Weather Update: “देश में मानसून का बदला मिजाज, उत्तर-मध्य भारत में बारिश कम होने के आसार, वहीं पहाड़ों पर बाढ़ और भूस्खलन का अलर्ट। जानें क्या है मौसम विभाग का ताजा अपडेट।”
नई दिल्ली: देश भर में सक्रिय मानसून एक बार फिर करवट ले रहा है। मौसम विभाग (IMD) और स्काईमेट के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून ट्रफ लाइन के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने वाली हैं। वहीं, दूसरी ओर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
Weather Update: इन राज्यों में थमेगी बारिश, बढ़ेगी गर्मी
मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी तक पहुंचने के कारण उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के बड़े हिस्से में अगले कुछ दिनों तक बारिश में कमी देखी जाएगी।
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प्रभावित क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश (इंदौर, धार, नीमच व खंडवा)।
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परिणाम: इन क्षेत्रों में अगले चार से पांच दिनों तक बारिश की संभावना न के बराबर है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में आसमान साफ होने से तापमान में वृद्धि दर्ज की जा सकती है। पंजाब और हरियाणा में भी एक सप्ताह तक शुष्क मौसम रहने के आसार हैं।
Weather Update: पूर्वी भारत में भारी वर्षा का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण नम हवाओं का रुख पूर्वी राज्यों की ओर मुड़ गया है।
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हाई अलर्ट: बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 4-5 दिनों तक जोरदार बारिश होने की संभावना है।
Weather Update: पहाड़ों पर ‘आफत’ की बारिश
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। मानसून की धुरी (ट्रफ लाइन) पहाड़ों के करीब होने के कारण इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका है। इसके चलते भूस्खलन और अचानक बाढ़ (Flash Floods) जैसी स्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
खरीफ फसलों की बुआई पर संकट के बादल
जुलाई के पहले सप्ताह में हुई झमाझम बारिश ने किसानों को राहत जरूर दी थी, लेकिन मानसून का यह नया ब्रेक कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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जून का सूखा: जून का महीना पिछले 120 वर्षों (1901 के बाद) के सबसे सूखे महीनों में गिना गया, जहाँ सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश हुई।
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बुआई पर असर: जून के अंत तक बुआई का रकबा सामान्य से 23 प्रतिशत पीछे चल रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून ट्रफ जल्दी दक्षिण की ओर नहीं लौटती, तो खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार पर बुरा असर पड़ सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक मानसून ट्रफ दोबारा दक्षिण की ओर सक्रिय नहीं होती, तब तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की स्थिति कमजोर बनी रहेगी। जुलाई के शेष दिनों में वर्षा का वितरण और अलनीनो की तीव्रता ही यह तय करेगी कि भारत में इस बार मानसून का कुल प्रभाव कैसा रहेगा। फिलहाल, देश के एक बड़े हिस्से को बारिश के लिए और इंतजार करना होगा।
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Author: UP Tak News
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