Nepal Floods: नेपाल बाढ़ के बाद नई आफत; जान बची, लेकिन दिमाग में कैद है तबाही का खौफ; बच्चों को आ रहे डरावने सपने

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Nepal Floods: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतरने लगा हो, लेकिन इस आपदा का असर लोगों के मन में अब भी बना हुआ है। अपनों को खोने का दर्द, घर-बार उजड़ने की चिंता और आंखों के सामने देखी तबाही की तस्वीरें लोगों को मानसिक सदमे में डाल रही हैं। कई बच्चों की नींद डरावने सपनों से टूट रही है, जबकि बड़े लोग बेचैनी, डर और अचानक घबरा जाने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

नेपाल में पिछले एक दशक की सबसे भयावह बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों परिवारों के सामने घर, रोजगार और अपनों को खोने का संकट है। ऐसे हालात में अब राहत और बचाव के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

Nepal Floods: बाढ़ के बाद सामने आ रहा मानसिक सदमा

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में काम कर रहे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आपदा के शुरुआती दौर में लोग सदमे की स्थिति में हैं। कई लोग अपनी परेशानियों और भावनाओं को ठीक से व्यक्त तक नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आपदा के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तुरंत पूरी तरह सामने नहीं आतीं। पानी उतरने और राहत-बचाव का तत्काल संकट कम होने के बाद पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस, चिंता, नींद की समस्या और डर जैसी परेशानियां अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकती हैं।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

Nepal Floods: बच्चों की रातें डरावने सपनों में गुजर रहीं

नुवाकोट के बिदुर इलाके में राहत कार्य से जुड़े मनोसामाजिक विशेषज्ञों ने बच्चों में डर के गंभीर संकेत देखे हैं। एक मनोवैज्ञानिक के मुताबिक, कुछ बच्चे रात में बार-बार नींद से जाग रहे हैं और उन्हें लगता है कि बाढ़ फिर लौट आई है। बाढ़ की भयावह यादें उनके मन में इस तरह बैठ गई हैं कि नींद में भी वे उसी त्रासदी को दोबारा महसूस कर रहे हैं। वहीं, वयस्कों में अत्यधिक चिंता, डर और अचानक चौंकने जैसी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं।

Nepal Floods: सरकार ने तैनात किए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ

स्थिति को देखते हुए नेपाल सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 50 मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और मनोसामाजिक परामर्शदाताओं को तैनात किया है। इसके अलावा बागमती प्रांत में 64 प्रशिक्षित परामर्शदाताओं को भी तैयार रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि बाढ़ के बाद मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत आने वाले लंबे समय तक बनी रह सकती है। स्वास्थ्य विभाग की वरिष्ठ सलाहकार और चिकित्सा विशेषज्ञ पोमावती थापा के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता यानी Psychological First Aid (PFA) शुरू की जा रही है। दूरदराज के इलाकों तक भी विशेषज्ञों की टीम पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

Nepal Floods: राहत के साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर

अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती चरण में प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालने, परिवारों को मिलाने और जरूरी सेवाओं तक पहुंचाने की थी। जैसे-जैसे जमीन पर हालात स्पष्ट हुए, मानसिक स्वास्थ्य सहायता का दायरा भी बढ़ाया गया। इस अभियान में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी, सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड काउंसलिंग नेपाल समेत कई गैर सरकारी संगठन सहयोग कर रहे हैं।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

Nepal Floods: हेल्पलाइन से भी मिल रही मनोसामाजिक मदद

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए टेलीफोन के जरिए भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य संबंधी सलाह और समन्वय के लिए 1115 हेल्पलाइन संचालित है। बाढ़ के बाद बढ़ी जरूरत को देखते हुए यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बुनियादी मनोसामाजिक सहायता देने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया है। वहीं, पाटन मेंटल हॉस्पिटल की 1166 सेवा के जरिए विशेष रूप से मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कॉल करने वाले लोगों को सलाहकारों से जोड़ा जाता है। सेवा को 24 घंटे संचालित करने के लिए सात सलाहकार अलग-अलग शिफ्ट में काम कर रहे हैं।

बच्चों की सहायता के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

‘कई पीड़ित अपनी परेशानी बता भी नहीं पा रहे’

