Instagram Controversy: MeitY के समन की खबरों के बीच Meta का बड़ा बयान। इंस्टाग्राम पर CSAM कंटेंट को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और AI डिटेक्शन का किया जा रहा है इस्तेमाल।
नई दिल्ली: इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को लेकर उपजे विवाद पर पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने अपनी सफाई पेश की है। रविवार को जारी एक बयान में मेटा ने स्पष्ट किया कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को मांगने या शेयर करने के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाता है। कंपनी ने कहा कि वह नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट और लोगों का पहले से पता लगाने के लिए एडवांस्ड एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
Instagram Controversy:3.5 अरब यूजर्स के बीच अपराधियों से ‘लगातार जंग’
मेटा के एक प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कंपनी अपने सुरक्षा तंत्र को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा:
“CSAM को मांगने या शेयर करने (जिसमें विज्ञापन भी शामिल हैं) के मामले में मेटा की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। हम एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऐसी सामग्री को समय रहते हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम उन अपराधियों से लगातार लड़ रहे हैं जो हमारे 3.5 अरब यूजर्स के बीच छिप जाते हैं और हमारे डिटेक्शन सिस्टम से बचने की कोशिश करते हैं।”
मेटा की यह सफाई उन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस मामले को लेकर बेहद सख्त है।
Instagram Controversy: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर मेटा को समन की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस गंभीर लापरवाही के लिए मेटा के अधिकारियों को तलब करें। सरकार ने इस मामले में मेटा को एक कड़ा नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही इंस्टाग्राम को ऐसे सभी विज्ञापनों और कंटेंट को तुरंत डिसेबल करने का आदेश दिया है जो CSEAM (चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइेटिव एंड एब्यूज मैटेरियल) को बढ़ावा देते हैं।
मंत्रालय इन मुख्य बिंदुओं पर मांग सकता है जवाब:
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इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित विज्ञापन कैसे लाइव हुए?
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कंपनी का विज्ञापन समीक्षा प्रोसेस (Ad Review Process) और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम इस प्रकार के विज्ञापनों को रोकने में असफल क्यों रहा?
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भविष्य में ऐसे गैर-कानूनी और हानिकारक कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए मेटा क्या सुरक्षा उपाय और एनफोर्समेंट मैकेनिज्म अपना रही है?
सरकार की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती सख्ती
यह पूरा घटनाक्रम सरकार द्वारा सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के प्रयासों का हिस्सा है। अभी कुछ ही दिनों पहले, भारत सरकार ने व्हाट्सएप (WhatsApp) से देश में उसके नए ‘यूज़रनेम फीचर’ के रोलआउट को बातचीत पूरी होने तक टालने के लिए कहा था।
इसके जवाब में व्हाट्सएप ने साफ किया था कि यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक होगा। साथ ही कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि इस साल के अंत में होने वाले व्यापक रोलआउट से पहले, गलत पहचान, स्कैम्स और अनचाहे संपर्क को रोकने के लिए इस फीचर में कई कड़े सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। बहरहाल, इंस्टाग्राम के इस ताजा विज्ञापन विवाद ने भारत में ऑनलाइन बाल सुरक्षा और टेक कंपनियों के मॉडरेशन सिस्टम पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Author: UP Tak News
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