Meerut Saurabh Murder Case: फल काटने के बहाने चाकू, अनाज के नाम पर 1200 लीटर का ड्रम; 22 गवाहों ने अदालत में बताई हत्या की पूरी कहानी

Meerut Murder Case: A knife under the pretext of cutting fruit, a 1,200-liter drum ostensibly for grain; 22 witnesses recounted the entire story of the murder in court.

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Meerut Saurabh Murder Case: मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत के फैसले का इंतजार अब खत्म होने वाला है। इस मामले में 30 सितंबर 2026, बुधवार को फैसला सुनाए जाने की संभावना है। अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान 22 गवाहों के बयान और कई वैज्ञानिक एवं भौतिक साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं। इन साक्ष्यों में चाकू और उस्तरा खरीदने से लेकर नीला ड्रम, सीमेंट, दवाएं, मोबाइल कॉल डिटेल और टावर लोकेशन तक की कड़ियां शामिल हैं।

अभियोजन के मुताबिक, लंदन में काम करने वाला सौरभ 24 फरवरी 2025 को अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए मेरठ आया था। आरोप है कि 3 मार्च की रात उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके कथित प्रेमी साहिल शुक्ला ने उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े करके उन्हें एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में सीमेंट भरकर छिपाने का आरोप है।

इस मामले ने तब पूरे देश का ध्यान खींचा, जब पुलिस ने नीले ड्रम से सौरभ के शव के टुकड़े बरामद किए। अब अदालत में पेश किए गए गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य इस मुकदमे के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं।

Blue Drum Murder Case: Knife Bought for Cutting Fruits, 1200-Litre Drum Purchased for Grain; Witnesses Recount

Meerut Saurabh Murder Case: अभियोजन ने अदालत में रखी साक्ष्यों की कड़ी

जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, अभियोजन ने मामले में 22 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों को क्रमवार अदालत के सामने रखा। उनका दावा है कि हत्या से पहले की गतिविधियों से लेकर शव को छिपाने और बाद में आरोपियों की गतिविधियों तक कई कड़ियां जांच में सामने आईं।

वहीं, बचाव पक्ष ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं है। बचाव पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि दोनों आरोपियों को संपत्ति विवाद के कारण फंसाया गया है।

अब इन दलीलों और साक्ष्यों पर अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

Blue Drum Murder Case: Knife Bought for Cutting Fruits, 1200-Litre Drum Purchased for Grain; Witnesses Recount

Meerut Saurabh Murder Case: गवाह नंबर 1: भाई से संपर्क नहीं हुआ तो बढ़ा शक

मृतक सौरभ के बड़े भाई और मामले के वादी बबलू कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, सौरभ ने मुस्कान से प्रेम विवाह किया था और उसे अपनी पत्नी तथा साहिल के संबंधों के बारे में जानकारी थी।

बबलू के मुताबिक, सौरभ ने पहले अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई थी। जब 2025 में मेरठ आने के बाद उससे संपर्क नहीं हो पाया तो परिवार को शक हुआ। बाद में उसकी हत्या की जानकारी सामने आई।

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गवाह नंबर 2: नीले ड्रम से मिला शव

कांस्टेबल बृजेश कुमार ने अदालत में बताया कि ब्रह्मपुरी स्थित मकान में नीले ड्रम में शव मिलने के संबंध में तहरीर दर्ज की गई थी।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के सामने यह आरोप आया कि सौरभ की हत्या करने के बाद शव के टुकड़ों को ड्रम में छिपाया गया था।

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गवाह नंबर 3: मुस्कान और साहिल के संबंधों का दावा

सौरभ की मां रेणु देवी ने अपने बयान में कहा कि परिवार को मुस्कान और साहिल के संबंधों की जानकारी मिली थी। उन्होंने यह भी बताया कि सौरभ के विदेश जाने के बाद मुस्कान के साहिल से मिलने की बात सामने आई थी।

