Ramlila Maidan: दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली में राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। खरगे, अखिलेश, ममता और तेजस्वी ने SIR और कथित वोट चोरी पर सरकार को घेरा।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर तीखे राजनीतिक हमले किए। रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के जरिए लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
रैली में सबसे तीखा बयान राहुल गांधी का रहा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके पद से हटने और जेल जाने की बात कही। वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए भाजपा को सत्ता से हटाना जरूरी है।
राहुल गांधी का बड़ा हमला: ‘ज्ञानेश कुमार सीईसी पद से हटेंगे और जेल जाएंगे’
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां सामान्य चोरी नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज छीनने जैसी हैं।
राहुल गांधी ने कहा, “मैं आपको स्टेज से कह रहा हूं कि ज्ञानेश कुमार सीईसी पद से हटेगा। ज्ञानेश कुमार हिंदुस्तान में जेल जाएगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़ करना लोकतंत्र के खिलाफ गंभीर अपराध है। राहुल ने अपने भाषण में इसे अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए देशद्रोह जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की प्रमुख संस्थाओं पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सीबीआई, ईडी, न्यायपालिका, नौकरशाही और पुलिस जैसी संस्थाएं देश के नागरिकों की हैं और इनका इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के हित में नहीं होना चाहिए।
हालांकि, राहुल गांधी के आरोपों को न्यायिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी अपराध का निष्कर्ष निकालना सक्षम जांच एजेंसियों और अदालतों का विषय है।
मल्लिकार्जुन खरगे बोले- ‘मोदी जाएंगे, तभी लोकतंत्र बचेगा’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्षी दलों को दबाने का आरोप लगाया।
खरगे ने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने भाजपा सरकारों को निशाने पर लेते हुए कथित चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को डराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
खरगे ने कहा, “भाजपा को सत्ता से बेदखल किए बिना हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए राजनीतिक संघर्ष जारी रखना होगा।
अखिलेश यादव का अमित शाह पर तंज, यूपी में 1.27 करोड़ वोट कटने का दावा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 1 करोड़ 27 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अखिलेश ने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं तो इसका असर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर कितना पड़ेगा।
उन्होंने भाजपा नेताओं के राजनीतिक दावों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को अंगद के पैर की तरह अडिग बताते हैं, लेकिन जब जमीन ही नहीं बचेगी तो पैर कहां टिकाएंगे। अखिलेश ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब राजनीतिक बदलाव चाहती है।हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मतदाता सूची से नाम हटने के कारणों और वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही की जा सकती है।
ममता बनर्जी का आरोप- ‘हम हारे नहीं, हराए गए हैं’
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने रैली में चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने कहा, “हम हारे नहीं, हराए गए हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतगणना में निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी की।
ममता ने ईवीएम, लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि विपक्ष जनता के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा।
उन्होंने राम मंदिर के लिए एकत्र किए गए धन को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है।
तेजस्वी यादव बोले- ‘बिहार से शुरू हुई वोट चोरी’
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाते हुए भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई और मतदाता सूची में बदलाव के जरिए लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया गया।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक तथा लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे।
तेजस्वी ने विपक्षी एकजुटता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रखना सभी संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
SIR को लेकर विपक्ष के सवाल, आखिर क्या है विवाद?
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की जांच और आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
इसका घोषित उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना, अपात्र प्रविष्टियों को हटाना और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना है।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेजों की जांच और नाम हटाने की प्रक्रिया में पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष की प्रमुख चिंता यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण, प्रवासी और दस्तावेज संबंधी कठिनाइयों का सामना करने वाले नागरिकों को परेशानी हो सकती है।
दूसरी ओर, मतदाता सूची का सत्यापन चुनाव आयोग के संवैधानिक दायित्वों में शामिल है। किसी विशेष प्रक्रिया में अनियमितता हुई है या नहीं, इसका आकलन आधिकारिक आंकड़ों, साक्ष्यों और संबंधित न्यायिक निर्णयों के आधार पर ही किया जा सकता है।
विपक्षी एकजुटता का संदेश, भाजपा के खिलाफ संघर्ष तेज करने की तैयारी
रामलीला मैदान की रैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाएंगे।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं के भाषणों में चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर समान चिंताएं दिखाई दीं।
रैली में विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए जनता की भागीदारी और निष्पक्ष चुनाव बेहद जरूरी हैं।
क्या रामलीला मैदान की रैली से बदलेगी देश की राजनीति?
राजनीतिक दृष्टि से रामलीला मैदान की रैली विपक्षी दलों के लिए एकजुटता प्रदर्शित करने का अवसर बनी। राहुल गांधी के आक्रामक बयान, खरगे की सत्ता परिवर्तन की अपील, अखिलेश यादव के मतदाता सूची संबंधी दावे और ममता बनर्जी के एसआईआर पर आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता की बहस को केंद्र में रखा।
हालांकि, रैली में लगाए गए गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच और तथ्यात्मक पुष्टि महत्वपूर्ण है। किसी भी चुनावी अनियमितता के संबंध में निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेजों, विश्वसनीय साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
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Author: UP Tak News
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