Cyclone Murasu: आंध्र प्रदेश में 3 नवंबर को चक्रवात मुरासु के लैंडफॉल की आशंका। जानें बंगाल की खाड़ी में बार-बार चक्रवात क्यों बनते हैं, आईएमडी का रेड अलर्ट और ताजा अपडेट।
Cyclone in Bay of Bengal: बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। नवंबर की शुरुआत में समुद्र के ऊपर बनने वाली मौसमी प्रणालियां आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों के लिए चुनौती बन सकती हैं। गर्म समुद्री पानी, वातावरण में नमी और अनुकूल हवाएं चक्रवातों को ताकत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
हालांकि, 3 नवंबर 2026 को आंध्र प्रदेश में ‘मुरासु’ नामक चक्रवात के टकराने, 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चलने और आईएमडी द्वारा रेड अलर्ट जारी किए जाने संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
Cyclone Murasu: आखिर बंगाल की खाड़ी में बार-बार क्यों बन रहे हैं चक्रवाती तूफान?
नई दिल्ली। भारत के पूर्वी तट पर चक्रवाती तूफानों का खतरा लंबे समय से बना हुआ है। खासकर अक्तूबर और नवंबर के महीनों में बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियां बढ़ जाती हैं। मानसून की वापसी के बाद समुद्र और वातावरण की परिस्थितियां कई बार ऐसे तूफानों के विकास के लिए अनुकूल हो जाती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की प्रमुख वजह समुद्र की सतह का गर्म तापमान, हवा में मौजूद नमी, कम वायुदाब और हवाओं की अनुकूल गति है।
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है। बंगाल की खाड़ी का उत्तरी हिस्सा अपेक्षाकृत संकरा है और इसके आसपास भारत, बांग्लादेश तथा म्यांमार के तटीय इलाके स्थित हैं। ऐसे में समुद्र में विकसित होने वाले शक्तिशाली तूफान आबादी वाले क्षेत्रों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
चक्रवात मुरासु पर आईएमडी का रेड अलर्ट, आंध्र प्रदेश में आज रात लैंडफॉल की आशंका
मौसम विभाग की 2 नवंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे जारी बुलेटिन संख्या 14 के अनुसार, गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में सक्रिय है।
इसके 2 नवंबर की रात 11:30 बजे से 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के दक्षिण में तट पार करने की संभावना है।
Cyclone Murasu: चक्रवात मुरासु: प्रमुख आंकड़े
Cyclone Murasu: एक सप्ताह के भीतर दूसरा चक्रवात, क्यों बढ़ी चिंता?
इससे पहले 28 अक्तूबर को चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया था। उस तूफान के दौरान तेज हवाएं, भारी बारिश और बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आई थीं।
अब मुरासु के कारण उन्हीं क्षेत्रों में फिर से भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा पैदा हो गया है। जिन इलाकों में पहले से जलभराव या बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, वहां लगातार दूसरी आपदा राहत और पुनर्वास कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
समुद्र में आखिर कैसे पैदा होता है चक्रवाती तूफान?
