Delhi News: न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई आरंभ की है। ये टिप्पणियां आबकारी नीति मामले में बरी हुए आरोपियों द्वारा की गई थीं। आरोपियों ने न्यायमूर्ति पर पक्षपात का भी आरोप लगाया था।
Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि वे आबकारी नीति मामले में कुछ बरी किए गए आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके और अदालत के खिलाफ की गई अत्यंत अपमानजनक, मानहानिकारक और घृणित टिप्पणियों पर चुप नहीं रह सकती हैं।
न्यायमूर्ति ने स्पष्ट कहा कि मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ प्रत्यर्थी मेरे खिलाफ और इस अदालत के खिलाफ बेहद घृणित, अवमाननापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट कर रहे हैं। मैं चुप नहीं रह सकती। मैंने कुछ प्रत्यर्थियों और अन्य अवमाननाकर्ताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का फैसला कर लिया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि वह खुद को इस मामले से अलग नहीं कर रही हैं। हालांकि, आबकारी मामले की सुनवाई अब एक अन्य पीठ द्वारा की जाएगी।
यह टिप्पणी सीबीआई द्वारा दायर की गई उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें निचली अदालत के निर्णय को चुनौती दी गई है। निचली अदालत ने फरवरी में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति ने 20 अप्रैल को केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य द्वारा लगाई गई रिक्यूजल याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से पेश होने से मना कर दिया और “महात्मा गांधी के सत्याग्रह” का रास्ता अपनाने की घोषणा की। अदालत ने पहले ही तीन सीनियर वकीलों को अमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त करने का निर्णय लिया था, ताकि बिना प्रतिनिधित्व वाले आरोपियों (केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक) का पक्ष सुना जा सके।
Delhi News: न्यायमूर्ति पर पक्षपात के लगे थे आरोप
आरोपियों ने न्यायमूर्ति शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए यह दावा किया कि उनके बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से काम करते हैं, जो इस मामले में सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे हैं। जस्टिस शर्मा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस आधार के पक्षपात का डर दिखाकर जज को रिक्यूजल नहीं किया जा सकता।
Delhi News: मामले की सुनवाई और न्यायाधीश का रुख
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि वह इस मामले से खुद को अलग नहीं कर रही हैं। हालांकि, आबकारी मामले की सुनवाई अब एक अलग पीठ द्वारा की जाएगी। यह निर्णय अदालत की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण है।
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Author: UP Tak News
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