UPSSSC Lower PCS: 8 साल बाद UPSSSC Lower PCS की भर्ती आई, लेकिन PET कटऑफ ने तोड़ा लाखों छात्रों का सपना। मुख्य परीक्षा (23 अगस्त) में ज्यादा छात्रों को शामिल करने की उठी मांग। पढ़ें पूरी खबर।
लखनऊ/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा 8 साल के लंबे और थका देने वाले इंतजार के बाद ‘लोअर पीसीएस’ (Lower PCS) का विज्ञापन जारी किया गया था। इस बहुप्रतीक्षित भर्ती ने प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के मन में एक नई उम्मीद जगाई थी। लेकिन हाल ही में मुख्य परीक्षा (Mains Exam) के लिए जारी की गई कटऑफ और शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया ने छात्रों को गहरी निराशा में धकेल दिया है। प्रदेश भर के प्रतियोगी छात्र अब आयोग और शासन से मुख्य परीक्षा में अधिक से अधिक उम्मीदवारों को शामिल करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
छात्रों ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अपनी आवाज़ उठाने का फैसला किया है और मीडिया से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर शासन तक उनकी बात पहुँचाने की भावुक अपील की है। आखिर छात्रों का गुस्सा और उनकी मांग क्यों जायज है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
UPSSSC Lower PCS: 8 साल का सूखा और 1 लाख से अधिक छात्रों का दांव पर लगा भविष्य
लोअर पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा का विज्ञापन पूरे 8 वर्षों के बाद जारी हुआ है। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि वे पिछले 3 से 4 वर्षों से अपना घर-परिवार छोड़कर शहरों के छोटे-छोटे कमरों में सिर्फ इसी परीक्षा के लिए दिन-रात एक कर रहे थे। इतने लंबे समय के बाद आई इस भर्ती में अचानक इतने कठोर कटऑफ ने 1 लाख से अधिक मेधावी छात्रों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। छात्रों का तर्क है कि जब भर्ती इतने सालों बाद आई है, तो अधिकतम लोगों को अपनी प्रतिभा साबित करने का एक निष्पक्ष मौका मिलना ही चाहिए।
पीईटी (PET): अर्हता परीक्षा है या प्रारंभिक छंटनी का हथियार?
उम्मीदवारों का सबसे बड़ा दर्द प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) के अनुचित उपयोग को लेकर है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि PET को मूल रूप से एक ‘क्वालिफाइंग’ (Qualifying) परीक्षा के रूप में लाया गया था, ताकि भीड़ को कम किया जा सके। लेकिन, विडंबना यह है कि आयोग इसका इस्तेमाल एक कठोर प्रारंभिक परीक्षा (Prelims Merit) की तरह कर रहा है। उच्च पर्सेंटाइल लाने के बावजूद हजारों योग्य छात्र इस मुख्य परीक्षा की रेस से बाहर हो गए हैं, जो PET के लागू होने के मूल उद्देश्य पर ही गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।
UPSSSC Lower PCS: शॉर्टलिस्टिंग के आंकड़ों में भारी विसंगति और भेदभाव
छात्रों का गुस्सा इस बात को लेकर और भड़क गया है कि आयोग की शॉर्टलिस्टिंग के मानकों में कोई एकरूपता नहीं है। पूर्व में आयोजित परीक्षाओं के आंकड़े इसके स्पष्ट गवाह हैं:
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राजस्व लेखपाल (Lekhpal): इस भर्ती की मुख्य परीक्षा में रिक्तियों के सापेक्ष 45.8 गुना छात्रों को मौका दिया गया था।
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जूनियर असिस्टेंट (Junior Assistant): इस परीक्षा में यह आंकड़ा और भी अधिक था, जहाँ 60 गुना छात्रों को मुख्य परीक्षा में शामिल किया गया।
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लोअर पीसीएस (Lower PCS): इसके विपरीत, लोअर पीसीएस जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में मात्र 38.8 गुना अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा के लिए योग्य माना गया है।
छात्रों का सीधा सवाल है कि जब अन्य परीक्षाओं में ज्यादा लोगों को मौका दिया गया, तो लोअर पीसीएस के होनहार अभ्यर्थियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
महज 20 दिन का समय और 23 अगस्त को परीक्षा की तलवार
मानसिक तनाव झेल रहे छात्रों के लिए एक और बड़ा संकट मुख्य परीक्षा की तिथि है। आयोग ने मुख्य परीक्षा के लिए 23 अगस्त की तिथि प्रस्तावित की है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि शॉर्टलिस्टिंग जारी होने के बाद छात्रों को तैयारी और रिवीजन के लिए बमुश्किल 20 दिन का समय मिला है। इतने कम समय में इतने विशाल पाठ्यक्रम को कवर करना छात्रों के लिए एक गंभीर मानसिक प्रताड़ना के समान है।
मीडिया और शासन से छात्रों की अपील
प्रभावित छात्रों ने मीडिया संस्थानों और पत्रकारों से भावुक अपील की है कि उनके इस दर्द और संघर्ष को प्रमुखता से उठाया जाए। छात्रों का कहना है:
“यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, यह हमारे 8 साल के संघर्ष, हमारी रातों की नींद और हमारे बूढ़े होते माता-पिता के सपनों का सवाल है। मीडिया से अनुरोध है कि इस विषय पर वीडियो और रिपोर्ट बनाकर शासन और आयोग तक हमारी आवाज़ पहुँचाएं, ताकि शॉर्टलिस्टिंग सूची को संशोधित कर मुख्य परीक्षा में अधिकतम छात्रों को बैठने का अवसर प्रदान किया जा सके।”
अब देखना यह होगा कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार और UPSSSC आयोग इन लाखों छात्रों की इस जायज पुकार को सुनकर कोई राहत भरा कदम उठाता है, या फिर ये होनहार छात्र सिस्टम की भेंट चढ़ जाएंगे।
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Author: UP Tak News
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