UGC Act 2026: यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अब फिर से 2012 का पुराना नियम रहेगा लागू, क्या हैं ये 7 महत्वपूर्ण बातें

UGC Act 2026: Supreme Court Stays New UGC Rules, Old 2012 Rules to Remain in Effect, What are these 7 Important Points?

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UGC Act 2026 LIVE Updates: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह कहा है कि जाति से संबंधित नियम स्पष्ट नहीं हैं। विशेषज्ञों को भाषा को और स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। इस समय, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। यूजीसी इक्विटी एक्ट 2026 पर कोर्ट की रोक देशभर में चल रहे विरोध के बीच आई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार सहित कई राज्यों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए यूजीसी के नए ‘कानून’ को एकतरफा बताया जा रहा है।

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अंलकार अग्निहोत्री ने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया है। वहीं सवर्ण जाति संगठनों ने आंदोलन तेज करने की धमकी दी है। 13 जनवरी से चल रहे विरोध के बाद यूजीसी जल्द स्पष्टीकरण जारी कर सकती है। सरकार शिक्षाविद, अधिकारी और यूजीसी को मिलाकर एक हाईलेवल कमेटी बना सकती है। यूजीसी ‘इक्विटी एक्ट 2026’ की ताजा जानकारी के लिए यहां दिए जा रहे अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं।UGC Act 2026: Supreme Court Stays New UGC Rules, Old 2012 Rules to Remain in Effect, What are these 7 Important Points?

UGC Act 2026: यूजीसी का 2012 में पुराना नियम क्या था।

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 17 सितंबर 2012 को भारत के सभी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में समानता को बढ़ावा देने और भेदभाव को रोकने के लिए नियम बनाए थे। तब यूजीसी ने कहा था कि हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज अपने कैंपस में इक्विल अपॉर्च्यूनिटी सेल (EOC) बनाए, जिसका काम एससी और एसटी स्टूडेंट्स की शिकायतें सुनना और कैंपस में समानता का मौहाल बनाना होगा। हालांकि यह सिर्फ एक एडवाइडरी थी, इसे अनिवार्य नहीं किया गया था।

UGC Act 2026: केवल SC-ST तक ही सिमित था यूजीसी 2012 में पुराना नियम

खासतौर पर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) स्टूडेंट्स के लिए बनाए गए थे, इसमें ओबीसी को नहीं जोड़ा गया था। यूजीसी एक्ट 2026 में ओबीसी को भी जोड़ा गया है। एससी-एसटी छात्रों के खिलाफ जाति-भेदभाव के अलावा ये नियम अन्य आधारों जैसे धर्म, भाषा, जातीय, लिंग और दिव्यांगता पर भी लागू होते हैं, लेकिन सिर्फ सलाह के तौर पर-अनिवार्य नहीं।

UGC Act 2026: यूजीसी क्या-क्या काम करता है?

यूजीसी की मुख्य जिम्मेदारियों में-
  • हायर एजुकेशन को प्रोत्साहित करना।
  • डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट्स की मान्यता को सुनिश्चित करना।
  • यूनिवर्सिटीज में शिक्षण, परीक्षा और अनुसंधान के मानकों को निर्धारित करना और बनाए रखना।
  • शिक्षा मानकों के लिए नियम बनाना।
  • कॉलेजिएट और यूनिवर्सिटी शिक्षा के विकास की जिम्मेदारी लेना और अनुदान प्रदान करना।
  • केंद्र और राज्य सरकार तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच समन्वय के साथ कार्य करना।
  • हायर एजुकेशन संस्थानों की।
  • उच्च शिक्षा में गुणवत्ता विकास के लिए पहल करना।

UGC की गाइडलाइन असंवैधानिक थी- TMC सांसद

TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि UGC नियमों पर SC का रोक लगाना सही और जरूरी कदम है। उन्होंने UGC रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का स्वागत किया और इस फैसले को सही और जरूरी बताया। उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने सही काम किया है क्योंकि UGC की गाइडलाइन असंवैधानिक थी।’

BSP सुप्रीमो मायावती ने UGC नए नियम पर रोक का स्वागत किया

UGC Act 2026: पीएम मोदी ने कभी भेदभाव नहीं किया- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यूजीसी के नियमों पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए आरक्षण की शुरुआत करने की बात की। उन्होंने यह भी कहा कि जन प्रतिनिधि पूरी तरह से लोगों के हित में कार्य करते हैं और इस पर जोर दिया कि वर्तमान नेतृत्व के तहत नीतियां बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों की सेवा करने का उद्देश्य रखती हैं।

UGC Act 2026: यूजीसी एक्ट पर SC की रोक का केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यूजीसी एक्ट 2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का स्वागत किया है। उन्होंने कोर्ट के हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का भी धन्यवाद किया और कहा कि यह निर्णय सामाजिक सद्भाव के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

UGC Act 2026: CJI ने कहा- ‘हम सब एक साथ रहते थे… अंतर-जातीय विवाह भी होते हैं’

सुनवाई के दौरान CJI ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से पूछा- अनुसूचित जातियों में ऐसे लोग भी हैं जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो गए हैं। ‘जाति मुक्त समाज बनाने के मामले में हमने जो कुछ भी हासिल किया है, क्या अब हम पीछे जा रहे हैं? CJI ने अलग-अलग जातियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल के रूप में रेगुलेशन में प्रस्तावित करने पर भी सवाल उठाया। CJI कांत ने कहा, ‘भगवान के लिए, ऐसा मत करो! हम सब एक साथ रहते थे… अंतर-जातीय विवाह भी होते हैं।

UGC Act 2026: CJI ने पूछा- क्या रेगुलेशन 3(e) सभी तरह के भेदभाव का ध्यान रखेगा?

CJI सूर्यकांत ने पूछा कि क्या रेगुलेशन 3(e) सभी प्रकार के भेदभाव का ध्यान रखेगा। ‘जब दक्षिण भारत का कोई छात्र, मान लीजिए उसे उत्तर भारत के किसी संस्थान में एडमिशन मिलता है, या इसका उल्टा होता है, और ऐसे छात्र के खिलाफ कुछ व्यंग्यात्मक, अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली टिप्पणियां की जाती हैं, और पीड़ित और हमलावरों की जाति पहचान पता नहीं होती है, तो क्या यह प्रावधान (रेगुलेशन 3(e)) इस मुद्दे को हल करेगा।’

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