Ballia, UP News: भृगु ऋषि की पावन धरती बलिया हमेशा से अपनी परंपराओं, लोकगीतों और त्याग की भावना के लिए जानी जाती है। इसी परंपरा की आत्मा है ददरी मेला, जहाँ आस्था, परिश्रम और प्रेम एक साथ उमड़ते हैं।
यह मेला सिर्फ़ व्यापार नहीं, बल्कि जनजीवन और संस्कृति का उत्सव है — जहाँ हर बूढ़ा, बच्चा और नौजवान अपनी मिट्टी से जुड़ता है।
इसी सांस्कृतिक चेतना को शब्दों में ढालते हैं युवा कवि अभिषेक मिश्रा ‘बलिया’, जिनके लेखन में अपने जनपद के प्रति गहरा सम्मान और अपनापन झलकता है।
उनकी यह रचना, “ददरी मेला: माटी के मान, बलिया के शान”, बलिया की लोकभाषा, मिठास और माटी की खुशबू को अपने भीतर समेटे हुए है।
कवि का मानना है — “मिट्टी की भाषा ही सबसे सच्ची होती है,”
और शायद यही कारण है कि उनकी कविता में हर पंक्ति बलिया की धरती की साँसों से जुड़ी महसूस होती है।
“ददरी मेला: माटी के मान, बलिया के शान”
जहाँ गंगा बोले गर्जन से,
जहाँ धरती में तेज समाइल बा,
जहाँ परंपरा ना मुरझाए,
ऊ धरती बलिया कहलाइल बा।
ई मेला ना सिर्फ़ उत्सव ह,
ई त गौरव के गाथा ह,
जब गंगा किनारे मचेला रौनक,
त मानो राष्ट्रभक्ति के परवाह ह!
ढोलक, मंजीरा, शंख गूंजे,
हर रग में लहर उठेला,
बाबा भृगु के आशीष से
बलिया फिर से जाग उठेला।
गुड़ही जलेबी, खाजा के मिठास,
हर गली में खुशबू घोलत ह,
मिना बाज़ार के रंग-बिरंगी छटा,
हर दिल में खुशी घोलत ह।
बच्चन के हँसी, बुढ़वन के याद,
हर दिल में उमंग जगावेला,
ई ददरी मेला, बलिया के
अभिमान बतावेला।
जहाँ बैल-भैंस के साथ
चलत मेहनत के मेला ह,
जहाँ पसीना बने पूजा,
ऊ धरती भृगु के बेला ह।
कितना बार समय बदलल ह,
कितना युग बदल गइल,
पर बलिया आजो कहे —
हम ना झुकम, ना मुरझाईल ह!
इहाँ जनमले सपूत उ हे,
जे फाँसी पर हँसके चढ़ल,
चन्द्रशेखर आजाद के नाम से
आजो गगन गूंज गइल!
ई मेला सिखावेला —
सौदा ना धन-दौलत के कर,
गर्व कर अपने परिश्रम पर,
जय बोल अपने जन-जन पर!
गंगा के लहर जब पाँव छुवे,
भक्ति अउर वीरता मिल जाला,
हर आँख में जोश भर जाला,
हर दिल में बलिया खिल जाला।
भृगु बाबा के नगरी में,
संस्कारन के दीप जले,
माटी बोले, “हमरा सपूत
आजो धरती पे वीर हले!”
ई ददरी मेला ना बस मेला ह,
ई इतिहास के साँस ह,
जहाँ श्रम, श्रद्धा, शौर्य,
तीनों के संग एहसास ह।
हर साल जब आवे सावन-भादो,
हर दिल में बस एक राग उठे,
बलिया बोले छाती ठोक —
“हमरा संस्कृति आजो जाग उठे!”
माँ गंगा के साक्षी में,
चल रहल संस्कारन के अभियान,
ददरी मेला — मात्र एगो मेला ना,
ई त बलिया के सम्मान, भारत के अभिमान ह!
जय हो बलिया, जय हो ददरी मेला!
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Author: Abhishek Mishra
अभिषेक मिश्रा , यूपी तक न्यूज़ में एक सीनियर पत्रकार व एक प्रशिद्ध कवि भी हैं। वे काव्य और क्राइम, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाते हैं। मीडिया में उन्हें 1 साल का अनुभव है। ये करीब एक साल से UP Tak News Media Publication (Digital) के यूपी/उत्तराखंड टीम में कार्यरत हैं। और ये खासकर बलिया जनपद से जुडी रिपोटिंग करते है।