UP News: दिल्ली चलती बस सामूहिक दुष्कर्म मामले में बड़ा खुलासा, बस मालिक को 5 अगस्त को ही घटना की जानकारी थी। मैनपुरी में पीड़िता का परिवार 30 अगस्त से लापता बताया जा रहा है।
मैनपुरी/दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में 16 वर्षीय छात्रा के साथ चलती स्लीपर बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अब एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। मैनपुरी के किशनी क्षेत्र का पीड़िता का परिवार 30 अगस्त से फिर लापता बताया जा रहा है। पुलिस परिवार के सुरक्षित होने का दावा कर रही है, लेकिन उनके मौजूदा ठिकाने और पीड़िता की वर्तमान स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इस मामले में उस स्लीपर कोच बस के मालिक की भूमिका और घटना की जानकारी मिलने के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, बस मालिक को 5 अगस्त को ही घटना के बारे में पता चल गया था। दिल्ली पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने के बाद से वह अपने घर से लापता बताया जा रहा है।
UP News: फिरोजाबाद में पंजीकृत है बस
जिस स्लीपर कोच बस में वारदात होने की बात सामने आई है, वह फिरोजाबाद एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत है। बस का मालिक अनिल जादौन बताया जा रहा है, जिसका आवास फिरोजाबाद के थाना उत्तर क्षेत्र की इंदिरा कॉलोनी में है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की पूछताछ के बाद से अनिल जादौन अपने आवास पर नहीं है। बताया जा रहा है कि वह किसी परिचित या रिश्तेदार के संपर्क में भी नहीं है। उसका मोबाइल फोन चालू है, लेकिन वह फोन कॉल रिसीव नहीं कर रहा है।
UP News: तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है पीड़िता
इस घटना ने मैनपुरी के किशनी क्षेत्र के एक साधारण मजदूर परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और मजदूरी के जरिए घर का खर्च चलाता है। 16 वर्षीय पीड़िता अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। उसके पिता मजदूरी करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। पीड़िता के दो छोटे भाई-बहन भी हैं।
UP News: नाराज होकर 4 अगस्त को घर से निकली थी छात्रा
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा 4 अगस्त को किसी बात से नाराज होकर बिना बताए घर से निकल गई थी। वह नोएडा में रहने वाले अपने ताऊ के घर जाना चाहती थी। पीड़िता के ताऊ नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। छात्रा को उम्मीद थी कि वह उनके पास सुरक्षित पहुंच जाएगी, लेकिन रास्ते में ही उसके साथ कथित तौर पर दरिंदगी की घटना हो गई।
UP News: 8 अगस्त को परिवार लौटा था गांव
घटना के बाद परिवार 8 अगस्त को गांव वापस आया था। बताया जा रहा है कि सामाजिक बदनामी और लोक-लाज के डर से परिवार ने घटना के बारे में आसपास के लोगों को भी जानकारी नहीं दी। परिवार की चुप्पी के कारण गांव के लोगों को काफी समय तक इस भयावह घटना की जानकारी नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद गांव में भी सन्नाटा है और लोग परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
30 अगस्त से परिवार के दोबारा लापता होने का दावा
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल परिवार के दोबारा गायब होने को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार 30 अगस्त से अपने गांव में नहीं है। किशनी पुलिस परिवार के सुरक्षित होने की बात कह रही है, लेकिन परिवार फिलहाल कहां है और पीड़िता की स्थिति क्या है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इस बीच, यह भी दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक मामले की एफआईआर की प्रति मैनपुरी पुलिस के साथ साझा नहीं की है। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
विपक्ष ने लगाए मामले को दबाने के आरोप
परिवार के अचानक लापता होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि परिवार पर किसी तरह का दबाव बनाया जा सकता है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, परिवार को किसी दबाव में छिपाए जाने की बात की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से परिवार की सुरक्षा को लेकर जो दावा किया जा रहा है, उसके बावजूद उनके वर्तमान स्थान की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
UP News: कई सवालों के जवाब अभी बाकी
इस पूरे मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं—पीड़िता के साथ हुई घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं, बस मालिक को 5 अगस्त को घटना की जानकारी कैसे मिली, उसके बाद वह कहां गया और पीड़ित परिवार 30 अगस्त से कहां है? साथ ही, दिल्ली और मैनपुरी पुलिस के बीच मामले की जानकारी और एफआईआर को लेकर समन्वय की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। अब जांच एजेंसियों से उम्मीद है कि वे पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मामले से जुड़े सभी तथ्यों को जल्द स्पष्ट करें।
