UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे। यहाँ उन्होंने अपने संबोधन में प्रदेश के विकास और राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। इसी दौरान सीएम ने सड़कों पर नमाज अदा करने के चलन और यूपी में इस पर सख्ती बरतने का भी उल्लेख किया। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब योगी ने इस तरह का बयान दिया है। वे इससे पहले कई अवसरों पर सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर सख्ती व्यक्त कर चुके हैं।
UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर से सड़क पर धार्मिक गतिविधियों, विशेष रूप से नमाज अदा करने को लेकर एक कठोर बयान दिया है। अमर उजाला संवाद में अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सड़कें चलने के लिए होती हैं। ऐसे में किसी को भी सड़कों को रोकने या इसके आवागमन में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है। योगी के इस बयान ने यूपी से लेकर पूरे देश में बहस का एक सिलसिला शुरू कर दिया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर नमाज का मुद्दा उठाया और इसे सार्वजनिक रूप से रोकने की मांग की है। उन्होंने 2017 में मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद से कई मौकों पर इस प्रथा का विरोध किया है और यहां तक कि इसके लिए शासन और प्रशासनिक स्तर पर आदेश भी जारी करवा चुके हैं।
UP News: योगी ने अमर उजाला संवाद में क्या कहा?
उत्तर प्रदेश: कल, आज और कल’ विषय पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ”लोग आज पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? हम कहते हैं कि कतई नहीं होती। आप जाकर देख लो। सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा? क्या अधिकार है उसे सड़क रोकने और आवागमन बाधित करने का? जहां उसका स्थल होगा, वहां जाकर करें। लोगों ने कहा- कैसे होगा? हमारी संख्या ज्यादा है। हमने कहा- शिफ्ट में कर लो। घर में रहने की जगह नहीं है, तो संख्या नियंत्रित कर लो। नहीं है सामर्थ्य तो क्यों संख्या बढ़ाई जा रही है?”
#YogiAdityanath On Fire 🔥🔥🔥
नमाज पढ़नी है, शिफ्ट में पढ़िए… सड़क आम आदमी के लिए है.चलने के लिए है।
प्यार से मानेंगे ठीक है,नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे.
बात से मानोगे तो ठीक है नहीं है तो संघर्ष करके देख लो 🔥 pic.twitter.com/v2r9tOj0g3— Anoop Raizada Sr.Journalist (@AnoopRaizadaSr6) May 18, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा, ”यदि आपको सिस्टम के साथ रहना है, तो याद रखें कि नियमों और कानूनों का पालन करना शुरू करें। कानून का राज होगा, और इसे सभी के लिए समान रूप से लागू किया जाएगा। नमाज पढ़ना आवश्यक है, तो इसे शिफ्ट में पढ़ें। हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं…। सड़क आम नागरिक के लिए है। यह काम नागरिकों के लिए है। यह कर्मचारियों के लिए है। हम इसे बाधित नहीं करेंगे। सरकार का नियम सार्वभौम है। यह सभी के लिए समान रूप से लागू होगा। हमने कहा कि अराजकता को नहीं चलने देंगे। अगर प्यार से मानेंगे तो ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। हमारा कार्य संवाद बनाना है। यदि आप संवाद से मानेंगे तो संवाद से, नहीं तो संघर्ष से भी देख लीजिए। बरेली में लोगों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है, देख लिया है।”
UP News: सीएम योगी के बयान पर किसने क्या कहा?
UP News: सीएम ने जो कहा, वह सही कहा: ओपी राजभर
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चाहे मस्जिद, मंदिर, गिरिजाघर या गुरुद्वारा हो, ये सभी इसलिए होते हैं ताकि हम उनके अंदर पूजा-पाठ कर सकें। सड़क पर कोई भी खुलेआम पूजा-पाठ नहीं करता। मुख्यमंत्री जी ने जो कहा है, वह बिल्कुल सही है।
UP News: नमाज पढ़ने के लिए खास जगह मुकर्रर है: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने योगी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि नमाज के लिए एक निश्चित स्थान निर्धारित है और उस स्थान को मस्जिद कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इस्लाम में यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि आप अपने घर में हैं, तो वहां भी नमाज अदा कर सकते हैं। यदि आप दुकान में हैं, तो वहां भी नमाज पढ़ सकते हैं। नमाज पढ़ने के लिए शांति और इत्मीनान आवश्यक है, ताकि अल्लाह और उसके बंदे के बीच कोई रुकावट न आए। यह शांति और इत्मीनान मस्जिद या घर में अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए मस्जिद में नमाज पढ़ने का अधिक सवाब माना जाता है। मुसलमान सड़कों, चौराहों और पार्कों में नमाज नहीं पढ़ते। शरीयत में यह प्रावधान भी है कि ईद और बकरीद जैसे अवसरों पर, जब नमाजियों की संख्या बढ़ जाती है, तो एक ही मस्जिद में विभिन्न जमातें आयोजित की जा सकती हैं। इससे सड़क पर यातायात प्रभावित नहीं होगा, जाम नहीं लगेगा और किसी को भी कठिनाई नहीं होगी। इस्लाम किसी के लिए कठिनाई नहीं उत्पन्न करता, बल्कि सभी के लिए सरलता लाता है।
इससे पहले कब-कब सड़कों पर नमाज को लेकर सख्त बयान दे चुके सीएम योगी
