UP News: मदर्स डे पर लॉन्च हुआ ‘मेरे हिस्से की माँ’, शिविजा पब्लिकेशन्स के साझा संकलन में देशभर के रचनाकारों ने माँ की ममता और संघर्ष को शब्दों में पिरोया

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UP News: “चलती-फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी पर माँ देखी है।” मशहूर शायर मुनव्वर राना की ये पंक्तियाँ मदर्स डे के अवसर पर उस समय जीवंत हो उठीं, जब बलिया के युवा उद्यमी और शिविजा पब्लिकेशन्स के संस्थापक अभिषेक मिश्रा ने अपने विशेष साझा संकलन ‘मेरे हिस्से की माँ’ के प्रथम संस्करण के प्रकाशन की आधिकारिक घोषणा की।

यह पुस्तक केवल साहित्यिक रचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि माँ के प्रेम, त्याग, संघर्ष और ममता को समर्पित भावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। साहित्य और संवेदनाओं के संगम से तैयार यह संकलन पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास करता है।

“माँ सिर्फ शब्द नहीं, पूरी दुनिया है”

प्रकाशन की घोषणा करते हुए अभिषेक मिश्रा ने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में लोग अपनों के साथ बिताए पलों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में यह पुस्तक लोगों को माँ के प्रति अपने भावों और स्मृतियों से दोबारा जोड़ने का माध्यम बनेगी।

उन्होंने कहा,
“खुदा का दूसरा रूप है माँ, हर दुआ की शुरुआत है माँ।”

देशभर के 13 रचनाकारों की भावनात्मक भागीदारी

इस साझा संकलन में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े 13 रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से माँ के प्रति अपने अनुभवों और संवेदनाओं को व्यक्त किया है। इनमें अभिषेक मिश्रा, तुलसी राम राजस्थानी, तुलसी बरनवाल, आराधना पाण्डेय, अंजलि ओझा, वैभव प्रताप गिरी, सुधा गोयल, अनीता गौतम, धीरज कुमार पाण्डेय, बिन्दु के पंचोली, छत्र छाजेड़ “फक्कड़”, पंडित आदित्य पाण्डेय, शिवांशी गुप्ता और ज्योति वर्मा शामिल हैं।

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‘डिजिटल स्मृति कोलाज’ बना विशेष आकर्षण

पुस्तक की सबसे खास बात इसका “डिजिटल स्मृति कोलाज” है, जिसमें लेखकों की व्यक्तिगत भावनाओं और यादों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ा गया है। संकलन में एक लेखिका ने अपनी दिवंगत मां की 35 साल पुरानी स्मृतियों को शब्दों में जीवंत किया है, जो पाठकों को भावुक कर सकता है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी पुस्तक

अभिषेक मिश्रा ने बताया कि पुस्तक को वैश्विक पहचान देने के उद्देश्य से इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही पुस्तक ISBN प्रक्रिया के तहत पंजीकृत है।

आगे भी जारी रहेगा साहित्यिक सफर

शिविजा पब्लिकेशन्स ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है और भविष्य में भी नए साझा संकलन प्रकाशित किए जाएंगे। अभिषेक मिश्रा ने कहा कि माँ पर लिखना दुनिया का सबसे कठिन और सबसे पवित्र कार्य है।

उन्होंने अंत में कहा,
“हमारी कोशिश है कि हर लेखक के हिस्से की माँ, दुनिया के हर पाठक की माँ बन जाए।”

इस प्रकाशन को लेकर साहित्य प्रेमियों और क्षेत्र के बुद्धिजीवियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। ‘मेरे हिस्से की माँ’ को एक ऐसी पुस्तक माना जा रहा है जो हर पाठक को अपनी मां की यादों से जोड़ देगी।

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Abhishek Mishra
Author: Abhishek Mishra

अभिषेक मिश्रा, यूपी तक न्यूज़ में वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि हैं। वे काव्य के साथ शिक्षा, सामाजिक चेतना और समसामयिक विषयों पर विशेष रिपोर्टिंग करते हैं। मीडिया क्षेत्र में 2+ वर्षों का अनुभव रखने वाले अभिषेक मिश्रा UP Tak News Media Publication (Digital) के यूपी/उत्तराखंड टीम से जुड़े हैं और विशेष रूप से पूर्वांचल से जुड़े मुद्दों एवं खबरों पर लेखन करते हैं।

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