Sujit Bose Arrest: नगर पालिका भर्ती घोटाले में TMC के नेता सुजीत बोस को गिरफ्तार किया गया है, जबकि ED पहले भी कई बार उन्हें तलब कर चुकी थी

Sujit Bose Arrest: TMC leader Sujit Bose has been arrested in connection with the municipal recruitment scam, despite having been summoned by the ED on several previous occasions.

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Sujit Bose Arrest: पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नगर पालिका भर्ती घोटाले में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री और टीएमसी नेता सुजीत बोस को गिरफ्तार किया है। उन पर 150 उम्मीदवारों को अवैध तरीके से नौकरी दिलाने और इसके बदले में फ्लैट तथा बड़ी मात्रा में नकदी लेने का गंभीर आरोप लगाया गया है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं…

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के नेता सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय ने कथित नगर पालिका भर्ती घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, बोस सोमवार सुबह साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी कार्यालय पहुंचे थे। ईडी ने उनसे दक्षिण दमदम नगर पालिका में कथित भर्ती अनियमितताओं के बारे में पूछताछ की। इस पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले भी एजेंसी कई बार उन्हें बुला चुकी थी। जांच एजेंसी इस मामले में पैसे के लेनदेन और अवैध भर्ती नेटवर्क की जांच कर रही है।Sujit Bose Arrest: TMC leader Sujit Bose has been arrested in connection with the municipal recruitment scam, despite having been summoned by the ED on several previous occasions.

सुजीत बोस पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने पैसे और अन्य आर्थिक लाभ लेकर सरकारी नौकरी के लिए कई उम्मीदवारों की अवैध रूप से सिफारिश की थी। ईडी ने अपनी जांच में पाया है कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में विभिन्न पदों के लिए पूरी तरह से गैरकानूनी तरीके से 150 उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश की थी। इस सिफारिश के बदले में उन्होंने बहुत अधिक आर्थिक लाभ उठाया था। जांच में यह भी सामने आया है कि बोस ने अवैध रूप से कई संपत्तियां खरीदी हैं और उनके बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी भी जमा की गई है।

Sujit Bose Arrest: सुजीत बोस ने नौकरी के बदले कैसे बनाई अवैध संपत्ति?

ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में इस पूरे घोटाले का खुलासा करते हुए कई चौंकाने वाली बातें साझा की हैं। जांच एजेंसी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि सुजीत बोस ने नगर पालिका में लोगों को नौकरी दिलाने के बदले सीधे लाभ उठाया। ईडी ने अपनी गहन जांच से उन फ्लैट्स का भी पता लगा लिया है, जो सुजीत बोस ने विभिन्न व्यक्तियों को नगर पालिका में नौकरी देने के बदले में प्राप्त किए थे। इसके अतिरिक्त, ईडी को उनके नियंत्रण में कई बैंक खातों में जमा की गई बड़ी राशि के ठोस सबूत भी मिले हैं। सुजीत बोस को अब कल सुबह माननीय विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां ईडी आगे की पूछताछ के लिए उनकी रिमांड मांग सकती है।

Sujit Bose Arrest: चुनाव के दौरान ईडी ने सुजीत बोस को क्यों भेजा था नोटिस?

यह पहली बार नहीं है जब संघीय जांच एजेंसी ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में कथित भर्ती अनियमितताओं और घोटाले की जांच के सिलसिले में सुजीत बोस को तलब किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी सुजीत बोस को ईडी द्वारा कई बार नोटिस भेजे गए थे। इनमें से एक महत्वपूर्ण नोटिस 6 अप्रैल को भेजा गया था। उस समय सुजीत बोस ने चुनाव प्रचार की व्यस्तता का हवाला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके चुनाव प्रचार की प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें फिलहाल ईडी के सामने पेश होने से छूट दी जाए।

Sujit Bose Arrest: ईडी ने इस बड़े घोटाले की जांच कैसे और क्यों शुरू की?

इस पूरे मामले और घोटाले की जांच की शुरुआत कलकत्ता हाईकोर्ट के एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्देश के बाद हुई थी। हाईकोर्ट के सख्त आदेश पर सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में अपनी एक एफआईआर दर्ज की थी। उसी एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी गहरी जांच शुरू की। ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट भी पेश की थी। इस रिपोर्ट में पूरे पश्चिम बंगाल राज्य में फैली विभिन्न नगर पालिकाओं में अलग-अलग पदों की भर्ती में हुई अवैध गतिविधियों और घोटालों के बारे में बहुत ही विस्तार से बताया गया था।

इस मामले की गहराई में जाने और सभी सबूत इकट्ठा करने के लिए ईडी काफी समय से प्रयासरत है। पिछले साल 10 अक्टूबर को, ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व दमकल और आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस के कार्यालय समेत 13 स्थानों पर एक साथ व्यापक तलाशी और छापेमारी की थी। इस बड़े ऑपरेशन के दौरान, ईडी के अधिकारियों को कई संदिग्ध और महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे। इसके अलावा, मौके से 45 लाख रुपये की बड़ी राशि भी जब्त की गई थी। अब इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद, ईडी की जांच और भी तेज हो गई है। यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस भर्ती घोटाले में शामिल कई अन्य प्रमुख व्यक्तियों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

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