18 अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में सड़कों पर नमाज अदा करने की अनुमति देने और हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर ममता सरकार पर कड़े हमले किए थे। उन्होंने यूपी का उदाहरण देते हुए कहा था कि शुक्रवार या किसी अन्य दिन सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाती। इसके अतिरिक्त, योगी ने लव जिहाद और लैंड जिहाद के विषय में भी चर्चा की थी।
अप्रैल 2025
न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को दिए गए एक इंटरव्यू में, ईद के दौरान सड़कों पर नमाज को रोकने के प्रशासनिक निर्णय का समर्थन करते हुए, सीएम योगी ने धार्मिक अनुशासन की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान सीएम ने कहा, “सड़कें चलने के लिए होती हैं, बीच रास्ते में नमाज नहीं होनी चाहिए। त्योहार और उत्सव या किसी भी प्रकार के आयोजन को बदतमीजी का साधन नहीं बनाना चाहिए। यदि आपको सुविधा चाहिए, तो उस अनुशासन का पालन करना भी सीखें।” इसके अतिरिक्त, एक और अवसर पर सीएम ने कहा कि मुस्लिमों को राज्य के विकास में उचित हिस्सा मिलेगा, लेकिन केवल इस आधार पर विशेष रियायतों की उम्मीद न करें कि वे अल्पसंख्यक हैं।
मुसलमानों के साथ भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि मुसलमान राज्य की जनसंख्या का 20 प्रतिशत हैं, जबकि सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों में उनकी हिस्सेदारी 35-40 प्रतिशत है। हम न तो भेदभाव में विश्वास करते हैं और न ही तुष्टिकरण में। इसके अतिरिक्त, मेरठ में प्रशासन द्वारा सड़कों पर नमाज अदा करने के खिलाफ चेतावनी पर विवाद के संबंध में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। सड़कें चलने के लिए होती हैं और जो लोग (फैसले के खिलाफ) बोल रहे हैं, उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। प्रयागराज में 66 करोड़ लोग पहुंचे। कोई डकैती, संपत्ति का विनाश, आगजनी, अपहरण नहीं हुआ। इसे धार्मिक अनुशासन कहा जाता है।
जून 2024
ईद-उल-अजहा के अवसर पर, सीएम योगी ने धार्मिक नेताओं और समुदाय के प्रमुख व्यक्तियों के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया और त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उनकी इस अपील का समर्थन किया, जिसके परिणामस्वरूप नमाज केवल ईदगाहों और मस्जिदों (निर्धारित स्थानों) में अदा की गई और सड़कों पर यातायात को बाधित करके कोई नमाज नहीं पढ़ी गई। इसके अतिरिक्त, लोकसभा चुनाव 2024 के बाद, उन्होंने लखनऊ में एक बैठक के दौरान कहा था कि हमने यूपी को माफियाओं से मुक्त कर दिया है। यूपी में आज सुरक्षा का माहौल है। उन्होंने कहा कि पहले मोहर्रम में ताजिया के नाम पर घरों को तोड़ा जाता था। तार हटाए जाते थे, लेकिन अब कोई मनमानी नहीं चलती है।
मई 2022 का बयान
अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में योगी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में यूपी की सड़कों पर नमाज पर रोक लगाने को अपनी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि बताया था। उन्होंने कहा था, “उत्तर प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है कि ईद की नमाज या अलविदा जुमे की नमाज़ सड़कों पर नहीं पढ़ी गई। लोगों को यह समझना होगा कि किसी भी धार्मिक गतिविधि से आम जनता को असुविधा या परेशानी नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने कहा था, “उत्तर प्रदेश में रामनवमी भव्य तरीके से मनाई गई। राज्य में कहीं भी हिंसा नहीं हुई। उत्तर प्रदेश में पहली बार, ईद और अलविदा जुमा (रमजान का आखिरी शुक्रवार) की नमाज सड़क पर नहीं पढ़ी गई है।”
दिसंबर 2018
उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कंपनियों को एक नोटिस जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके मुस्लिम कर्मचारी पार्कों और अन्य खुले सार्वजनिक स्थानों पर नमाज न पढ़ें। इसे योगी आदित्यनाथ के द्वारा नोएडा के पार्कों में नमाज पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के रूप में जाना जाता है, जिसके लिए विपक्षी नेताओं ने उनकी सरकार की आलोचना की थी।
अगस्त 2017
सहारनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट किया कि सभी समुदायों को कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपने त्योहार मनाने की स्वतंत्रता दी जाएगी। उन्होंने कहा, “ईद के समय नमाज पढ़ने की बात आई। बहुत सारे लोगों ने कहा कि क्या सड़कों पर ईद पढ़ने देंगे? हमने कहा, नहीं, जो परंपरागत रूप से पढ़ा जा रहा है, उसे पढ़ने दो… कानून के दायरे में रहकर जो भी कार्य करेगा, उसे कोई रोक-टोक नहीं होगी। हम लोग सम्मान के साथ हर जाति, हर मत, हर मजहब को अपने पर्व और त्योहार मनाने की पूरी स्वतंत्रता देंगे, बशर्ते वह कानून और संविधान के दायरे में रहकर मनाता है।” इससे पहले उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि वह ईद के दौरान सड़कों पर नमाज पढ़ने से नहीं रोक सकते, तो उन्हें पुलिस थानों में जन्माष्टमी का जश्न रोकने का भी कोई अधिकार नहीं है।
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Author: UP Tak News
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