्घकालिक राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती। - दीर्घकालिक राहत तभी संभव है जब होर्मुज पूरी तरह से खुल जाए या फिर दूसरे समुद्री मार्ग से एलपीजी की निरंतर आपूर्ति शुरू हो जाए। खाड़ी क्षेत्र के कई एलपीजी उत्पादक देशों की स्थिति भी स्पष्ट है और उनके कई एलपीजी टैंकर विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। एलपीजी की आवक को लेकर स्पष्टता का अभाव एक बड़ी समस्या है।
West Asia Crisis: घरेलू एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता
सरकारी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि अमेरिका से एलपीजी खरीदी गई है, लेकिन अमेरिकी एलपीजी के भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचने में चार से पांच हफ्ते का समय लगता है। रूस से एलएनजी खरीदने की भी खबर है, लेकिन इसे एलपीजी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें अतिरिक्त समय लगेगा। इस स्थिति में राहत की एकमात्र बात यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले ही अस्थायी रूप से देश की रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। सोमवार तक रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन 38 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।
West Asia Crisis: पेट्रोलियम मंत्रालय का डाटा
- समस्या यह है कि घरेलू उत्पादन को एक सीमित स्तर तक ही बढ़ाया जा सकता है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का 60 प्रतिशत आयात करता है और 40 प्रतिशत घरेलू स्तर पर उत्पादित करता है।
- आयातित कुल एलपीजी का 90 प्रतिशत होर्मुज मार्ग से आता है।
- पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल, 2025 से फरवरी, 2026 के बीच भारत ने 1.89 करोड़ मैट्रिक टन एलपीजी का आयात किया है और 1.1 करोड़ मैट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन किया है।
- सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के बाद, दुनिया के दो सबसे बड़े उपभोक्ता देश, चीन और भारत, एलपीजी खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय कंपनियों को इस सौदे को अंतिम रूप देने में चीनी कंपनियों की आक्रामक बोली का सामना करना पड़ रहा है।
West Asia Crisis: फौरन पीएनजी पाइपलाइन बिछाने के प्रस्ताव को मिलेगी मंजूरी
पश्चिम एशिया की समस्या ने एलपीजी के संबंध में जो चिंताएँ उत्पन्न की हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए सरकार ने पूरे देश में पीएनजी बिछाने के कार्य को युद्ध स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है। राज्यों को निर्देशित किया गया है कि वे वर्तमान परिस्थितियों में पीएनजी पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन देने के नियमों को अधिक उदार बनाएं।
West Asia Crisis: सभी राज्यों को निर्देश
- पेट्रोलियम मंत्रालय के संयुक्त सचिव शर्मा ने बताया कि एलपीजी की स्थिति गंभीर है। हालांकि, एलपीजी की आपूर्ति और वितरण की स्थिति पहले जैसी बनी हुई है।
- पीएनजी पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस संदर्भ में सभी राज्यों को निर्देशित किया गया है कि वे पीएनपी पाइपलाइन बिछाने के पुराने सभी प्रस्तावों को तुरंत मंजूरी दें।
- जो नए प्रस्ताव आएं, उन्हें 24 घंटे के भीतर मंजूरी दी जाए। पाइपलाइन बिछाने की नीतियों को तुरंत उदार बनाना चाहिए और संबंधित अधिकारियों की त्वरित नियुक्ति करनी चाहिए। देश में 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन धारक हैं, जबकि केवल 1.5 करोड़ पीएनजी कनेक्शन हैं।
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