Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ अग्निकांड का महाविस्फोट, CM योगी को सौंपी रिपोर्ट में खुला LDA के भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा, अफसरों-माफियाओं का गठजोड़ उजागर

Lucknow Fire Tragedy: Explosive revelations regarding the Lucknow fire incident; report submitted to CM Yogi exposes the dark underbelly of LDA corruption and the nexus between officials and the mafia.

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Lucknow Fire Tragedy: राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें अब पूरी तरह से उखड़ चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई एक उच्च स्तरीय गोपनीय रिपोर्ट में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि एलडीए के आला अफसरों, इंजीनियरों और माफिया-बिल्डरों की मिलीभगत से पूरे शहर में अवैध अपार्टमेंट, होटल और व्यावसायिक भवनों का जाल फैलाया गया।

अग्निकांड की जांच की आंच जैसे ही मंगलवार को एलडीए दफ्तर पहुंची, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री के कड़े रुख को देखते हुए अधिकारियों से 1 जनवरी से 20 जून तक अवैध निर्माणों पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा तलब किया गया था। रिपोर्ट तैयार करते समय वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठे अफसरों के माथे पर पसीना साफ देखा जा सकता था, जो फाइलों को छिपाने और रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुटे रहे।Lucknow Fire Tragedy: Explosive revelations regarding the Lucknow fire incident; report submitted to CM Yogi exposes the dark underbelly of LDA corruption and the nexus between officials and the mafia.

Lucknow Fire Tragedy: 1043 आवासीय प्लॉटों पर अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

    • जांच रिपोर्ट के अनुसार, अलीगंज की ही तर्ज पर गोमतीनगर, आशियाना और कानपुर रोड जैसे पॉश इलाकों सहित शहर के 1,043 आवासीय भूखंडों पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और बड़ी इमारतें खड़ी कर दी गईं।
    • इनमें से अधिकांश ने ‘एकल आवासीय यूनिट’ का नक्शा पास कराया था और बाद में वहां कॉम्प्लेक्स तान दिए।
    • नई भवन निर्माण नीति के तहत इन्हें शमन (Compounding) के नोटिस भेजे गए, लेकिन सिर्फ 257 लोगों ने ही एलडीए से संपर्क किया।
    • इसी तरह, चारबाग इलाके में नियमों के विपरीत 157 होटल बिना किसी वैध नक्शे के धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिन पर ‘लेवाना होटल अग्निकांड’ के बाद भी एलडीए ने सिर्फ कागजी नोटिस भेजकर खानापूर्ति की।

Lucknow Fire Tragedy: Explosive revelations regarding the Lucknow fire incident; report submitted to CM Yogi exposes the dark underbelly of LDA corruption and the nexus between officials and the mafia.

2000 ध्वस्तीकरण आदेश धूल फांक रहे, बुल्डोजर गायब

एलडीए के विहित न्यायालय द्वारा अलीगंज जैसी करीब 2,000 बड़ी अवैध इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश पारित किया जा चुका है। इनमें से सबसे ज्यादा अवैध निर्माण गोमतीनगर और चौक क्षेत्र में हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि अदालती आदेश के बावजूद एलडीए का बुल्डोजर इन रसूखदारों की इमारतों पर नहीं चल सका।

Lucknow Fire Tragedy: इंजीनियरों को गिफ्ट में मिले फ्लैट: यजदान और मुख्तार पर मेहरबानी

जांच में बिल्डरों और एलडीए अफसरों के बीच का गहरा नेक्सस (गठजोड़) भी सामने आया है:

यजदान बिल्डर: प्राग नारायण रोड और डालीबाग सहित 8 संपत्तियों पर एकल यूनिट का नक्शा निरस्त होने के बाद भी गगनचुंबी इमारतें खड़ी हो गईं। बिल्डर ने साल 2011 और 2012 में एलडीए के कई इंजीनियरों और अफसरों को अपने अपार्टमेंट में फ्लैट गिफ्ट किए थे।

