Assam News: असम में आई भीषण बाढ़ के बीच एक पिता का दिल दहला देने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह गले तक भरे पानी में बच्चों को ले जा रहा है। राज्य में बाढ़ से 68 लोगों की मौत और 4.45 लाख लोग प्रभावित हैं। पूरी खबर पढ़ें।
गुवाहाटी: असम इस समय पिछले कुछ दशकों की सबसे भीषण और भयावह बाढ़ से जूझ रहा है। राज्य के कई हिस्से जलमग्न हैं, और इस प्राकृतिक आपदा के बीच मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रहे एक ऐसे ही दिल दहला देने वाले वीडियो ने देश भर के लोगों को भावुक कर दिया है। इस वीडियो में एक पिता अपनी जान की परवाह किए बिना गले तक भरे बाढ़ के पानी में उतरकर अपने तीन मासूम बच्चों को सुरक्षित ठिकाने की तलाश में ले जाता हुआ नजर आ रहा है।
Assam News: वीडियो में क्या है?
सामने आए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि बाढ़ का पानी इंसानी बस्तियों में किस हद तक भर चुका है। एक पिता गहरे और खतरनाक बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूबा हुआ है और उसने एक बड़े प्लास्टिक के टब में अपने तीनों बच्चों को बैठा रखा है। वीडियो में बच्चे बेहद डरे हुए और लगातार रोते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि वह पिता अपनी तमाम मुश्किलों को दरकिनार कर अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए लगातार आगे बढ़ रहा है।
इस वीडियो को इंडियन यूथ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया, जिसके बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसे लाखों बार देखा जा चुका है और लोग इस पिता के अदम्य साहस, त्याग और अटूट पितृ प्रेम की सराहना कर रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो के जरिए कई लोगों ने संकट के समय जमीनी स्तर पर बचाव नौकाओं और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों की कमी पर भी तीखे सवाल उठाए हैं।
Assam News: बाढ़ से तबाही के आंकड़े और प्रभावित इलाके
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है?
- मौतों का आंकड़ा: इस आपदा में अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 40 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
- प्रभावित लोग: राज्य के करीब 4.45 लाख लोग इस बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
- प्रभावित ज़िले: शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नागांव और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) ज़िले बाढ़ की चपेट में सबसे ज्यादा हैं। इनमें से चराइदेव और शिवसागर सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
- जलमग्न गांव: राज्यभर के 21 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 631 से अधिक गांव पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं।
Assam News: राहत और बचाव कार्य तेज
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी असम के सांसदों के साथ बैठक कर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और सिविल डिफेंस के जवान युद्धस्तर पर बचाव कार्यों में लगे हैं। लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगभग 67 से अधिक नावें तैनात की गई हैं। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा 90 से ज्यादा राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां हजारों विस्थापित लोगों को शरण दी गई है और उन्हें खाने-पीने की सामग्री वितरित की जा रही है।
Assam News: इस बार बाढ़ के अलग और असामान्य कारण
असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ आना आम बात है, क्योंकि राज्य का लगभग 40 प्रतिशत भू-भाग बाढ़-प्रवण (Flood-prone) क्षेत्र माना जाता है। सामान्य तौर पर ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों का जलस्तर बढ़ने से मैदानी इलाकों में पानी भरता है। लेकिन इस बार के मानसून सीजन की प्रकृति थोड़ी अलग और खतरनाक रही है। पड़ोसी राज्यों जैसे नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने इसे पिछले छह दशकों की सबसे भयानक बाढ़ करार दिया है।इस बार पारंपरिक पैटर्न से हटकर ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर में क्रमिक वृद्धि के बजाय धनसिरी, दिखो और झांजी जैसी सहायक नदियों का पानी अचानक बहुत तेजी से बढ़ गया। ये सहायक नदियां आमतौर पर प्राकृतिक जल निकासी का काम करती हैं, लेकिन इनके उफान पर आने से ऊपरी असम (Upper Assam) के वे इलाके भी जलमग्न हो गए जिन्हें अमूमन सुरक्षित माना जाता था।
Assam News: पुनर्वास और बीमारियों से बचाव की चुनौती
जैसे-जैसे कुछ इलाकों में पानी का स्तर घटना शुरू हुआ है, सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों के पुनर्वास और महामारी फैलने से रोकने की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में साफ-सफाई, बिजली आपूर्ति की बहाली और फॉगिंग/डिसइंफेक्शन (कीटाणुनाशक छिड़काव) का काम तेजी से चल रहा है ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके। किसानों को हुए कृषि नुकसान की भरपाई के लिए कृषि विभाग की तरफ से मुफ्त धान के बीज और पौधे उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई है।
संकट की इस घड़ी में जहां एक तरफ प्रशासनिक मशीनरी राहत कार्यों में जुटी है, वहीं वह वायरल वीडियो हर संवेदनशील इंसान को यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक पिता अपने बच्चों की खातिर किस हद तक अपनी जान जोखिम में डालने का साहस रखता है।
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Author: UP Tak News
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