New Delhi: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले, दिशा-निर्देश और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलाव अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए। याचिका में ऐसे फैसलों को असंवैधानिक और अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
New Delhi: किसने दायर की याचिका?
यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है। याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) चांद कुरैशी के माध्यम से दाखिल की गई है। मामले का नाम Shailendra Mani Tripathi v. Union of India है और इसकी डायरी संख्या 59734/2026 बताई गई है।
New Delhi: क्या है याचिका में आरोप?
याचिका में दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। याचिका के अनुसार, ऐसी आपत्तियां कम से कम 14 अवसरों पर दर्ज की गईं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ फैसले आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना लागू किए गए। इनमें मतदाता सूची से जुड़े फैसले, Form 6 में बदलाव, चुनावी डेटा के प्रबंधन और ECINet/ERONet से संबंधित सॉफ्टवेयर बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।
Form 6 में बदलाव को लेकर क्या विवाद है?
याचिका में विशेष रूप से मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा उठाया गया है। याचिका के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में भी आवश्यक संशोधन होना चाहिए। इसके बावजूद पोर्टल पर बदलाव किए जाने का आरोप लगाया गया है।
SIR और मतदाता सूची का मुद्दा भी उठाया गया
याचिका में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की भी जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या Special Investigation Team (SIT) गठित करने की मांग की है। याचिका में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप की जांच की मांग का उल्लेख है।
इसके अलावा, याचिका में मूल वैधानिक Form 6 को बहाल करने और पात्र लोगों के लिए मूल नियमों के अनुसार मतदाता पंजीकरण की सुविधा बहाल करने की मांग भी की गई है।
CEC और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष/मनीषे गर्ग और ECI की सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कथित कर्तव्य उल्लंघन के मामले में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज कर अभियोजन शुरू करने का अनुरोध किया है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें आयोग के भीतर गंभीर मतभेद की बात कही गई थी। आयोग के अधिकारियों के अनुसार SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे और निर्णय सर्वसम्मति से हुए थे।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने चुनाव आयोग के सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया, SIR और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े विवाद को कानूनी जांच के दायरे में लाने की मांग की है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत किस तरह विचार करती है।
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Author: UP Tak News
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