Delhi Bus Gang Rape Case: दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को लेकर जांच में कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड और चालान हिस्ट्री से पता चला है कि जिस बस का इस्तेमाल वारदात में किया गया, उसके खिलाफ पहले भी यातायात नियमों के उल्लंघन के कई मामले दर्ज हो चुके थे। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा।
दिल्ली पुलिस ने अब तक ARTO को नहीं भेजी रिपोर्ट
वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस UP 83 ET 3789 के सत्यापन को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमानुसार, किसी आपराधिक घटना में वाहन के इस्तेमाल की जानकारी संबंधित पंजीकरण प्राधिकरण यानी एआरटीओ को भेजी जानी चाहिए, ताकि वाहन और उसके परमिट के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
हालांकि, घटना के कई दिन गुजरने के बाद भी दिल्ली पुलिस की ओर से फिरोजाबाद एआरटीओ कार्यालय को बस के संबंध में कोई आधिकारिक पत्र, नोटिस या सत्यापन रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।
फिरोजाबाद एआरटीओ का बड़ा खुलासा
फिरोजाबाद के एआरटीओ (प्रशासन) गौरी शंकर ठाकुर के मुताबिक, परिवहन विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट से नहीं, बल्कि समाचार पत्रों और मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली। अधिकारी के अनुसार, अभी तक दिल्ली पुलिस की तरफ से बस के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे मामलों में पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद परिवहन विभाग वाहन के परमिट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।
परमिट पर लग सकता है कानूनी शिकंजा
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 86(1) के तहत परमिट से जुड़े मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। यदि किसी परमिट वाले वाहन का इस्तेमाल गंभीर अपराध या अवैध गतिविधि में किया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण परिस्थितियों और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर परमिट के निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है।
लेकिन इसके लिए पुलिस की ओर से आधिकारिक रिपोर्ट और अपराध से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजे जाने के कारण परिवहन विभाग के स्तर पर आगे की कार्रवाई फिलहाल अटकी हुई बताई जा रही है।
2025 में खरीदी गई थी बस
परिवहन विभाग के वाहन रिकॉर्ड के अनुसार, UP 83 ET 3789 स्लीपर बस को अनिल जादौन ने 27 अक्टूबर 2025 को खरीदा था। इसके बाद बस का फिरोजाबाद एआरटीओ कार्यालय में 28 अप्रैल 2026 को पंजीकरण कराया गया। रिकॉर्ड के मुताबिक, बस की फिटनेस 17 अप्रैल 2028 तक वैध है।
ओवरस्पीडिंग के कई चालान, हजारों रुपये का जुर्माना
बस की चालान हिस्ट्री भी कई सवाल खड़े करती है। रिकॉर्ड के मुताबिक, जुलाई 2026 में मथुरा के यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में अत्यधिक तेज गति से वाहन चलाने के आरोप में बस के कई चालान काटे गए। इन चालानों में 4-4 हजार रुपये के जुर्माने शामिल हैं और कई चालान अब भी लंबित बताए जा रहे हैं। यानी वारदात से पहले भी बस यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में परिवहन और यातायात विभाग की नजर में आ चुकी थी।
बांदा में 28 हजार रुपये का चालान
बस के खिलाफ बांदा आरटीओ क्षेत्र में भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। यहां बिना वैध परमिट वाहन चलाने, सीट बेल्ट नियमों के उल्लंघन और स्पीड गवर्नर/रिफ्लेक्टिव टेप से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में कुल 28 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा आगरा और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) क्षेत्र में भी बस के ओवरस्पीडिंग और लाइन डिसिप्लिन से जुड़े उल्लंघनों के चालान सामने आए हैं।
पहले से नियम तोड़ रही थी बस, फिर भी नहीं रुका संचालन
बस की सामने आई चालान हिस्ट्री यह सवाल खड़ा करती है कि लगातार यातायात नियमों के उल्लंघन के बावजूद इस वाहन के संचालन पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हुई। अब दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात में इसी बस के इस्तेमाल के बाद दिल्ली पुलिस की ओर से एआरटीओ को रिपोर्ट भेजने में कथित देरी और परिवहन विभाग की मॉनिटरिंग, दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में यह देखना अहम होगा कि दिल्ली पुलिस कब तक वाहन के संबंध में आधिकारिक रिपोर्ट फिरोजाबाद एआरटीओ को भेजती है और उसके बाद परिवहन विभाग बस के परमिट और पंजीकरण के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।
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Author: UP Tak News
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