बचाव पक्ष इन आरोपों और उनके साक्ष्यात्मक महत्व पर अदालत में अपना पक्ष रख चुका है।

गवाह नंबर 4: 3 मार्च की रात साहिल को घर जाते देखने का दावा

सौरभ के पड़ोसी और बचपन के दोस्त ने अदालत में दावा किया कि उसने 3 मार्च की रात साहिल को सौरभ के घर जाते देखा था। उसके अनुसार, उस समय घर में सौरभ और मुस्कान मौजूद थे।

अभियोजन ने इस बयान को घटनाक्रम की कड़ी के रूप में अदालत के सामने रखा।

गवाह नंबर 5: फल और सब्जी काटने के बहाने चाकू-उस्तरा खरीदने का दावा

चाकू विक्रेता राकेश कुमार ने अदालत में बताया कि एक युवती उसकी दुकान पर चाकू और उस्तरा खरीदने आई थी। उसने फल और सब्जी काटने की बात कही थी।

बाद में समाचार पत्र में तस्वीर देखने के बाद दुकानदार ने उस महिला की पहचान मुस्कान के रूप में करने का दावा किया।

गवाह नंबर 6: अनाज रखने के नाम पर 1200 लीटर का नीला ड्रम

नीले ड्रम के विक्रेता सैफुद्दीन ने बताया कि एक महिला और पुरुष उसकी दुकान से करीब 1200 लीटर क्षमता का नीला प्लास्टिक ड्रम खरीदकर ई-रिक्शा से ले गए थे।

गवाह के अनुसार, ड्रम खरीदने के लिए अनाज रखने की बात कही गई थी। बाद में समाचारों में तस्वीरें देखने के बाद उसने दोनों की पहचान मुस्कान और साहिल के रूप में करने का दावा किया।

गवाह नंबर 7: बालू और सीमेंट खरीदने की कड़ी

सीमेंट व्यापारी अक्षय शर्मा ने बताया कि एक युवक और युवती ई-रिक्शे से उसकी दुकान पर आए थे और बालू तथा सीमेंट लेकर गए थे।

अभियोजन ने इस खरीद को शव छिपाने की कथित योजना से जोड़ते हुए अदालत में प्रस्तुत किया।

गवाह नंबर 8 और 9: दवाओं को लेकर अलग-अलग बयान

डॉ. अरविंद कुमार देशवाल ने अदालत में कहा कि मुस्कान उनके पास बुखार और कमजोरी के इलाज के लिए आई थी और उन्होंने सामान्य दवाएं लिखी थीं। डॉक्टर ने कहा कि उनके पर्चे पर नशीली दवा नहीं लिखी गई थी।

वहीं, मेडिकल स्टोर संचालक अमित जोशी ने दावा किया कि एक युवती डॉक्टर के पर्चे के आधार पर नशीली और अन्य दवाएं लेने आई थी। बाद में तस्वीर देखने पर उसने उस युवती की पहचान मुस्कान के रूप में की।

दोनों बयानों को अभियोजन ने मामले की जांच से जुड़ी कड़ी के तौर पर अदालत में रखा।

गवाह नंबर 10: ड्रम काटने पर मिले शव के टुकड़े

ड्रम काटने वाले कारीगर अशोक कुमार ने अदालत में बताया कि पुलिस के कहने पर उसने मोर्चरी में नीले ड्रम को काटा था।

उसके मुताबिक, ड्रम के अंदर सीमेंट, तकिए का खोल और शव के हिस्से मिले। पुलिस के अनुसार, ड्रम से सिर और हाथ के पंजों सहित शव के हिस्से बरामद किए गए थे।

गवाह नंबर 11: सीमेंट में दबा मिला शव

पंचनामा भरने वाले दरोगा धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि ब्रह्मपुरी के मकान में नीले ड्रम के अंदर सीमेंट में शव के हिस्से मिले थे।

उनके बयान के अनुसार, शव को अलग-अलग हिस्सों में रखा गया था और सीमेंट में दबे होने के कारण उसका रंग भी बदल गया था।

