Ballia UP News: पितृ दिवस के अवसर पर पिछले माह शिविजा पब्लिकेशंस, बलिया द्वारा प्रकाशित पितृ दिवस विशेष साझा संकलन ‘धूप का मुसाफिर’ इन दिनों साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। पिता के स्नेह, संघर्ष, त्याग, अनुशासन और उस विराट पितृत्व को शब्द देने वाली इस कृति में देशभर के युवा एवं वरिष्ठ साहित्यकारों ने सहभागिता की है। लोकार्पण के बाद से ही संकलन को साहित्यप्रेमियों एवं पाठकों की ओर से सराहना मिल रही है।
इसी साहित्यिक पहल को आगे बढ़ाते हुए नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शिविजा पब्लिकेशंस की टीम शुक्रवार को सुनबीम स्कूल, अगरसंडा, बलिया पहुंची। अवसर था विद्यालय की कक्षा 9 के प्रतिभाशाली छात्र गौरव सिंह की रचना के राष्ट्रीय स्तर के साझा संकलन ‘धूप का मुसाफिर’ में प्रकाशित होने का। इस अवसर पर शिविजा पब्लिकेशंस के संचालक अखिलेश मिश्र और संस्थापक व संपादक एवं युवा साहित्यकार अभिषेक मिश्रा ने गौरव सिंह को सम्मानित कर उसकी साहित्यिक प्रतिभा और उत्साह का अभिनंदन किया।
कक्षा 9 की उम्र में राष्ट्रीय स्तर के संकलन में स्थान पाना गौरव की रचनात्मक क्षमता का परिचायक
गौरव सिंह की रचना का देशभर के युवा एवं वरिष्ठ रचनाकारों की सहभागिता वाले साझा संकलन में प्रकाशित होना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस अवसर पर शिविजा पब्लिकेशंस के संस्थापक व संपादक एवं युवा साहित्यकार अभिषेक मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ChatGPT जैसी तकनीकों का समय है। ऐसे दौर में यदि कक्षा 9 का कोई विद्यार्थी स्वयं कलम उठाकर अपने विचारों और संवेदनाओं को शब्द दे रहा है और इतनी कम उम्र में बेहतर लिखने का प्रयास कर रहा है, तो यह निश्चित रूप से सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि जिस उम्र में अधिकांश बच्चे अभी कहानियां पढ़ना, उन्हें समझना और उनके अर्थ तलाशना सीख रहे होते हैं, उसी उम्र में गौरव का साहित्यिक सृजन की ओर कदम बढ़ाना न केवल उसके लिए, बल्कि सुनबीम स्कूल और पूरे जनपद बलिया के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने गौरव को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उसकी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत है और निरंतर अध्ययन एवं लेखन के माध्यम से वह आगे और बेहतर कर सकता है।
हर घर में छिपी प्रतिभा को साहित्यिक मंच देना शिविजा पब्लिकेशंस का लक्ष्य
अभिषेक मिश्रा ने कहा कि शिविजा पब्लिकेशंस केवल पुस्तक प्रकाशन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उसका उद्देश्य समाज के उन कोनों और घरों तक पहुंचना है, जहां प्रतिभा मौजूद है लेकिन उसे मंच नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि जनपद में अनेक बच्चे और युवा ऐसे हैं जिनके भीतर लेखन, कविता, कहानी, कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रतिभा है। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और उचित अवसर देने की है।
उन्होंने कहा, “शिविजा पब्लिकेशंस का प्रयास है कि हम अपने ही जनपद में छिपी प्रतिभाओं को खोजें, उन्हें प्रोत्साहित करें और ऐसा साहित्यिक मंच उपलब्ध कराएं, जहां वे अपनी रचनात्मकता को पूरे आत्मविश्वास के साथ सामने रख सकें।”
स्वतंत्रता दिवस विशेष साझा संकलन ‘युग-परिवर्तन की गूंज’ का प्रस्ताव
नवोदित रचनाकारों को आगामी अवसर की जानकारी देते हुए अभिषेक मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रस्तावित एक नए साझा संकलन ‘युग-परिवर्तन की गूंज’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संकलन में युवा रचनाकारों की ऐसी रचनाओं को स्थान देने का प्रयास किया जाएगा, जिनमें देश के विकास, समाज के भविष्य और बदलते भारत के निर्माण को लेकर युवाओं के विचार, सुझाव और उनकी रचनात्मक दृष्टि सामने आए।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने आसपास के समाज को देखें, देश की वर्तमान चुनौतियों को समझें और यह सोचें कि एक युवा के रूप में वे देश के विकास में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचारों को साहित्य के माध्यम से सामने लाना भी राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