मुख्तार अंसारी नेक्सस: माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी बिल्डर मोनीस और सिराज इकबाल के ‘एफआई टावर’ को 72 फ्लैट्स का नक्शा पास हुआ था, लेकिन अफसरों की दरियादिली से वहां नियमों के खिलाफ 8 मंजिला इमारत खड़ी कर 24 अतिरिक्त फ्लैट और 2 पेंटहाउस बना दिए गए। इसी तरह लालबाग स्थित एलडीए दफ्तर के ठीक बगल में गाजीपुर के एक बिल्डर ने एलडीए की ही जमीन कब्जा कर बिल्डिंग खड़ी की, जिसे अफसरों ने नियम विरुद्ध जाकर वैध (शमन) कर दिया।

83 अवैध अपार्टमेंट्स का ध्वस्तीकरण 20 साल से अटका

एलडीए ने पिछले साल उदयगंज के क्ले क्वायर अपार्टमेंट सहित शहर के 83 ऐसे अवैध अपार्टमेंट्स को चिन्हित किया था, जो बिना किसी स्वीकृत मानचित्र के पिछले 20 वर्षों में बने हैं। इनके ध्वस्तीकरण के आदेश वर्ष 2002, 2010 और 2012 में ही जारी हो चुके थे और 15 दिन में खाली करने का नोटिस भी दिया गया था, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के चलते आज तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लापरवाही की हद: दागी जेई (JE) की तैनाती का रिकॉर्ड ही गायब

अलीगंज हादसे के बाद जब अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा और प्रभारी अधिकारी रवि नंदन सिंह की आंतरिक समिति ने घटनास्थल वाले क्षेत्र में तैनात अवर अभियंताओं (JE) और सुपरवाइजरों की सूची मांगी, तो पता चला कि एलडीए के पास उनकी तैनाती का कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। इस बड़ी प्रशासनिक चूक के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अब तैनाती का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और भविष्य में जेई की तैनाती चीफ इंजीनियर के बजाय उपाध्यक्ष व सचिव स्तर से करने के आदेश दिए हैं।Lucknow Fire Tragedy: Explosive revelations regarding the Lucknow fire incident; report submitted to CM Yogi exposes the dark underbelly of LDA corruption and the nexus between officials and the mafia.

बड़ा सवाल: 4 महीने में तय हुआ दोष, 8 साल में सब हुए बेदाग!

रिपोर्ट ने एलडीए की न्याय प्रणाली और कार्रवाई की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

चारबाग होटल कांड (SSJ इंटरनेशनल और विराट होटल): इस अग्निकांड में 8 लोगों की मौत हुई थी। जांच कमेटी ने 4 महीने में रिपोर्ट देकर एलडीए, फायर, बिजली और जिला प्रशासन के 40 अधिकारियों को दोषी माना था। लेकिन नतीजा? कई रिटायर हो गए और बाकी बचे अधिकारियों को वर्ष 2024 में पूरी तरह दोषमुक्त (बेदाग) कर दिया गया।

लेवाना होटल अग्निकांड: इस हादसे के बाद 22 इंजीनियरों को दोषी मानकर सूची शासन को भेजी गई थी, लेकिन शासन ने महज 2 पर कार्रवाई की संस्तुति की और शेष 20 आरोपियों को बचा लिया गया। इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट भी आज तक ठंडे बस्ते में है।

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री को सौंपी गई यह रिपोर्ट साफ करती है कि लखनऊ में होने वाले अग्निकांड सिर्फ ‘हादसे’ नहीं हैं, बल्कि यह एलडीए के अफसरों और भ्रष्ट बिल्डरों के गठजोड़ द्वारा प्रायोजित ‘क्राइम’ हैं। अब देखना यह है कि इस काली रिपोर्ट के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बुल्डोजर इन भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध इमारतों पर किस तरह गरजता है।

Note: → इस लेख में सभी प्रयुक्त तस्वीरें लखनऊ अग्निकांड से सम्बंधित हैं

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