Dowry is a sin: भारत में बढ़ती दहेज प्रथा और इसके कारण होने वाली मौतों ने समाज को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें हाल के दर्दनाक मामलों जैसे ट्विशा शर्मा और दीपिका नागर का उल्लेख किया गया है।
Dowry is a sin: ‘दहेज लेना पाप है’, यह वाक्य हम वर्षों से सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी यह कुरीति देश के हर कोने में मौजूद है। एक ओर जहां हम आधुनिक विचारों को अपनाने की बात करते हैं, वहीं दहेज की मानसिकता हमें पिछली कई पीढ़ियों में धकेल देती है। दहेज प्रताड़ना से संबंधित मामलों ने देश को हिलाकर रख दिया है। 12 मई को भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर दहेज उत्पीड़न का मुद्दा चर्चा में आया है।
ट्विशा शर्मा के बाद 17 मई को नोएडा की दीपिका नागर की आत्महत्या का मामला भी सामने आया। ट्विशा की तरह इस मामले में भी लड़की के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। कर्नाटक की 24 वर्षीय ऐश्वर्या की भी दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के कारण मौत की खबर आई है। हरियाणा के सिरसा में निक्की भाटी, भोपाल की ट्विशा शर्मा, नोएडा की दीपिका नागर और कर्नाटक की ऐश्वर्या सहित कई महिलाएं हैं, जिनके परिवार वाले दहेज प्रताड़ना को अपनी बेटियों की मौत का कारण बता रहे हैं।
Dowry is a sin: भारत में दहेज से मौत के 8 बड़े प्रमुख मामले
- इंदौर में 16 सितंबर 2006 को एक ऐसी घटना हुई, जिसने सभी को चौंका दिया। सर्वोदयनगर में भूमि (ऋचा) रामचंदानी की हत्या कर उसके शरीर को दो टुकड़ों में काट दिया गया था। इन टुकड़ों को दो पोटलियों में बांधकर धन्वंतरि स्कूटी से पटेलनगर के उद्यान में दो बार में फेंका गया था।
- 2024 में प्रयागराज की अंशिका के दहेज प्रताड़ना से मौत का एक ऐसा मामला सामने आया था। अंशिका का शव ससुराल में फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया था। इस मामले में तीन व्यक्तियों की मृत्यु हुई और सात लोगों को जेल भेजा गया।
- उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 28 वर्षीय निक्की भाटी को जिंदा जलाकर उसकी हत्या कर दी गई। 21 अगस्त 2025 को हुई इस वारदात ने लोगों को हैरान कर दिया।
- भोपाल की 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मृत्यु का मामला प्रकाश में आया है। इसमें ट्विशा के पति समर्थ सिंह, सास और एक रिटायर्ड जज पर उसे प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए हैं।
- ग्रेटर नोएडा की निवासी दीपिका नागर भी दहेज लोभियों की क्रूरता का शिकार हो गई। 17 मई की रात, मकान की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरने के कारण दीपिका नागर की मृत्यु हो गई।
- कर्नाटक के बल्लारी जिले में दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न से संबंधित एक और दुखद मामला सामने आया है। 24 वर्षीय ऐश्वर्या नाम की महिला ने पति और सास द्वारा दी गई निरंतर मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
- ग्वालियर के सुरैयापुरा में इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसर पलक रजक की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है, जबकि मायका पक्ष ने इसे हत्या करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
- हाल ही में लखनऊ में 29 वर्षीय सोनी राजपूत की मौत का मामला भी सामने आया है। परिवार ने पति सहित अन्य ससुरालीजनों पर हत्या का आरोप लगाया है।
Dowry is a sin: भारत में दहेज से होने वाली मौतें
- NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 में दहेज के कारण कुल 5,737 मौतें दर्ज की गईं, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रीय स्तर पर दहेज से होने वाली मौतों की दर प्रति एक लाख महिला आबादी पर 0.8 मामले है।
- यह आंकड़ा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रदान किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304B, दोनों के तहत दर्ज मामलों को शामिल किया गया है।
