Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उप नेता के पद से हटा दिया है। यह निर्णय AAP और चड्ढा के बीच बढ़ती दूरियों की पुष्टि करता है। केजरीवाल के शराब घोटाले में बरी होने के जश्न में उनकी अनुपस्थिति सहित दूरी के कई कारण सामने आए हैं।
आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच की दूरियों की चर्चा काफी समय से चल रही थी, लेकिन बृहस्पतिवार को AAP के निर्णय ने दोनों के रिश्तों में दरार पड़ने की इन चर्चाओं को सही साबित कर दिया। आम आदमी पार्टी ने अपने प्रिय राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है।
दिल्ली के राजनीतिक हलकों में पिछले कई महीनों से इस बारे में कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन न तो राघव चड्ढा इस पर कुछ कह रहे थे और न ही आम आदमी पार्टी। हालांकि, लगातार ऐसे संकेत मिल रहे थे कि पार्टी और राघव चड्ढा के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है।
अरविंद केजरीवाल की सबसे बड़ी खुशी में नहीं हुए शामिल
आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच संबंधों में दरार तब पहली बार उजागर हुई, जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को दिल्ली शराब घोटाले के मामले में राहत मिली। फरवरी के अंत में, जब ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आप’ के बड़े कई नेताओं को आरोपमुक्त किया, तो इसे अरविंद केजरीवाल के लिए पिछले कुछ वर्षों की सबसे बड़ी खुशी का क्षण बताया गया। जबकि पूरी आम आदमी पार्टी इस फैसले का जश्न मना रही थी, राघव चड्ढा न तो इस जश्न में शामिल हुए और न ही उन्होंने X (ट्विटर) या किसी अन्य माध्यम से इस पर कोई प्रतिक्रिया दी।
Raghav Chadha के सोशल मीडिया ये भी गायब लगती थी AAP
कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिकार और विश्वसनीय माने जाने वाले राघव चड्ढा और पार्टी के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही थी, जिसका संकेत उनके सोशल मीडिया पर भी स्पष्ट था। जानकारों के अनुसार, स्थिति ऐसी हो गई थी कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट और वीडियो में न तो पार्टी का नाम था और न ही झंडा या निशान। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बात को लेकर भी असहज थी कि राघव चड्ढा राज्यसभा में पार्टी की नीतियों के अनुसार नहीं, बल्कि ऐसे मुद्दे उठा रहे थे, जो उनके व्यक्तिगत मुद्दे थे। इसका मतलब यह था कि यह धारणा बन गई थी कि वह पार्टी की दिशा से भटक रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी कम ही दिखे राघव चड्ढा
इसके अतिरिक्त, राघव चड्ढा अब पार्टी के आयोजनों में भी सक्रियता नहीं दिखा रहे थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय वे कुछ रैलियों और आयोजनों में अवश्य दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद वे राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में अधिक सक्रिय हो गए।
आप में राघव चड्ढा के भाजपा के नजदीक होने का संकेत गया
पिछले कुछ समय में कई मौकों पर ऐसा हुआ है जब उन्होंने सदन में किसी महत्वपूर्ण समस्या का मुद्दा उठाया और सरकार ने उस पर तुरंत कार्रवाई की। इन निर्णयों पर राघव चड्ढा ने खुशी व्यक्त करते हुए भी नजर आए। इससे पार्टी के भीतर यह संदेश गया कि वे सरकार के करीब होते जा रहे हैं। इसी तरह के कई कारणों के चलते आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच की दूरी बढ़ती गई, जो अब बड़े संगठनात्मक निर्णयों के रूप में सामने आ रही है।
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