CJP Movement: प्रदर्शन से पहले, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्मों पर चलाए गए अभियान ने काफी चर्चा उत्पन्न की, लेकिन शनिवार को धरना स्थल पर इकट्ठा हुई भीड़ ने डिजिटल लोकप्रियता और वास्तविक संगठन के बीच के बड़े अंतर को स्पष्ट कर दिया।
CJP Movement: सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर और करोड़ों फॉलोअर्स के आधार पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन को युवाओं के विशाल शक्ति प्रदर्शन में बदलने की उम्मीद जताई थी। प्रदर्शन से पहले इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर चलाए गए अभियान ने काफी चर्चा उत्पन्न की, लेकिन शनिवार को धरना स्थल पर इकट्ठा हुई भीड़ ने डिजिटल लोकप्रियता और जमीनी संगठन के बीच के बड़े अंतर को स्पष्ट कर दिया। पार्टी के इंस्टाग्राम पर 22.2 मिलियन यानी 2.22 करोड़ फॉलोअर्स हैं और एक्स प्लेटफॉर्म पर 266.9 यानी 2 लाख 66 हजार 9 सौ फॉलोअर्स हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान 2000 से भी कम लोग इकट्ठा हुए।
शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बने इस आंदोलन ने ऑनलाइन दुनिया में करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाई है, लेकिन जंतर-मंतर की वास्तविकता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या फॉलोअर की संख्या को जनाधार का मापदंड माना जा सकता है। प्रदर्शन से पहले पार्टी के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट, वीडियो और अपीलें की थीं। ऐसा माहौल तैयार किया गया था कि मानो जंतर-मंतर पर जनसैलाब उमड़ पड़ेगा। यही कारण था कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस के 500 जवान और अर्द्धसैनिक बलों की कई टुकड़ियां एयरपोर्ट से लेकर जंतर-मंतर तक तैनात की गई थीं। दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके के रूट के लिए अलग से फोर्स भी तैनात की थी। मौके पर प्रदर्शन में लगभग 1500 से 2000 लोग ही दिखाई दिए। भीड़ उम्मीद से काफी कम रही। इधर, इंडिया रिजेक्ट्स सीजेपी हैशटैग प्रदर्शन से पहले…
CJP Movement: डिजिटल समर्थन की चमक पड़ी फीकी
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र रमन अपने दोस्तों के साथ आए थे। उनके हाथ में एक पोस्टर था और चेहरे पर उत्साह था, लेकिन जब उन्होंने भीड़ देखी तो वह निराश हो गए। उन्होंने कहा कि हमने पिछले तीन-चार दिनों से यही देखा है कि हर जगह यही मुद्दा चर्चा में है। हमें लगा था कि यहां हजारों लाखों लोग आएंगे, लेकिन यहां तो आराम से खड़े होकर बातचीत हो रही है। गुरुग्राम से आई निशा ने भी इसी अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि जो लोग सबसे ज्यादा लिख रहे थे, वे यहां नहीं दिखे। कुछ लोग मानते हैं कि डिजिटल फॉलोअर्स का मतलब यह नहीं है कि सभी लोग सक्रिय समर्थक हैं। ऐसे लोग जरूरी नहीं कि सड़क पर उतरें।
CJP Movement: विरोध में लगे जय श्री राम के नारे
सीजेपी के आंदोलन के दौरान माहौल उस समय और अधिक गर्म हो गया था। जब विरोध करने वाले कई लोग मौके पर पहुंचे लेकिन अभिजित दीपके के खिलाफ विरोध नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ समूहों ने जय श्री राम के नारे भी लगाए, जिससे वहां स्थिति खराब होने लगी। विरोध में आए लोगों के अनुसार, वह पार्टी की नीतियों से पूरी तरह असहमत हैं और सोशल मीडिया पर बनाए गए माहौल को वह जमीनी हकीकत से अलग मानते हैं। प्रदर्शनकारी मनोज ने बताया कि ऑनलाइन दिखाने के लिए बहुत कुछ होता है, लेकिन जमीन पर काम दिखाई नहीं देता। इसलिए हम यहां विरोध दर्ज कराने आए हैं। एक अन्य प्रदर्शनकारी राजेश ने बताया कि फॉलोअर्स और ट्रेंड से जनता का भरोसा नहीं बनता, काम दिखना चाहिए।
CJP Movement: लाल हिट लेकर पहुंचे लोग
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग व्यंग्यात्मक तरीके से लाल रंग की हिट स्प्रे लेकर आए और कॉकरोचों को खोजने जैसी टिप्पणियां करते हुए दिखाई दिए। विरोध में शामिल हुए प्रदर्शनकारी ईशान ने कहा कि सोशल मीडिया पर तो बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन हम देखना चाहते हैं कि असल में कौन कितना सक्रिय है। वहीं, लाल हिट लेकर आए आशुतोष ने कहा कि हम लाल हिट लेकर आए हैं, ताकि सभी कॉकरोचों को नष्ट किया जा सके।
CJP Movement: सोशल मीडिया पर मिली नकारात्मक प्रतिक्रियाएं
प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इसे ऑनलाइन भ्रम बताया। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि 2 करोड़ फॉलोअर्स का दावा और मैदान में केवल 1500 लोग। यह सोशल मीडिया का एक बुलबुला है। एक यूजर ने अपने वाट्सएप स्टेटस पर लिखा कि इतने लोग तो हमारे यहां जेसीबी की खुदाई देखने आ जाते हैं। कई लोगों ने यह भी कहा कि नेताओं को जमीनी स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। प्रदर्शन में शामिल अजय ने बताया कि केवल ट्रेंड चलाने से कुछ नहीं होगा। जनता के बीच जाना जरूरी है। कुछ लोगों ने इसे पार्टी की रणनीति की कमजोरी बताया।
CJP Movement: प्रदर्शन में जमीन पर नहीं दिखी भीड़
सीजेपी से जुड़े सौरभ ने कहा कि हमारी पार्टी के समर्थक पूरे देश में फैले हुए हैं। हर एक समर्थक का दिल्ली आना संभव नहीं है। यात्रा, खर्च और समय की सीमाएं भी एक बड़ी वजह हैं। जिस दिन प्रदर्शन हुआ, वह कई लोगों के लिए कार्यदिवस था। नौकरी करने वाले और छात्रों के लिए अचानक शामिल होना आसान नहीं होता। कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डिजिटल प्रचार ही पर्याप्त नहीं है। जमीनी स्तर पर संगठन, स्थानीय नेटवर्क और संपर्कों की आवश्यकता होती है। कई लोग किसी विचार या पोस्ट से सहमत हो सकते हैं, लेकिन जब तक मुद्दा सीधे उनके जीवन से नहीं जुड़ता, वे सक्रिय भागीदारी से बचते हैं।
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Author: UP Tak News
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