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ पीड़ित अभी भी आपदा के शुरुआती सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे में कई लोग अपनी मानसिक स्थिति या परेशानियों को शब्दों में व्यक्त करने की स्थिति में नहीं हैं। विशेषज्ञ गोपाल बोहरा के मुताबिक, कुछ बच्चों में बार-बार डरावने सपने आने और रोते हुए बाढ़ वापस आने की बात कहने जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। वहीं, वयस्कों में डर, बेचैनी और अचानक चौंकने जैसी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

विशेषज्ञ बोले- पहले सुरक्षा और जरूरी जरूरतें पूरी हों

मनोचिकित्सक निराजन भट्टराई के मुताबिक, इस समय सबसे पहली प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, भोजन, रहने की जगह और दूसरी बुनियादी जरूरतें पूरी करना है। उनकी टीम उन लोगों को जरूरी दवाएं भी उपलब्ध करा रही है, जिनका मानसिक स्वास्थ्य उपचार बाढ़ के कारण बाधित हो गया था। गंभीर नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों को भी चिकित्सा सहायता दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तत्काल संकट कुछ कम होगा, तब मनोसामाजिक सहायता और काउंसलिंग को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

Nepal Floods: असली मानसिक संकट बाद में सामने आने की आशंका

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल राहत एजेंसियों का बड़ा ध्यान परिवारों को फिर से मिलाने, विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने पर है। लेकिन आपदा का मनोवैज्ञानिक असर लंबे समय तक रह सकता है। घर और संपत्ति खोने के अलावा लोगों ने अपने परिवार और पूरे समुदाय को बिखरते देखा है। ऐसे में डर, शोक और असुरक्षा की भावना आने वाले महीनों में मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बन सकती है।

Nepal Floods: A New Crisis After the Deluge—Lives Saved, but the Terror of Devastation Lingers; Children Plagued by Nightmares

22 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में जुटे

नेपाल में राहत और बचाव अभियान बड़े पैमाने पर जारी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के प्रवक्ता शांति महत के अनुसार, अभियान में नेपाल सेना समेत 22 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट से अब तक 254 मजदूरों और तकनीशियनों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके अलावा सुरंगों और अन्य दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश के लिए भारतीय और चीनी टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है।

तबाही का असर पानी उतरने के बाद भी रहेगा

नेपाल में बाढ़ की त्रासदी ने हजारों जिंदगियां बदल दी हैं। राहत शिविरों में मौजूद लोगों के सामने जहां आज भोजन, घर और अपनों की तलाश की चुनौती है, वहीं आने वाले समय में उन्हें इस भयावह अनुभव से मानसिक रूप से उबरने की भी जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा के बाद मानसिक स्वास्थ्य सहायता को राहत अभियान का स्थायी हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि बाढ़ से बच गए लोग अपने जीवन को दोबारा सामान्य दिशा में ले जा सकें।

UP Tak News

Note: ⇒ We hope you liked this information, all the sources of this information are taken from all the sources available on the internet, by order of Team UP Tak News

Screenshot 2025 04 19 205150

You can read news related to Uttar Pradesh by Clicking here

Follow Us On Our Social Handle UP TAK NEWS

UP Tak News
Author: UP Tak News

UP TAK NEWS वेब बेस्ड न्यूज़ चैनल है जो Uttar Pradesh क्षेत्र में एक सार्थक,सकारात्मक और प्रभावी रिसर्च बेस्ड पत्रकारिता के लिए अपनी जाना जाता है.चैनल के माध्यम से न्यूज़ बुलेटिन, न्यूज़ स्टोरी, डाक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ UP क्षेत्र और अन्य ख़बरों को प्रसारित किया जाता है. राजनीति, युवा, सांस्कृतिक, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कल्चर, फ़ूड, और अन्य क्षेत्र में एक मजबूत पत्रकारिता चैनल का उद्देश्य है. UP TAK NEWS न्यूज़ चैनल की ख़बरों को आप चैनल की वेबसाइट-www.uptaknews.in से भी आप ख़बरों को पढ़ सकते हैं. जुड़े रहिये हमारे साथ |

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai