Anti-Paper Leak Bill Passed: राज्यसभा में लोक परीक्षा विधेयक पास होने पर सियासी घमासान, विपक्ष का वॉकआउट और 10 साल की सजा-जुर्माने वाले कड़े प्रावधानों की पूरी जानकारी।
Anti-Paper Leak Bill Passed: क्या है पूरा घटनाक्रम?
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक’ पर पूरे दिन चली मैराथन बहस के बाद आखिरकार इसे पारित कर दिया गया। हालांकि, इस ऐतिहासिक और कड़े कानून के पास होने से ठीक पहले संसद परिसर और सदन के भीतर सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया। कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली।
Anti-Paper Leak Bill Passed: विपक्ष ने क्यों किया वॉकआउट?
बहस के अंतिम चरण में जब भाजपा सांसद कविता पाटीदार ने अपना संबोधन समाप्त किया, तब सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को सरकार की ओर से चर्चा का जवाब देने के लिए आमंत्रित किया।
इसी दौरान, राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी अपनी सीट पर खड़े हुए और उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। प्रमोद तिवारी का तर्क था कि पूरे दिन चली चर्चा के दौरान देश भर में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
इन संवेदनशील और गंभीर विषयों को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही थी कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहेंगे और इस पर जवाब देंगे। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, उसके बाद ही मंत्री का जवाब शुरू हो। हालांकि, सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष की इस मांग को खारिज कर दिया और मंत्री जितेंद्र सिंह को अपना जवाब जारी रखने का निर्देश दिया। इसी से नाराज होकर कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के सांसदों ने सदन से वॉकआउट (बहिष्कार) कर दिया।
Anti-Paper Leak Bill Passed: जेपी नड्डा का तीखा हमला
विपक्ष के सदन छोड़कर जाने के तुरंत बाद, सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विपक्ष के इस कदम की कड़ी निंदा की। उन्होंने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए
जेपी नड्डा ने कहा कि इस पूरे वॉकआउट से यह साफ हो गया है कि विपक्ष के पास अब सरकार के खिलाफ उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने सदन को बताया कि इस बेहद महत्वपूर्ण विधेयक पर करीब आठ घंटे तक लंबी और विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें पक्ष और विपक्ष के हर एक सदस्य को अपनी बात खुलकर रखने का पूरा अवसर दिया गया। नड्डा ने आरोप लगाया कि जब सरकार की ओर से मंत्री जवाब देने के लिए खड़े हुए, ठीक उसी समय प्रायोजित तरीके से विरोध शुरू कर दिया गया। यह लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं का खुला अपमान है। यदि विपक्ष वाकई छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर होता, तो वह मंत्री का जवाब जरूर सुनता।
छात्रों के लिए इस बिल से क्या बदलेगा?
यह विधेयक देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक, नकल और संगठित गिरोहों के अवैध कारनामों पर लगाम लगाने के लिए लाया गया है। इस नए कानून के तहत कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। पेपर लीक या अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने पर 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यदि कोई संगठित गिरोह या संस्थान इसमें संलिप्त पाया जाता है, तो सजा 5 से 10 साल और जुर्माना 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। दोषियों की संपत्तियों को जब्त करने और परीक्षा का पूरा खर्च उनसे वसूलने का कड़ा प्रावधान किया गया है। यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC), बैंक, रेलवे और राज्य स्तर की सभी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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Author: UP Tak News
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