Supreme Court: ‘आसमान नहीं गिर पड़ेगा’— राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार

Supreme Court: 'The sky won't fall'—Supreme Court refuses immediate hearing in Ram Mandir offering theft case

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Supreme Court: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, ‘आसमान नहीं गिर पड़ेगा।’ अदालत ने मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद लिस्ट करने का निर्देश दिया है। जानिए क्या हैं याचिकाकर्ताओं की मांगें।

नई दिल्ली: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान के रूप में मिले धन की कथित चोरी व वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने इस मामले को बेहद कड़े शब्दों में टालते हुए कहा कि ‘आसमान नहीं गिर पड़ेगा, आखिर इतनी जल्दबाजी क्या है?’ सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को गर्मी की छुट्टियों (Summer Vacation) के बाद नियमित कामकाज शुरू होने पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

Supreme Court: वेकेशन बेंच ने उठाए जल्दबाजी पर सवाल

सोमवार को न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति शील नागू की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था।

जब याचिकाकर्ताओं ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की, तो पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:

“अगर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नियमित रूप से खुलने के बाद सुनवाई की जाएगी, तो आसमान नहीं गिर पड़ेगा। इसमें इतनी जल्दबाजी क्यों है?”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री और सक्षम प्राधिकारी द्वारा औपचारिकताएं संतुष्ट होने के बाद इस मामले को सामान्य प्रक्रिया के तहत जुलाई में कोर्ट खुलने पर लिस्ट किया जाएगा।

Supreme Court: 'The sky won't fall'—Supreme Court refuses immediate hearing in Ram Mandir offering theft case

Supreme Court: याचिकाओं में की गई हैं बड़ी मांगें

इस पूरे विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें जांच और पारदर्शिता को लेकर कई बड़ी मांगें की गई हैं:

1. CBI और स्वतंत्र SIT से जांच की मांग

वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की याचिका में मांग की गई है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और प्रशासन में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच सीबीआई (CBI) के नेतृत्व वाली मल्टीडिस्प्लीनरी स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम से कराई जाए। याचिकाकर्ताओं ने वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी (SIT) की जांच पर अविश्वास जताते हुए कहा कि एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही लाखों भक्तों के भरोसे को बहाल कर सकती है।

2. डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की गुहार

इसी मामले में एक अन्य वकील नरेन्द्र कुमार गोस्वामी ने भी अपनी याचिका का विशेष उल्लेख (Mentioning) किया। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए। हालांकि, उनकी याचिका मेंशनिंग लिस्ट में नहीं होने के कारण कोर्ट ने उन्हें उचित प्रक्रिया का पालन करने को कहा।

नरेन्द्र गोस्वामी की याचिका में प्रमुख मांगें:

पवित्र संपत्ति घोषित हो दान: कोर्ट यह घोषित करे कि रामलला को नकद, सोना, चांदी, गहने और डिजिटल माध्यम से मिलने वाला सारा चढ़ावा पवित्र ट्रस्ट की संपत्ति है, जिसका प्रबंधन पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से होना चाहिए।

डेटा और रिकॉर्ड्स की सुरक्षा: शुरुआत से लेकर अब तक के सभी सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर (DVR), एनवीआर (NVR), क्लाउड बैकअप, बैंक जमा पर्चियां, हुंडी खोलने के रजिस्टरों का मिलान रिकॉर्ड और यूपीआई/क्यूआर पेमेंट गेटवे लॉग्स को तुरंत सुरक्षित करने का निर्देश दिया जाए।

सीलबंद रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा अब तक की गई जांच की रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश करने का आदेश दिया जाए।

भक्तों की आस्था और पारदर्शिता का हवाला

याचिकाओं में दलील दी गई है कि यह मामला केवल किसी संज्ञेय अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों और दानदाताओं की आस्था, भावनाओं और भरोसे से जुड़ा हुआ है। इसलिए जनहित की रक्षा के लिए एक कड़ा रेगुलेटरी सुपरवाइजरी और ऑडिट सिस्टम बनाया जाना बेहद जरूरी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की विस्तृत सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद ही संभव हो सकेगी।

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