US-Iran War: अब इस देश में वापस नहीं आना, इससे बेहतर तो मेरा वतन है…खाड़ी में फंसे कई भारतीय तौबा कर रहे हैं

US-Iran War: I can't return to this country anymore; my homeland is better than this... Many Indians stranded in the Gulf are repenting.

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US-Iran War: अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते पूरे खाड़ी क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। खाड़ी में गए 57,000 भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है। कुछ भारतीय अपने देश लौटने की इच्छा रखते हैं, जबकि कुछ सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। मंगलवार की ट्रिविया में हम जानते हैं खाड़ी में फंसे कुछ भारतीयों की कहानी।

US-Iran War: हम तो बहरीन पैसे कमाने के लिए आए थे। हमने सोचा था कि कुछ साल रुककर धन अर्जित कर लेंगे, लेकिन यहां तो युद्ध शुरू हो गया है। हम लोग डर के मारे छिपकर काम कर रहे हैं। काम करने के बाद हम चुपचाप अपने-अपने कमरों में लौट जाते हैं। बाजार की तरफ भी नहीं जाते। डर लगता है कि कब कौन सा बम या मिसाइल गिर जाए।’ दुबई में एक निर्माण कंपनी में कार्यरत पंकज राय ने ये बातें नवभारत टाइम्स के साथ साझा कीं।

US-Iran War: कहीं बहरीन में पानी की किल्लत शुरू न हो जाए

पंकज राय बताते हैं कि वह बहरीन की राजधानी मनामा में कमाई की इच्छा के चलते अपने गांव के कुछ दोस्तों के साथ आए थे। लेकिन, जब से ईरान ने यहां हमला किया है, पानी की समस्या बढ़ने लगी है। एक तो यहां पानी पहले से ही महंगा है। चिंता होती है कि कहीं बहरीन में पानी की कमी न होने लगे। बहरीन या पूरे खाड़ी क्षेत्र में समुद्री खारे पानी को मीठा पानी में बदलने वाले संयंत्र हैं, जिनकी आपूर्ति होती है। हाल ही में ईरान ने बहरीन के एक डीसैलिनेशन प्लांट पर ड्रोन से हमला करके उसे नष्ट कर दिया था।

US-Iran War: दुबई से लौटे तो कहते हैं-थोड़ा कमाना, अपने देश रहना

वहीं, सीतापुर के हरगांव तहसील के आईटी विशेषज्ञ हरेंद्र नाथ पाठक भी दुबई में एक कंपनी में अच्छी सैलरी पर कार्यरत थे। वह बताते हैं कि दुबई की भव्य जीवनशैली उन्हें शुरुआत में बहुत आकर्षक लगती थी।

अमेरिका-ईरान के हमलों के बढ़ने से पहले ही वह किसी तरह सुरक्षित तरीके से भारत लौट आए। उनका कहना था कि चाहे जो भी हो, अपना देश हमेशा अपना ही होता है। थोड़ा कमाना, लेकिन सुरक्षित और खुशहाल रहना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है। उनका कहना है कि अब वह अपने देश में ही पैसे कमाएंगे और दुबई वापस नहीं लौटेंगे।US-Iran War: I can't return to this country anymore; my homeland is better than this... Many Indians stranded in the Gulf are repenting.

“खाड़ी में जब-तक सब ठीक-ठाक रहा तो बहुत अच्छा लगा, मगर युद्ध या संकट के दौरान बस अपना देश ही याद आता है। लगता है कि किसी तरह एक बार अपने देश पहुंच जाऊं।”

हरेंद्र नाथ पाठक, सीतापुर, यूपी

US-Iran War: दुबई जैसे शहर ठप पड़े, एयरपोर्ट-मार्केट सब मायूस

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बमबारी शुरू की है, तब से दोनों देशों के हमलों और ईरान के प्रतिशोधी हमलों की एक श्रृंखला शुरू हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप पड़ोसी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं।

खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग पूरी तरह से जहाजों के लिए बंद हो चुका है। दुबई जैसे भव्य शहर, जिन्हें लंबे समय से इस क्षेत्र में व्यापार के लिए एक सुरक्षित स्थान माना जाता था, अब ठप हो गए हैं, हवाई अड्डे और शेयर बाजार भी ठप हो गए हैं।

US-Iran War: खाड़ी देशों में रहते हैं 93 लाख भारतीय

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, भारत की जनसंख्या अब 140 करोड़ से अधिक हो गई है और यह दुनिया में सबसे अधिक प्रवासी श्रमिकों को विदेश भेजने वाला देश है। इनमें से 1.5 करोड़ लोग अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और लगभग हर जगह अपनी पहचान बना रहे हैं।

इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी में है, जो भारत से तीन घंटे की उड़ान की दूरी पर स्थित है। भारत सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी में 93 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं, जबकि अमेरिका में यह संख्या 20 लाख है।

US-Iran War: होर्मुज के गलियारे सभी के लिए अहम

न्यूयॉर्क टाइम्स ने नई दिल्ली में रहने वाली और फारस की खाड़ी में पली-बढ़ी प्रवास नीति शोधकर्ता नम्रता राजू के हवाले से कहा-होर्मुज का यह गलियारा सभी देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और फारस की खाड़ी के देश व्यापार संतुलन से लेकर बोलचाल की भाषा तक, हर चीज में एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

दुबई में भारतीय स्वास्थ्य सेवा अधिकारी रेहान खान ने कहा-मैं यहां लगभग सभी से हिंदी में बात करता हूं। कई अरब लोग भी इसे बोलते हैं। रेहान खान अपनी कामकाजी लाइफ के लिए दुबई और मुंबई के बीच सफर करते रहते हैं।

US-Iran War: खाड़ी में सबको जोड़ती है हिंदी

हिंदी बॉलीवुड की एक प्रसिद्ध भाषा है, जो उन दक्षिण एशियाई लोगों के लिए एक सेतु भाषा का कार्य करती है, जो पश्तून, मलयालम या बंगाली बोलते हुए बड़े हुए हैं। खान ने कहा कि वह कार्यालय और घर के अलावा शायद ही कहीं अंग्रेजी बोलते हैं। यहां सभी इसी हिंदी में बात करते हैं।

US-Iran War: खाड़ी से अब तक 52,000 से ज्यादा लोग लाए गए

विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के आरंभ होने के बाद 1 से 7 मार्च के बीच खाड़ी क्षेत्र से 52,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से भारत लाया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 32,107 यात्रियों ने भारतीय विमानों का उपयोग किया। जबकि, शेष विदेशी एयरलाइंस से आए हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर लगातार निगरानी रख रही है। विशेष रूप से, पारगमन में या अल्पकालिक यात्राओं के दौरान फंसे भारतीय नागरिकों की भलाई पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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