Independence Day 2026: PM मोदी 15 अगस्त को लाल किले से 13वीं बार देश को संबोधित करेंगे। जानिए 2014 से अब तक उनके भाषण कितने मिनट के रहे और नेहरू समेत अन्य प्रधानमंत्रियों के रिकॉर्ड।
पिछले वर्षों में उनके स्वतंत्रता दिवस भाषण की अवधि लगातार चर्चा का विषय रही है। कई मौकों पर उन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक देश को संबोधित किया। वहीं, 2017 में उनका भाषण सबसे छोटा रहा, जब उन्होंने करीब 56-57 मिनट तक देश को संबोधित किया था।
Independence Day 2026: 15 अगस्त 2026 को 13वीं बार लाल किले से भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे। उनके इस वर्ष के संबोधन पर भी देशभर की नजरें रहेंगी।
प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण में आमतौर पर सरकार की उपलब्धियों, आगामी योजनाओं, देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों का उल्लेख होता है।
Independence Day: 2014 में 65 मिनट से हुई थी शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को पहली बार लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया था। उनका पहला भाषण करीब 65 मिनट लंबा था।
इसके बाद उनके भाषण की अवधि कई वर्षों में अलग-अलग रही। कुछ भाषण एक घंटे से कम रहे तो कुछ डेढ़ घंटे के आसपास पहुंचे।
किस साल कितने मिनट बोले PM मोदी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि पर नजर डालें तो आंकड़े इस प्रकार रहे हैं—
- 2014: करीब 65 मिनट
- 2015: करीब 86 मिनट
- 2016: करीब 94 मिनट
- 2017: करीब 56-57 मिनट
- 2018: करीब 82 मिनट
- 2019: करीब 92 मिनट
- 2020: करीब 86 मिनट
- 2021: करीब 88 मिनट
- 2022: करीब 83 मिनट
- 2023: करीब 90 मिनट
- 2024: करीब 98 मिनट
- 2025: करीब 103 मिनट
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों की अवधि अलग-अलग वर्षों में काफी बदलती रही है। 2017 का भाषण सबसे छोटा रहा, जबकि हाल के वर्षों में भाषण की अवधि लगातार लंबी रही है।
Independence Day: 2017 में सबसे छोटा भाषण
प्रधानमंत्री मोदी का अब तक का सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन 2017 में रहा था। उस साल उन्होंने करीब 56-57 मिनट तक देश को संबोधित किया।
यह वह दौर था जब प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सरकार की योजनाओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार, कश्मीर, आतंकवाद और देश के विकास जैसे मुद्दों पर बात की थी।
Independence Day: 2016 में 94 मिनट का भाषण
साल 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 94 मिनट तक लाल किले से देश को संबोधित किया था। यह उनके शुरुआती कार्यकाल का सबसे लंबा भाषण रहा।
इसके अगले साल यानी 2017 में भाषण की अवधि घटकर एक घंटे से भी कम हो गई।
Independence Day: 2015 में नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की चर्चा में साल 2015 खास महत्व रखता है। उस वर्ष उन्होंने करीब 86 मिनट का भाषण दिया था।
इस भाषण के साथ उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1947 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन की अवधि का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया था। नेहरू ने आजादी के पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से करीब 72 मिनट तक देश को संबोधित किया था।
Independence Day: 2024 और 2025 में लंबा रहा संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी के हालिया स्वतंत्रता दिवस भाषण भी काफी लंबे रहे हैं। 2024 में उनका संबोधन करीब 98 मिनट का रहा, जबकि 2025 में उन्होंने करीब 103 मिनट तक देश को संबोधित किया।
इस तरह 2025 का संबोधन प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों में सबसे लंबा रहा।
लाल किले से सबसे ज्यादा बार तिरंगा किसने फहराया?
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से सबसे ज्यादा बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने का रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम है।
नेहरू 1947 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 17 बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया।
नेहरू के बाद इस सूची में इंदिरा गांधी का नाम आता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में 16 बार लाल किले से राष्ट्रध्वज फहराया।
नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह कितनी बार फहरा चुके हैं तिरंगा?
लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्रमुख नाम हैं।
मोदी 2014 से लगातार स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले से देश को संबोधित करते आ रहे हैं। 2026 का संबोधन उनके लिए इस क्रम में 13वां होगा।
किन प्रधानमंत्रियों को लाल किले से तिरंगा फहराने का मौका नहीं मिला?
भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे भी प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराने का अवसर नहीं मिला।
इनमें गुलजारीलाल नंदा और चंद्रशेखर के नाम प्रमुख हैं।
गुलजारीलाल नंदा दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। पहली बार वह जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 27 मई 1964 को प्रधानमंत्री बने और करीब 13 दिनों तक इस पद पर रहे। दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद जनवरी 1966 में उन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
दोनों कार्यकाल इतने छोटे थे कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्रध्वज फहराने का अवसर नहीं मिल सका।
चंद्रशेखर का कार्यकाल भी रहा छोटा
चंद्रशेखर 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनका कार्यकाल भी इतना लंबा नहीं रहा कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराने का अवसर मिल सके।
इसलिए चंद्रशेखर भी उन प्रधानमंत्रियों की सूची में शामिल हैं जिन्होंने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज नहीं फहराया।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण की क्यों होती है इतनी चर्चा?
प्रधानमंत्री का लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन केवल एक औपचारिक भाषण नहीं माना जाता। इस दौरान सरकार की प्राथमिकताओं और आने वाले वर्षों के लिए उसके रोडमैप की झलक भी देखने को मिलती है।
देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे अलग-अलग वर्षों में प्रधानमंत्री के संबोधन का हिस्सा रहे हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से की गई घोषणाओं और दिए गए राजनीतिक संदेशों पर भी पूरे देश की नजर रहती है।
13वें भाषण पर टिकी निगाहें
अब 15 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 13वें लाल किला संबोधन पर सभी की नजरें हैं। खासतौर पर यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार उनके भाषण में किन मुद्दों को सबसे ज्यादा महत्व मिलता है और क्या कोई बड़ी नई घोषणा सामने आती है।
भाषण की अवधि भी चर्चा का विषय रहेगी। 2025 में करीब 103 मिनट के लंबे संबोधन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 2026 में प्रधानमंत्री कितनी देर तक देश को संबोधित करते हैं।
लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का हर स्वतंत्रता दिवस संबोधन देश के राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण क्षण होता है। 15 अगस्त 2026 का संबोधन भी इसी वजह से खास रहने वाला है।
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Author: UP Tak News
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