Janmashtami 2026 Live Updates: देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्त देर रात तक भगवान कृष्ण के जन्म का इंतजार करेंगे और निशीथ काल में विधि-विधान से बाल गोपाल की पूजा करेंगे।
जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। पूजा की कुल अवधि करीब 45 मिनट रहेगी। इस दौरान भक्त भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर उन्हें भोग अर्पित करेंगे।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने और मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा करने की विशेष परंपरा है।
Janmashtami 2026 Shubh Muhurat: कब करें कान्हा की पूजा?
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा के लिए निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा।
पूजा का शुभ समय: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक
पूजा की अवधि: लगभग 45 मिनट
इस दौरान भक्त बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कराकर उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूल, माला, चंदन तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं।
Janmashtami 2026: कैसे करें भगवान कृष्ण की पूजा?
जन्माष्टमी की रात सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या बाल गोपाल को चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल से शुद्धिकरण करें। भगवान का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
अभिषेक के बाद भगवान को साफ वस्त्र पहनाएं। उन्हें चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद माखन-मिश्री, दूध, मिठाई और मेवे का भोग लगाएं। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आरती करें।
Janmashtami 2026: कान्हा को क्या भोग लगाएं?
भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को माखन-मिश्री, दूध, दही, मेवे, मिठाई और फल का भोग लगाया जा सकता है।
भोग में तुलसी दल शामिल करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है।
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर करें ये खास उपाय
जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल की पूजा के बाद उन्हें दूध, माखन, मेवे और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
तुलसी के पौधे की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। हालांकि किसी भी धार्मिक उपाय को अपनी आस्था और स्थानीय परंपरा के अनुसार ही करें।
Janmashtami 2026: भगवान कृष्ण की प्रिय गायों के नाम
भगवान श्रीकृष्ण का गायों से विशेष प्रेम माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों और कृष्ण परंपरा में उनकी कई प्रिय गायों का उल्लेख मिलता है। इनमें—
- मंगला
- पिंगला
- गंगा
- पिशंगी
- मणिकस्तनी
- हंसी
- वंशीप्रिया
के नाम बताए जाते हैं।
Janmashtami 2026: कृष्ण को बांसुरी किसने दी थी?
भगवान कृष्ण की पहचान उनकी बांसुरी से भी जुड़ी हुई है। धार्मिक कथाओं में बांसुरी को श्रीकृष्ण के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
प्रचलित कथा के अनुसार नंद बाबा ने यमुना नदी के किनारे बांस से बनी बांसुरी कृष्ण को दी थी। इसके बाद कृष्ण की बांसुरी उनके जीवन और लीलाओं का अभिन्न हिस्सा बन गई।
Janmashtami 2026: देवकी नंदन का नाम कृष्ण किसने रखा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदगांव में बालक कृष्ण के नामकरण संस्कार के लिए गर्गाचार्य पहुंचे थे। कंस से कृष्ण की पहचान छिपाए रखने के लिए उनका नामकरण गुप्त रूप से किया गया था।
गर्गाचार्य ने बालक के नाम और उनके स्वरूप के संबंध में नंद बाबा को बताया था। इसी परंपरा में उनका नाम कृष्ण प्रसिद्ध हुआ।
Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण मंत्र
पूजा के दौरान भक्त इस मंत्र का जाप कर सकते हैं—
“ॐ कृष्णाय नमः”
इसके अलावा भगवान कृष्ण का स्मरण करते हुए “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे” का जाप भी किया जाता है।
Janmashtami 2026: जन्म के बाद करें आरती
मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के बाद शंख बजाकर उनका स्वागत करें। इसके बाद बाल गोपाल की आरती करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित करें।
नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की।
जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के बाद भक्त व्रत का पारण अपनी परंपरा और पंचांग के अनुसार कर सकते हैं।
Janmashtami 2026 Live Updates
जन्माष्टमी के मौके पर देशभर के कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के साथ ही भक्त जयकारों के बीच जन्मोत्सव मनाएंगे।
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Author: UP Tak News
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