चक्रवात का निर्माण अचानक नहीं होता। इसके पीछे समुद्र और वातावरण में चलने वाली कई प्रक्रियाएं जिम्मेदार होती हैं।
1. गर्म समुद्री पानी से मिलती है ऊर्जा
चक्रवात के निर्माण के लिए समुद्र की सतह का तापमान सामान्यतः लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना अनुकूल माना जाता है।
गर्म पानी से वाष्पीकरण बढ़ता है और समुद्र के ऊपर की हवा में नमी जमा होने लगती है। यही नमी बाद में तूफान के लिए ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बनती है।
2. कम वायुदाब से तेज होती हैं हवाएं
जब किसी समुद्री क्षेत्र में हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, तो सतह के आसपास वायुदाब कम होने लगता है।
आसपास के क्षेत्रों से हवाएं इस कम दबाव वाले केंद्र की ओर बढ़ती हैं। पृथ्वी के घूमने से उत्पन्न कोरिओलिस प्रभाव इन हवाओं को मोड़ देता है, जिससे वे केंद्र के चारों ओर घूमने लगती हैं।
3. बादल बनने से तूफान को मिलती है अतिरिक्त ताकत
ऊपर उठने वाली नम हवा ठंडी होकर बादलों में बदलती है। इस प्रक्रिया को संघनन कहा जाता है।
संघनन के दौरान गुप्त ऊष्मा मुक्त होती है। इससे ऊपर उठने वाली हवा को ऊर्जा मिलती है और अनुकूल परिस्थितियों में तूफानी प्रणाली और मजबूत हो सकती है।
4. विंड शियर तय करता है तूफान की मजबूती
विंड शियर का अर्थ है अलग-अलग ऊंचाइयों पर हवाओं की गति या दिशा में अंतर।
यदि ऊपरी और निचली हवाओं के बीच बहुत अधिक अंतर होता है, तो चक्रवात की संरचना कमजोर पड़ सकती है। कम ऊर्ध्वाधर विंड शियर चक्रवात को संगठित रहने में मदद करता है।
बंगाल की खाड़ी ही क्यों बनती है चक्रवातों का प्रमुख केंद्र?
बंगाल की खाड़ी की समुद्री और भौगोलिक परिस्थितियां इसे चक्रवातों के निर्माण के लिए संवेदनशील बनाती हैं।
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समुद्र की सतह का अपेक्षाकृत गर्म तापमान।
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वातावरण में भरपूर नमी।
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समुद्र में बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र।
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मानसून के बाद हवाओं की बदलती परिस्थितियां।
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उत्तरी हिस्से की संकरी भौगोलिक बनावट, जिससे कुछ स्थानों पर समुद्री उफान का जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि, हर निम्न दबाव वाला क्षेत्र चक्रवात नहीं बनता। इसके लिए समुद्र और वातावरण की कई अनुकूल परिस्थितियों का एक साथ मौजूद होना आवश्यक है।
सामान्य तूफान कब बन जाता है चक्रवाती तूफान?
भारतीय मौसम विभाग की वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार, जब किसी संगठित समुद्री तूफानी प्रणाली में अधिकतम निरंतर सतही हवाओं की गति लगभग 62 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक पहुंच जाती है, तब उसे चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जाता है।
इसके बाद हवाओं की गति बढ़ने पर वह गंभीर चक्रवाती तूफान, अति गंभीर चक्रवाती तूफान या उससे अधिक शक्तिशाली श्रेणियों में पहुंच सकता है।
आंध्र प्रदेश में भारी बारिश और समुद्री उफान का खतरा
मुरासु के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर समेत कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ समुद्री जलस्तर बढ़ने का खतरा है। निचले इलाकों में पानी भर सकता है। बिजली आपूर्ति, सड़क परिवहन और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तूफान के मद्देनजर आंध्र प्रदेश और चेन्नई के हवाई अड्डों से जुड़ी 20 से अधिक उड़ानें रद्द हुई हैं। यात्रियों को अपनी एयरलाइन से उड़ान की वर्तमान स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
मछुआरों और तटीय निवासियों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने और नौवहन गतिविधियों से बचने की सलाह दी है। समुद्र में मौजूद मछुआरों को सुरक्षित तट पर लौटने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
लोगों को तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों से दूर रहना चाहिए। जलभराव वाले रास्तों से गुजरने और अनावश्यक यात्रा करने से भी बचना जरूरी है।
क्या जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे हैं चक्रवात?
वैज्ञानिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि गर्म होते महासागर शक्तिशाली चक्रवातों के लिए अधिक ऊर्जा उपलब्ध करा सकते हैं। गर्म वातावरण अधिक नमी भी धारण कर सकता है, जिससे कुछ चक्रवातों के दौरान अत्यधिक वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है।
हालांकि, केवल एक सप्ताह में दो चक्रवात आने को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम नहीं कहा जा सकता। इसके लिए दीर्घकालिक आंकड़ों और अलग वैज्ञानिक विश्लेषण की आवश्यकता होती है।
Author: UP Tak News
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