Bharat Bhushan Tiwari, भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी कथित मुठभेड़ प्रकरण में एक बड़ा मोड़ आया है। मृतक की मां आशा देवी के बयान पर शाहपुर थाने में जगदीशपुर के डीएसपी (SDPO) राजेश कुमार और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) राजेश मालाकार समेत कई सहयोगी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।
भोजपुर के एसपी राज ने मंगलवार को इस प्राथमिकी की पुष्टि की है। पुलिस ने इन अधिकारियों के खिलाफ हत्या (Murder), आर्म्स एक्ट (Arms Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की तीन अलग-अलग गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
Bharat Bhushan Tiwari: “फेसबुक लाइव के बाद किया था सरेंडर, फिर भी मारी 5 गोलियां”
मृतक भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बेहद सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं। मां का दावा है कि उनके पुत्र की हत्या पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई है।
प्राथमिकी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी इलाके के जवइनिया में बाढ़ पीड़ितों और विस्थापितों की समस्याओं और उनकी मांगों को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और प्रशासन के समक्ष उनकी आवाज उठा रहे थे।
Bharat Bhushan Tiwari: शिकायत में कहा गया है
“17 जून की सुबह करीब आठ बजे जगदीशपुर डीएसपी और तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल हमारे घर पहुंचा। पुलिसकर्मियों ने भरत से कहा कि ‘चलो, जवइनिया में जहां बाढ़ विस्थापित रह रहे हैं, वहां क्या समस्याएं हैं हमें दिखाओ।’ जब भरत उनके साथ वहां पहुंचा, तो वह फेसबुक लाइव के माध्यम से पीड़ितों की मांगें रख रहा था। अपनी बात पूरी करने के बाद भरत ने अपने हाथ में मौजूद हथियार को जमीन पर फेंक दिया और खुद को पुलिस के हवाले (सरेंडर) कर दिया।”
आशा देवी का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बावजूद पुलिसकर्मियों ने पहले भरत को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद जगदीशपुर एसडीपीओ के सीधे आदेश पर पुलिसकर्मियों ने उस पर ताबड़तोड़ 5 गोलियां दाग दीं। गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस उसे अपने वाहन में लादकर ले गई और शाम को परिजनों को उसकी मौत की सूचना दी गई।
Bharat Bhushan Tiwari: बढ़ते आक्रोश के बीच चौतरफा घिरी पुलिस
इस घटना के बाद से ही बिलौटी गांव और पूरे भोजपुर जिले में तनाव और आक्रोश का माहौल है। परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भरत कोई अपराधी नहीं बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता था, जो स्थानीय मुद्दों पर मुखर रहने के कारण पुलिस और स्थानीय प्रशासन की आंखों में खटक रहा था। सोशल मीडिया पर भी इस कथित एनकाउंटर को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, जिसके बाद पुलिस को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा है।
फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए जहां एक तरफ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है, वहीं मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा न्यायिक जांच के आदेश भी दिए जा चुके हैं। स्थानीय लोग अब इस मामले में त्वरित गिरफ्तारी और उच्च स्तरीय न्याय की मांग कर रहे हैं।
Bharat Bhushan Tiwari: मां ने अपनी शिकायत में क्या लगाए आरोप?
मृतक भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस की प्राथमिकी (FIR) में जगदीशपुर डीएसपी, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनके आरोपों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
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साजिश के तहत घर से ले जाना: मां का आरोप है कि 17 जून की सुबह करीब 8 बजे पुलिस अधिकारी उनके घर आए और भरत से कहा कि ‘चलो बताओ, जवइनिया में बाढ़ विस्थापितों की क्या समस्याएं हैं’। पुलिस उसे समस्याएं दिखाने के बहाने अपने साथ ले गई।
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बाढ़ पीड़ितों की आवाज दबाना: भरत तिवारी जवइनिया के बाढ़ पीड़ितों और विस्थापितों की मांगों को लेकर लगातार प्रशासन के सामने आवाज उठा रहे थे, जिससे पुलिस और प्रशासन उनसे नाराज था।
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फेसबुक लाइव और सरेंडर (आत्मसमर्पण): जवइनिया पहुंचने के बाद भरत फेसबुक लाइव के जरिए विस्थापितों की समस्याएं रख रहे थे। लाइव खत्म होने के बाद, उन्होंने अपने हाथ में मौजूद हथियार को जमीन पर फेंक दिया और खुद को पुलिस के सामने पूरी तरह समर्पित (सरेंडर) कर दिया।
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सरेंडर के बाद मारपीट: खुद को पुलिस के हवाले करने के बावजूद, पुलिसकर्मियों ने पहले भरत को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया।
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डीएसपी के आदेश पर गोली मारना: मां का सबसे गंभीर आरोप है कि जमीन पर गिरने के बाद जगदीशपुर एसडीपीओ (डीएसपी) के आदेश पर पुलिसकर्मियों ने भरत पर ताबड़तोड़ 5 गोलियां चला दीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
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इलाज के बजाय ले जाना और मौत: घायल अवस्था में पुलिस भरत को अपनी गाड़ी में लादकर ले गई और शाम को परिजनों को सूचना दी कि उनके बेटे की मौत हो गई है।
सीधे शब्दों में कहें, तो मां का आरोप है कि यह कोई पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) नहीं थी, बल्कि पुलिस सुरक्षा और आत्मसमर्पण के बाद की गई एक सोची-समझी हत्या है।
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Author: UP Tak News
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