सुनबीम स्कूल के प्रयासों की सराहना
अपने संबोधन के अंत में अभिषेक मिश्रा ने सुनबीम स्कूल, बलिया के शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यालय जिस प्रकार अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और बहुआयामी प्रतिभा के विकास पर ध्यान दे रहा है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और पूरे विद्यालय परिवार को इस सकारात्मक वातावरण के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे प्रोत्साहित करने वाला विद्यालय केवल एक छात्र का भविष्य नहीं संवारता, बल्कि समाज और देश के लिए एक बेहतर नागरिक और सृजनशील व्यक्तित्व तैयार करता है।
नालंदा पुस्तकालय में ‘बलिया साहित्य’ को मिला विशेष स्थान
इस अवसर पर शिविजा पब्लिकेशंस की टीम ने विद्यालय परिसर में स्थापित ‘नालंदा पुस्तकालय’ का भी अवलोकन किया। पुस्तकालय में ‘बलिया साहित्य’ के लिए विशेष स्थान निर्धारित किए जाने को देखकर शिविजा पब्लिकेशंस की टीम ने प्रसन्नता व्यक्त की। टीम ने इसे स्थानीय साहित्य, साहित्यकारों और क्षेत्रीय रचनात्मक विरासत को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।
विद्यालय के निदेशक कुंवर अरुण सिंह के सहयोग से शिविजा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों ‘धूप का मुसाफिर’ एवं आज के युग की सबसे बड़ी विभीषिका पर केंद्रित उपन्यास ‘डिजिटल डिप्रेशन : एक नई महामारी’ को नालंदा पुस्तकालय के ‘बलिया साहित्य’ खंड में सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया। इस पहल को शिविजा पब्लिकेशंस और सुनबीम स्कूल के बीच साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहे आत्मीय संबंधों की एक सुंदर मिसाल के रूप में देखा गया।
साहित्य और शिक्षा के बीच बन रहा नया सेतु
शिविजा पब्लिकेशंस की टीम ने कहा कि सुनबीम स्कूल जैसे शिक्षण संस्थानों का साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देना नई पीढ़ी में पढ़ने और लिखने की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं शिविजा पब्लिकेशंस का प्रयास है कि प्रकाशन के माध्यम से विद्यालयों, युवा रचनाकारों और साहित्यिक गतिविधियों के बीच एक मजबूत सेतु तैयार हो।
गौरव सिंह के सम्मान का यह अवसर इसी साझी सोच का उदाहरण बना, जहां एक विद्यार्थी की साहित्यिक प्रतिभा को मंच मिला, विद्यालय को उसकी उपलब्धि पर गौरव का अवसर मिला और साहित्यिक संस्था को नई पीढ़ी के भीतर छिपी रचनात्मक ऊर्जा को पहचानने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार की ओर से गौरव सिंह की साहित्यिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की गई और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। शिविजा पब्लिकेशंस की टीम ने भी गौरव को निरंतर पढ़ने, लिखने और सीखते रहने के लिए प्रेरित किया तथा भविष्य में भी नवोदित रचनाकारों को अवसर देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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Author: Abhishek Mishra
अभिषेक मिश्रा , यूपी तक न्यूज़ में एक सीनियर पत्रकार व एक प्रशिद्ध कवि भी हैं। वे काव्य और क्राइम, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाते हैं। मीडिया में उन्हें 1 साल का अनुभव है। ये करीब एक साल से UP Tak News Media Publication (Digital) के यूपी/उत्तराखंड टीम में कार्यरत हैं। और ये खासकर बलिया जनपद से जुडी रिपोटिंग करते है।