Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई कथित हेराफेरी और चोरी के मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। इस बहुचर्चित प्रकरण में पहली एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है, जिसमें अनुकल्प मिश्रा और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच और कार्रवाई के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
Ayodhya Ram Mandir: मुख्य बिंदु
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नामजद आरोपी: रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव (मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी के पूर्व चालक व कर्मचारी) और अनुकल्प मिश्रा।
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लगाए गए आरोप: मंदिर परिसर के दान पात्रों से चढ़ावे की नकदी और सोने-चांदी की हेराफेरी व चोरी।
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जांच एजेंसी: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित 3 सदस्यीय SIT (Special Investigation Team)।
Ayodhya Ram Mandir: क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से ही यहां रोजाना देश-विदेश से करोड़ों रुपये का चढ़ावा और कीमती धातुएं दान में आ रही हैं। मंदिर परिसर में करीब 14 दान पेटियां रखी गई हैं, जिनकी गिनती के लिए एक विशेष टीम और ‘गणना कक्ष’ (Counting Room) बनाया गया था।
जून 2026 के पहले सप्ताह में पूर्व राज्य मंत्री पवन पांडेय द्वारा मंदिर के चढ़ावे से करीब 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। विपक्ष के हमलावर होने और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने तुरंत हाई-लेवल SIT जांच के आदेश दिए थे।
SIT की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
SIT की छह दिनों की सघन जांच में चंदा चोरी का एक तय पैटर्न सामने आया है:
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चाबियों का नियंत्रण: जांच में सामने आया कि दान पात्रों की मुख्य चाबियां टिन्नू यादव के पास रहती थीं।
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शिफ्ट में हेरफेर: नियमों के मुताबिक चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की शिफ्ट बदली जानी थी, लेकिन एक खास शिफ्ट में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसमें ये आरोपी ड्यूटी पर थे।
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बरामदगी: सूत्रों के मुताबिक, SIT ने प्राथमिक आरोपियों (लवकुश मिश्रा, अवनीश, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश और टिन्नू यादव) की निशानदेही पर अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की नकदी, आईफोन और लग्जरी कार बरामद की है। टिन्नू यादव के घर से सोने की रिकवरी भी बताई जा रही है।
Ayodhya Ram Mandir: कौन हैं टिन्नू यादव?
टिन्नू यादव कभी अयोध्या में ऑटो-टेंपो चलाने और छोटी चाय की दुकान से जुड़े थे। राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद वे ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के संपर्क में आए और उनके वाहन चालक बने। धीरे-धीरे उनकी पैठ मंदिर न्यास के मैनेजमेंट में इतनी बढ़ गई कि उन्हें मैनपावर मैनेजमेंट और दान पात्रों की देखरेख जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गई। हालांकि, टिन्नू यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों और 50 करोड़ की अवैध संपत्ति के दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।
Ayodhya Ram Mandir: आगे की कार्रवाई
एसआईटी (SIT) ने इस मामले में करीब 150 संदिग्धों की पहचान की है, जिनमें से 25 से अधिक लोगों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी साफ किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। पुलिस अब नामजद आरोपियों अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी पूछताछ और कड़ाई से रिकवरी की तैयारी में जुट गई है।
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Author: UP Tak News
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