Ballia UP News: शिविजा पब्लिकेशन्स की पहल पर फादर्स डे विशेष ई-संकलन “धूप का मुसाफिर” का लोकार्पण, देशभर के रचनाकारों ने पिता को शब्दों में दी श्रद्धांजलि।

dhoop ka musafir book fathers day special

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Ballia UP News: फादर्स डे के अवसर पर पिता के त्याग, अनुशासन, स्नेह और जीवनभर के मौन संघर्ष को समर्पित विशेष साहित्यिक ई-संकलन “धूप का मुसाफिर” का लोकार्पण किया गया। शिविजा पब्लिकेशन्स के साहित्यिक सहयोग से प्रकाशित इस संकलन में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े रचनाकारों की कविताएँ, संस्मरण और भावप्रधान रचनाएँ संकलित हैं, जो पिता के उस स्वरूप को सामने लाती हैं जिसे अक्सर शब्दों से अधिक कर्मों में महसूस किया जाता है।

संकलन के संपादक युवा साहित्यकार अभिषेक मिश्रा ने प्रस्तावना में पिता को “धूप का मुसाफिर” बताते हुए लिखा है कि वे जीवन की कठिन राहों पर स्वयं धूप में चलते हैं ताकि परिवार के हिस्से में छाँव आ सके। यही विचार इस संपूर्ण संकलन की आत्मा बनकर उभरता है। पुस्तक की रचनाएँ इस बात का एहसास कराती हैं कि पिता केवल परिवार का आर्थिक आधार नहीं, बल्कि विश्वास, साहस, अनुशासन और निस्वार्थ प्रेम के जीवंत प्रतीक हैं।

संकलन में अभिषेक मिश्रा की मार्मिक रचना “वह आदमी कहाँ गया?” के साथ-साथ सुधा गोयल, तुलसीराम राजस्थानी, देवेन्द्र देव मिर्जापुरी, सोनिया नायडू, निती एच. महेता कास्टा (लडु-गोपाल), श्रीमती अनीता गौतम, श्रीमती बिन्दु के पंचोली, तुलसी बरनवाल, पंडित आदित्य पाण्डेय, नंदिनी शर्मा, ज्योति वर्मा, आराधना पाण्डेय, अंजलि ओझा, साहिबा कौर, सुमित मल्होत्रा, मुस्कान ओझा, खुशी गुप्ता, अरशान अहमद, डॉ॰ कोशी सिन्हा तथा गोपीनाथ सहित अनेक रचनाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।

इन रचनाओं में पिता कहीं बरगद की छाया हैं, कहीं अटूट विश्वास, कहीं कठिन समय का संबल और कहीं बच्चों के सपनों के लिए स्वयं को समर्पित कर देने वाले एक मौन योद्धा। संकलन यह संदेश देता है कि पिता का प्रेम अक्सर बिना किसी घोषणा के, जिम्मेदारियों के निर्वहन और छोटे-छोटे त्यागों के माध्यम से व्यक्त होता है।

इस अवसर पर अखिलेश मिश्रा (M.A. English), साहित्यिक सलाहकार, ने कहा कि “पिता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन के मौन आधारस्तंभ हैं। ‘धूप का मुसाफिर’ जैसी कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों को संवेदना, कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

फादर्स डे के अवसर पर प्रकाशित “धूप का मुसाफिर” केवल एक साहित्यिक संकलन नहीं, बल्कि उन असंख्य पिताओं के प्रति सामूहिक कृतज्ञता का भाव है, जिनकी मेहनत और संघर्ष पर अनगिनत परिवारों की नींव टिकी होती है। यह ई-संकलन पाठकों को अपने जीवन में पिता की भूमिका पर पुनर्विचार करने, उनकी अनकही संवेदनाओं को समझने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

साहित्यिक जगत के लिए यह पहल इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील लेखन आज भी समाज में रिश्तों की गरिमा, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय भावनाओं को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। फादर्स डे पर प्रस्तुत यह संकलन उसी भावना को शब्द देता है कि कई बार जीवन की सबसे बड़ी छाँव वही देता है, जो स्वयं पूरी उम्र धूप का मुसाफिर बना रहता है।

हिंदी में खबरे देखने और पढ़ने के लिए विजिट करें हमारी वेबसाइट

UP Tak News

Note: ⇒ We hope you liked this information, all the sources of this information are taken from all the sources available on the internet, by order of Team UP Tak News

Screenshot 2025 04 19 205150

You can read news related to Uttar Pradesh by Clicking here

Follow Us On Our Social Handle UP TAK NEWS

Abhishek Mishra
Author: Abhishek Mishra

अभिषेक मिश्रा , यूपी तक न्यूज़ में एक सीनियर पत्रकार व एक प्रशिद्ध कवि भी हैं। वे काव्य और क्राइम, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाते हैं। मीडिया में उन्‍हें 1 साल का अनुभव है। ये करीब एक साल से UP Tak News Media Publication (Digital) के यूपी/उत्‍तराखंड टीम में कार्यरत हैं। और ये खासकर बलिया जनपद से जुडी रिपोटिंग करते है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Buzz4 Ai