Ballia UP News: आनंद दुबे की संबद्धता के विरोध में सातवें दिन भी पेंशनरों का धरना, “हमें हमारा आनंद वापस दीजिए

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Ballia UP News: वरिष्ठ कोषाधिकारी कार्यालय परिसर स्थित पेंशनर भवन में पेंशनरों का धरना-प्रदर्शन सोमवार को लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। सातवें दिन पेंशनरों ने मौन धारण कर प्रदर्शन किया और तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे की संबद्धता समाप्त कर उन्हें बलिया वापस भेजे जाने की मांग दोहराई। पेंशनरों का कहना है कि आनंद दुबे के कार्यकाल में बुजुर्ग पेंशनरों की सुविधाओं, सम्मान और कोषागार परिसर के विकास की दिशा में कई कार्य हुए, जिन्हें देखते हुए उनकी मांग पर शासन स्तर से पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

धरने के दौरान महिला पेंशनर मुनरिका तिवारी ने मुख्यमंत्री से आनंद दुबे की वापसी की अपील की। वहीं पेंशनरों ने सामूहिक रूप से कहा कि उनकी मुख्य मांग है कि संबद्धता के निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए आनंद दुबे को बलिया में ही कार्य करने का अवसर दिया जाए।

“हमें आनंद चाहिए” के साथ पेंशनरों ने रखी अपनी बात

पेंशनरों ने कहा कि आनंद दुबे के कार्यकाल में कोषागार आने वाले वृद्ध पेंशनरों की सुविधा और सम्मान को लेकर कई प्रयास किए गए। उनके अनुसार, नए पेंशनर भवन का निर्माण और सौंदर्यीकरण कराया गया। भवन में बैठने के लिए मेज-कुर्सी, बाथरूम समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

पेंशनरों ने बताया कि जीवित प्रमाण-पत्र जमा करने अथवा पेंशन संबंधी कार्यों के लिए कोषागार आने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था के साथ पानी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। उनका कहना है कि इन छोटी-छोटी सुविधाओं ने बुजुर्ग पेंशनरों के लिए कोषागार में आने का अनुभव पहले की अपेक्षा सहज बनाने में मदद की।

करीब दो एकड़ क्षेत्र में बना ‘पेंशनर आनंद उपवन’

पेंशनरों ने आनंद दुबे के कार्यकाल में कोषागार परिसर में विकसित किए गए ‘पेंशनर आनंद उपवन’ का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, करीब दो एकड़ भूमि लंबे समय से कचरे और झाड़ियों से घिरी हुई थी। सफाई और विकास के प्रयासों के बाद यहां उपवन विकसित किया गया।

पेंशनरों का कहना है कि उपवन में समय-समय पर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयास भी किए गए। उनके अनुसार, जिलाधिकारी, निदेशक कोषागार एवं पेंशन, अपर निदेशक आजमगढ़ सहित अन्य स्तरों से भी पौधरोपण किया गया।

‘क्रांति कूप’ की सफाई का भी किया उल्लेख

धरने पर मौजूद पेंशनरों ने कोषागार परिसर स्थित ऐतिहासिक ‘क्रांति कूप’ का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि लंबे समय से कचरे से भरे इस कुएं की सफाई कराई गई और आसपास के क्षेत्र को बेहतर बनाने का प्रयास हुआ।

पेंशनरों ने इस कुएं को बलिया के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी स्थानीय स्मृतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इसके संरक्षण से ऐतिहासिक विरासत को सहेजने में मदद मिली है। हालांकि, कुएं से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों के संबंध में पेंशनरों की मान्यताओं और स्थानीय इतिहास के संदर्भों को अलग-अलग स्रोतों से प्रमाणित किया जाना आवश्यक है।

न्यायेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार का भी जिक्र

पेंशनरों ने कोषागार परिसर स्थित प्राचीन न्यायेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, पेंशनरों एवं स्थानीय लोगों के सहयोग के साथ आनंद दुबे के कार्यकाल में मंदिर परिसर के विकास की दिशा में कार्य हुआ।

इसके अलावा पेंशनरों ने बताया कि उनकी इच्छा के अनुरूप भोले शंकर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए बेस का निर्माण कराया जा चुका है और मूर्ति के लिए मूर्तिकार को अग्रिम राशि भी दी जा चुकी है।

जन्मदिन समारोह को लेकर भी पेंशनरों ने बताई अपनी बात

पेंशनरों ने 20 जून 2026 को पेंशनर भवन में आनंद दुबे के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस दौरान विभिन्न पेंशनर संगठनों से जुड़े लगभग 500 लोग एकत्र हुए थे और उन्होंने केक, स्मृति-चिह्न, अंगवस्त्र, गुलदस्ता एवं मिष्ठान के साथ आनंद दुबे को शुभकामनाएं दी थीं।

पेंशनरों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान बिजली चले जाने और उमस भरी गर्मी के कारण कार्यक्रम को कुछ समय के लिए वरिष्ठ कोषाधिकारी के कक्ष में किया गया। इसी दौरान आनंद दुबे की पत्नी कोषागार परिसर स्थित न्यायेश्वर महादेव मंदिर में पूजा कर रही थीं। पेंशनरों का कहना है कि बाद में उन्हें सम्मानपूर्वक कार्यक्रम में लाकर सम्मानित किया गया।

इसी कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें अथवा जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद शासन स्तर पर इसे संज्ञान में लिए जाने और आनंद दुबे को निदेशक, कोषागार एवं पेंशन, लखनऊ से संबद्ध किए जाने की बात पेंशनरों की ओर से कही गई है। इस संबंध में प्रशासनिक निर्णय के वास्तविक कारणों की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष से ही की जा सकती है।

सातवें दिन भी जारी रहा धरना

पेंशनरों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति अथवा संस्था के विरोध के लिए नहीं है। वे अपने अनुभवों और सुविधाओं के आधार पर आनंद दुबे की संबद्धता समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन कार्यों को लेकर पेंशनरों के बीच संतोष और अपनापन बना, उन सभी पहलुओं को देखते हुए शासन स्तर पर उनके पक्ष पर विचार किया जाना चाहिए।

धरने में बरमेश्वर नाथ पाण्डेय, धर्मनाथ सिंह, रमाशंकर पाण्डेय, अनिल कुमार पाण्डेय, प्रेमसुख श्रीवास्तव, आबिद अली, नरेंद्र वर्मा, श्रीराम सिंह सहित बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे।

पेंशनरों की मांग है कि निदेशक, कोषागार एवं पेंशन, लखनऊ स्तर से आनंद दुबे की संबद्धता समाप्त कर उन्हें पुनः बलिया में कार्य करने का अवसर देने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखने को बाध्य होंगे।

फिलहाल सातवें दिन के मौन प्रदर्शन के बाद भी पेंशनरों की मांग स्पष्ट है—“हमें हमारा आनंद वापस दीजिए।” अब इस मांग पर शासन और संबंधित विभाग की ओर से क्या निर्णय सामने आता है, इस पर पेंशनरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी निगाहें टिकी हैं।

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Abhishek Mishra
Author: Abhishek Mishra

अभिषेक मिश्रा, यूपी तक न्यूज़ में वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि हैं। वे काव्य के साथ शिक्षा, सामाजिक चेतना और समसामयिक विषयों पर विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। मीडिया क्षेत्र में 2+ वर्षों का अनुभव रखने वाले अभिषेक मिश्रा UP Tak News Media Publication (Digital) के यूपी/उत्तराखंड टीम से जुड़े हैं और विशेष रूप से पूर्वांचल से जुड़े मुद्दों एवं खबरों पर लेखन करते हैं।

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