गवाह नंबर 12: पोस्टमार्टम में धारदार हथियार के निशान

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर दिनेश सिंह चौहान ने अदालत में शव की स्थिति के बारे में बयान दिया। उनके अनुसार, मृतक के सिर और हाथ के पंजे धड़ से अलग थे तथा छाती पर धारदार हथियार से चोट के निशान पाए गए।

डॉक्टर के बयान के अनुसार, शरीर पर कई धारदार चोटों के निशान थे। अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी अपने मामले के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में पेश किया।

गवाह नंबर 13: हत्या के बाद घूमने जाने का दावा

कैब चालक अजब सिंह ने अदालत में बताया कि हत्या के बाद मुस्कान और साहिल उसकी कैब से कसोल, मनाली और मसूरी गए थे।

उसके मुताबिक, दोनों ने खुद को पति-पत्नी बताया था। 19 मार्च को समाचार पत्र में तस्वीर देखने के बाद उसे कथित तौर पर दोनों की पहचान के बारे में जानकारी हुई।

गवाह नंबर 14: घटनास्थल का नक्शा और बरामदगी

मामले के विवेचक कर्मवीर सिंह ने अदालत में घटनास्थल के निरीक्षण, नक्शा नजरी और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी।

अभियोजन के मुताबिक, पुलिस जांच में इन्हीं दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या तथा शव छिपाने की कथित पूरी कड़ी सामने आई।

गवाह नंबर 15: भौतिक साक्ष्यों को किया गया सील

निरीक्षक और विवेचक रमाकांत पचौरी ने बताया कि जांच के दौरान घटनास्थल तथा आरोपियों की निशानदेही से मिले सामान को बरामद कर सील किया गया और बाद में अदालत के समक्ष पेश किया गया।

इन बरामद वस्तुओं की भूमिका को लेकर अभियोजन ने अदालत में अपनी दलीलें रखीं।

गवाह नंबर 16: मोबाइल की सीडीआर और टावर लोकेशन

रिलायंस जियो के नोडल अधिकारी लोकेश कुमार ने आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन से संबंधित डेटा अदालत में उपलब्ध कराया।

मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल इस मामले में पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का हिस्सा हैं। अभियोजन ने इन्हें आरोपियों की गतिविधियों की टाइमलाइन से जोड़कर अदालत के सामने रखा।

छह अन्य गवाहों ने भी दर्ज कराए बयान

इन 16 प्रमुख गवाहों के अलावा छह अन्य गवाहों ने भी अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। अभियोजन पक्ष ने कुल 22 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

अदालत अब अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों, गवाहों के बयानों तथा उपलब्ध दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का मूल्यांकन करेगी।

क्या था देशभर में चर्चा में आया ‘नीला ड्रम केस’?

मेरठ का सौरभ हत्याकांड 2025 में तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया, जब लंदन से लौटे सौरभ की हत्या और उसके शव को नीले ड्रम में छिपाए जाने की जानकारी सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, सौरभ 24 फरवरी 2025 को मेरठ आया था। आरोप है कि 3 मार्च की रात उसकी हत्या की गई और शव को टुकड़ों में करके सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाया गया।

7 मार्च को मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और मुस्कान तथा साहिल को आरोपी बनाया गया। 19 मार्च को मुस्कान को जेल भेजे जाने के बाद उसके गर्भवती होने की जानकारी भी सामने आई, जिसके बाद बच्चे के पितृत्व को लेकर भी सार्वजनिक चर्चा हुई।

हालांकि, इन तमाम घटनाक्रमों के बीच किसी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम अधिकार अदालत का है।

अब 30 सितंबर को फैसले पर नजर

इस मामले में अभियोजन ने जहां 22 गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों, बरामदगी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर अपना पक्ष रखा है, वहीं बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने और आरोपियों को कथित तौर पर फंसाए जाने की दलील दी है।

अब अदालत इन सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का मूल्यांकन करेगी। 30 सितंबर 2026 को संभावित फैसला इस चर्चित मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करेगा।

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