- 2024 में दहेज प्रताड़ना के कारण उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2,038 मौतें हुईं। दूसरे स्थान पर बिहार है, जहां 1,078 ऐसे मामले सामने आए। साथ ही, इन राज्यों में दहेज के कारण होने वाली मौतों की दर भी सबसे अधिक रही। उत्तर प्रदेश में प्रति एक लाख महिला आबादी पर 1.8 मौतें और बिहार में प्रति एक लाख महिला आबादी पर 1.7 मौतें दर्ज की गईं। हालांकि, अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में स्वाभाविक रूप से मामलों की कुल संख्या अधिक रही।
- नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच भारत में हर साल औसतन 7,000 दहेज से संबंधित मौतें हुईं।
- NCRB के ये आंकड़े वास्तविक स्थिति से कम हैं, क्योंकि दहेज से जुड़ी कई मौतें तो रिपोर्ट नहीं की जातीं। यह इस समस्या की गंभीरता को और भी अधिक उजागर करता है।
Dowry is a sin: भारत में दहेज प्रथा ने जकड़े महिलाओं के पैर
- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दहेज से संबंधित मौतों के भयावह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि यह अवैध प्रथा अभी भी कितनी मजबूती से कायम है।
- दहेज के कारण महिलाओं को लगातार उत्पीड़न, हिंसा और आत्महत्या जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जबकि जांच प्रक्रियाएं धीमी गति से चलती हैं और अपराधियों को सजा मिलने में समय लग जाता है।
- भारत में 1961 से दहेज देना और लेना दोनों ही अपराध माने जाते हैं। फिर भी इसे एक सामाजिक प्रथा के रूप में देखा जाता है। कई परिवार आज भी इसे विवाह का एक अनिवार्य हिस्सा मानते हैं, जिसे अक्सर उपहारों का नाम दे दिया जाता है।
- समाज के कुछ वर्गों में, लड़की की मूल्यांकन इस बात से नहीं किया जाता कि उसने अपनी जिंदगी में क्या हासिल किया है, बल्कि इस बात से किया जाता है कि वह अपने साथ कितना दहेज लेकर आई है।
- सांस्कृतिक और सामाजिक दबाव परिवारों को दहेज की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर करते हैं, जिसका परिणाम अक्सर उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और यहां तक कि मौत के रूप में प्रकट होता है।
- विश्व बैंक के एक अध्ययन में, जिसमें 1960 से 2008 के बीच ग्रामीण भारत में हुई 40,000 शादियों का विश्लेषण किया गया था, यह पाया गया कि 95% शादियों में दहेज दिया गया था। यह इस बात का प्रमाण है कि यह प्रथा आज भी कितनी गहरी जड़ें रखती है।
Dowry is a sin: दहेज़ एक्ट में क्या है सजा का प्रावधान?
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 के अनुसार, यदि किसी महिला की जलने, चोट लगने या किसी अन्य अप्राकृतिक परिस्थिति में मृत्यु शादी के 7 साल के भीतर होती है, तो इसे ‘दहेज के कारण हुई मृत्यु’ माना जाएगा, बशर्ते कि उसकी मृत्यु से ठीक पहले उसे दहेज के संबंध में किसी प्रकार की क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो।
- सजा- ऐसी स्थिति में आरोपी को न्यूनतम 7 साल की कैद दी जाएगी, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
- क्रूरता से संबंधित मामलों में BNS की धारा 86 के अंतर्गत, ‘क्रूरता’ को किसी भी जानबूझकर किए गए आचरण के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके कारण किसी महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ सकता है या जिससे उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है।
- इसमें ऐसा उत्पीड़न भी शामिल है, जिसका उद्देश्य महिला या उसके परिवार को पैसे या संपत्ति से संबंधित अवैध मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर करना है, या ऐसी मांगों को पूरा न कर पाने के कारण उत्पीड़न भी इसी श्रेणी में आता है।
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Author: UP Tak News
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