Supreme Court: राजनीति के अपराधीकरण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई एक रिपोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों की गंभीर स्थिति सामने रखी है। न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक, देश में मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ हजारों आपराधिक मामले लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 सदस्यों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। यानी कुल 326 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें कई मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के भी हैं।
Supreme Court: सांसदों के खिलाफ गंभीर मामलों की स्थिति
हलफनामे में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, लोकसभा के 251 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं, जिनमें 170 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले बताए गए हैं। इन मामलों में ऐसे अपराध शामिल हैं, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। वहीं, राज्यसभा के 75 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 40 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले बताए गए हैं।
Supreme Court: सांसदों और विधायकों के 4,192 मामले लंबित
न्याय मित्र की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों की निगरानी के बावजूद वर्ष 2018 से लंबित मामलों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सांसदों और विधायकों से जुड़े 1,243 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि इसी अवधि में 1,050 नए मामले दर्ज किए गए।
14 मुख्यमंत्रियों ने घोषित किए आपराधिक मामले
हलफनामे के अनुसार, 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों में से 14 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें कुछ गंभीर आरोपों से जुड़े मामले भी शामिल हैं। दिए गए आंकड़ों में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 मामले बताए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले बताए गए हैं।
केरल के 95% सांसदों के खिलाफ मामले
राज्यवार आंकड़े भी राजनीति के अपराधीकरण की तस्वीर सामने रखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के 20 में से 19 सांसदों यानी करीब 95 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें 11 सांसदों के खिलाफ गंभीर मामले बताए गए हैं। तेलंगाना में 17 में से 14 सांसदों, ओडिशा में 21 में से 16, झारखंड में 14 में से 10 और तमिलनाडु में 39 में से 26 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी करीब आधे सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के आंकड़े शामिल नहीं किए गए हैं, क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हो सकी थी।
विशेष अदालतों में जल्द सुनवाई की मांग
न्याय मित्र विजय हंसारिया ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की जरूरत बताई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सांसदों और विधायकों के लिए निर्धारित विशेष अदालतें पहले इन्हीं मामलों की सुनवाई करें और इनका निपटारा होने के बाद ही अन्य मामलों को लिया जाए। उन्होंने उच्च न्यायालयों से तीन साल से अधिक समय से लंबित मामलों की विशेष निगरानी करने और आवश्यक प्रभावी आदेश जारी करने का भी अनुरोध किया है। यह मामला सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों के शीघ्र निपटारे से जुड़ी जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया न्याय मित्र के तौर पर सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे हैं।
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Author: UP Tak News
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