CJP Protest: जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका। DHCBA अध्यक्ष एन. हरिहरन ने कहा- बिना चेतावनी निहत्थे छात्रों पर बल प्रयोग गैर-कानूनी। हाई कोर्ट ने पुलिस को CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के दिए निर्देश।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस बर्बरता का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट के चौखट पर पहुँच गया है। इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की कार्यशैली पर वरिष्ठ अधिवक्ता और दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने अदालत के समक्ष बेहद गंभीर और कानूनी सवाल खड़े किए हैं।
कोर्ट में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए एन. हरिहरन ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने निहत्थे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक और अनुचित बल प्रयोग किया।
CJP Protest: बल प्रयोग से पहले कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन
वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने तर्क दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान प्रदर्शनकारियों पर किसी भी तरह की सख्ती या बल प्रयोग करने से पहले पर्याप्त चेतावनी देना पुलिस की एक अनिवार्य और कानूनी जिम्मेदारी है।
CJP Protest: सायरन, व्हिसल या घोषणा का अभाव
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत दलीलों में स्पष्ट किया गया कि लाठीचार्ज या बल प्रयोग से पहले पुलिस की ओर से न तो कोई लाउडस्पीकर पर सार्वजनिक घोषणा की गई और न ही सायरन या व्हिसल बजाकर चेतावनी दी गई कि भीड़ वहां से हट जाए।
प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर होने का अवसर दिए बिना ही सीधे उन पर लाठियां भांजी गईं और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
CJP Protest: अंग्रेजों के जमाने में भी पालन होते थे ये बेसिक नियम
अदालत में मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए एन. हरिहरन ने ऐतिहासिक संदर्भ दिया। उन्होंने कहा – “अंग्रेजों के औपनिवेशिक काल के दौर में भी, जब धारा 144 (अब बीएनएसएस के तहत प्रावधान) लागू की जाती थी, तब भी भीड़ को हटाने से पहले ये बेसिक कानूनी मानक अपनाए जाते थे। लेकिन जंतर-मंतर पर पुलिस ने इन सभी स्थापित नियमों को दरकिनार कर दिया।”
ड्यूटी की कठिनाई का बहाना बनाकर छात्रों पर प्रतिशोध की कार्रवाई नहीं कर सकती पुलिस
पुलिस प्रशासन की ओर से अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि स्थिति को नियंत्रित करने में उन्हें कठिनाई हो रही थी। इस पर तीखा प्रहार करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि केवल ड्यूटी निभाने में आ रही मुश्किलों का हवाला देकर पुलिस छात्रों पर बदला लेने जैसी (Retributive) कार्रवाई नहीं कर सकती। जंतर-मंतर पर जो दृश्य देखने को मिले, वे सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर की गई अनुचित और बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई की ओर इशारा करते हैं।
CJP Protest: निहत्थे छात्रों पर लाठीचार्ज पूरी तरह से अनुचित
सुनवाई के दौरान यह बात विशेष रूप से रखी गई कि प्रदर्शन में शामिल छात्र किसी भी प्रकार के हथियारों से लैस नहीं थे। याचिका में दावा किया गया कि पुलिस और सुरक्षा बलों के इस उग्र रवैये के कारण 90 से अधिक छात्र और युवा घायल हुए हैं।
CJP Protest: महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी
वरिष्ठ वकीलों ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आए लोगों और पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और छात्रों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया।
दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख और निर्देश
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे केवल कोई एक व्यक्तिगत या अलग-थलग घटना मानने से इनकार कर दिया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश जारी किया
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस
कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश
हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत दी है कि घटना वाले दिन के सभी सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
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Author: UP Tak News
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