Paper leak Case: पीएम मोदी का बड़ा एलान: पेपर लीक के खिलाफ आएगा सख्त कानून और बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट। सोनम वांगचुक ने तोड़ा 26 दिनों का अनशन, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP। पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली: नीट (NEET) और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में पेपर लीक की लगातार सामने आती घटनाओं के बीच देश की राजनीति और छात्र आंदोलनों में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात देश के नाम जारी एक विशेष वीडियो संदेश में घोषणा की है कि सरकार पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए एक नया और अत्यंत कठोर कानून लेकर आ रही है। इस विधेयक का खाका शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा और सरकार का लक्ष्य इसे आगामी मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में ही संसद से पारित कराने का है।
Paper leak Case: पीएम मोदी का वीडियो संदेश और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा
वीडियो संदेश से पहले, गुरुवार को दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी दी कि पेपर लीक मामलों में न्याय में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) का गठन किया जाएगा।
“लाखों युवाओं और उनके अभिभावकों के लिए पेपर लीक की घटना बेहद दर्दनाक होती है। हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कड़ा कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।”— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को कलकत्ता, दिल्ली, बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर इन विशेष अदालतों को स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।
Paper leak Case: नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं
दैनिक सुनवाई (Day-to-Day Hearing): फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की प्रतिदिन सुनवाई होगी ताकि दोषियों को कम से कम समय में सजा मिल सके।
कठोर दंड के प्रावधान: नए विधेयक में केवल निचले स्तर के दलालों ही नहीं, बल्कि इसमें शामिल संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त गैर-जमानती धाराएं शामिल की जा रही हैं।
समयबद्ध जांच: केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) को भी जांच की गति तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री की इस घोषणा और सरकार के रुख के तुरंत बाद, गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती प्रसिद्ध शिक्षाविद् व जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों से जारी अनशन समाप्त कर दिया। 28 जून से जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठे वांगचुक का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले सफदरजंग और फिर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मंत्रियों की मौजूदगी: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की।
जूस पिलाकर तुड़वाया Fast: जे.पी. नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
शांति की अपील: अनशन तोड़ने के बाद वांगचुक ने कहा, “लंबे विचार-विमर्श और देश में किसी भी प्रकार की हिंसा की आशंका को टालने के लिए मैंने यह कदम उठाया है। मैं सभी से शांत रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का आग्रह करता हूँ।” प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया पर वांगचुक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
प्रशासनिक फेरबदल: उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी हटाए गए
विवादों के बीच केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा कदम उठाया है। नीट-यूजी का आयोजन कराने वाली संस्था ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) के प्रशासनिक मुखिया और उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को उनके पद से हटा दिया गया है।
विनीत जोशी इससे पूर्व एनटीए (NTA) के महानिदेशक और सीबीएसई (CBSE) के चेयरमैन रह चुके हैं। हाल ही में यूजीसी द्वारा लाए गए समता कानून को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।
जे.पी. नड्डा ने वांगचुक को पिलाया जूस
नीट परीक्षा में पारदर्शिता की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें पहले सफदरजंग और बाद में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अनशन के 27वें दिन (अस्पताल भर्ती के 26वें दिन) सरकार के आश्वासन और नए कानून के ऐलान के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह देर रात मेदांता अस्पताल पहुंचे। स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने स्वयं सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया। वांगचुक ने देश के छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा या उत्तेजना का रास्ता न अपनाएं और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी बात रखें।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कड़ा रुख: “प्रधान का इस्तीफा चाहिए”
प्रधानमंत्री की घोषणाओं के बावजूद छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना आंदोलन वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है। संगठन का कहना है कि सजा बढ़ाना और कोर्ट बनाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
CJP के प्रमुख तर्क व मांगें
CJP अध्यक्ष अभिजीत दीपके और मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन खत्म नहीं होगा।
“सरकार केवल यह बता रही है कि पेपर लीक के बाद क्या सजा मिलेगी। असली सवाल यह है कि पेपर लीक हो ही क्यों रहे हैं? सिस्टम को चलाने वाले अधिकारी और मंत्री न तो काबिल हैं और न ही जवाबदेह। हमें चोट के बाद पट्टी लगाने वाला नहीं, बल्कि चोट लगने से रोकने वाला सिस्टम चाहिए।”
CJP ने सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि यदि बातचीत करनी है तो सरकार सीधे संगठन से संपर्क करे और वार्ता का स्थान जंतर-मंतर या कॉन्स्टिट्यूशन क्लब जैसे किसी तटस्थ स्थान पर रखा जाए। CJP ने शुक्रवार को देश भर में जिला स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है और सभी छात्र संगठनों से एकजुट होने की अपील की है।
NEET Case: जांच की स्थिति और आंकड़े
सरकार ने रिकॉर्ड समय में 22 लाख छात्रों के लिए पुनः परीक्षा व प्रक्रिया का प्रबंधन किया, जिसका परिणाम 19 जुलाई को जारी किया जा चुका है। 2024 नीट पेपर लीक मामले में 13 लोग हिरासत में हैं और सीबीआई जांच जारी है। हालांकि, मुख्य आरोपी कहे जा रहे संजीव मुखिया को सीबीआई की ओर से क्लीन चिट मिलने पर विपक्ष और छात्र संगठनों ने सवाल उठाए हैं। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक का यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में हंगामेदार बहस का केंद्र बनेगा।
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Author: UP Tak News
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