Prayagraj News: खाकी पर उठे गंभीर सवाल; 80 वर्षीय बुजुर्ग को लाठियों से पीटा, पुलिस रिपोर्ट में लिखा— “फिसलकर गिरे थे”

Prayagraj News: Serious questions raised about the police; 80-year-old man beaten with sticks, yet police report claims he "slipped and fell."

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Prayagraj News: उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘मित्र पुलिस’ वाली छवि पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला जनपद प्रयागराज के थाना मऊ आइमा अंतर्गत देवगलपुर गांव का है, जहां एक 80 वर्षीय लाचार बुजुर्ग राम सेवक सरोज न्याय की भीख मांगते हुए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। आरोप है कि जमीनी विवाद में विपक्षीगणों द्वारा बर्बरतापूर्वक पीटे जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने न केवल मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया, बल्कि जांच अधिकारी ने मेडिकल रिपोर्ट को धता बताते हुए आख्या लगा दी कि “बुजुर्ग फिसलकर गिर गए थे।”

Prayagraj News: क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवगलपुर निवासी राम सेवक सरोज (उम्र 80 वर्ष) का उनके भाइयों रामकिशुन और रामजनम के साथ पैतृक भूमि को लेकर दीवानी न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। न्यायालय के आदेशानुसार विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का नियम था।

पीड़ित बुजुर्ग राम सेवक का आरोप है कि बीते 6 मार्च 2026 को दोपहर करीब 1:00 बजे उनके भाई रामकिशुन और उनके पुत्र शिवम उर्फ कोमल ने गुंडागर्दी के बल पर सहन के सामने जेसीबी (JCB) मशीन लगाकर मिट्टी का समतलीकरण और अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया। जब असहाय बुजुर्ग ने इसका विरोध किया, तो विपक्षियों ने उन्हें घेर लिया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह बुजुर्ग की जान बच सकी।Prayagraj News: Serious questions raised about the police; 80-year-old man beaten with sticks, yet police report claims he "slipped and fell."

Prayagraj News: मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि, फिर भी एफआईआर नहीं

घटना के तत्काल बाद पीड़ित ने मऊ आइमा थाने में लिखित तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने औपचारिकता निभाते हुए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में उनका मेडिकल परीक्षण कराया। डॉक्टर द्वारा तैयार की गई सरकारी मेडिकल रिपोर्ट में बुजुर्ग के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस पुख्ता चिकित्सकीय साक्ष्य के बावजूद मऊ आइमा थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज नहीं किया।

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Prayagraj News: ‘खाकी’ की भूमिका संदिग्ध: जांच अधिकारी पर गंभीर आरोप

न्याय न मिलने पर पीड़ित बुजुर्ग ने 12 मार्च 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच के लिए थाना मऊ आइमा के उप-निरीक्षक (S.I.) सोनू सिंह को नियुक्त किया गया।

बुजुर्ग राम सेवक सरोज का आरोप है कि दरोगा सोनू सिंह ने विपक्षियों से साठगांठ कर ली। उन्होंने गांव के किसी भी तटस्थ पड़ोसी या प्रत्यक्षदर्शी से बात किए बिना, आरोपियों के घर उठने-बैठने वाले करीबियों के आधार पर एक मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार कर दी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि बुजुर्ग को किसी ने पीटा नहीं, बल्कि वे “फिसलकर गिर गए थे”, जिससे उन्हें चोटें आईं। पीड़ित का कहना है कि दरोगा जानबूझकर सरकारी डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को झूठा साबित करने और दबंगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

Prayagraj News: पुलिस की शह पर दोबारा हुआ हमला और कब्जा

स्थानीय पुलिस के इस लचीले रवैये से हौसला पाकर दबंग विपक्षीगणों ने 14 मार्च 2026 को दोबारा जेसीबी मशीन बुलाई और बुजुर्ग के सहन पर पिलर खड़ा करने के लिए गड्ढे खोदने लगे। पीड़ित ने जब ‘डायल 112’ को कॉल किया, तो मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने भी काम रुकवाने से साफ मना कर दिया और बैरंग लौट गई। चौकी इंचार्ज रामफल इनारी ने भी मामले से पल्ला झाड़ लिया।

अंततः जब बुजुर्ग ने बार-बार डायल 112 पर गुहार लगाई, तब जाकर शाम को पुलिस ने काम रुकवाया। लेकिन आरोपी लगातार पीड़ित को धमकी दे रहे हैं कि “तुम कोर्ट और थाने भागते रहो, हम मकान बनाकर ही रहेंगे।”

Prayagraj News: अकेलेपन और खौफ के साए में बुजुर्ग

80 वर्षीय राम सेवक सरोज घर पर अकेले रहते हैं। शारीरिक अक्षमता और लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों के कारण वे अत्यंत भयभीत हैं। उन्होंने 15 जून 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, प्रयागराज को पुनः शिकायती पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

“मैं बुजुर्ग हूँ, चल-फिर नहीं सकता। डॉक्टरों ने भी चोटों की पुष्टि की है, फिर भी दरोगा जी कहते हैं कि मैं फिसलकर गिरा हूँ। अगर वरिष्ठ अधिकारियों ने मेरी मदद नहीं की, तो विपक्षी मेरी जान ले लेंगे।”राम सेवक सरोज, पीड़ित बुजुर्ग

जनहित में उठते सवाल:

यह घटना सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ी करती है:

  1. सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट होने के बाद भी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?
  2. क्या प्रयागराज पुलिस के आला अधिकारी जांच अधिकारी सोनू सिंह की संदिग्ध रिपोर्ट पर विभागीय कार्रवाई करेंगे?
  3. एक असहाय और अकेले रहने वाले बुजुर्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

अब देखना यह होगा कि क्या प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस संवेदनशील मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर पीड़ित को न्याय दिला पाते हैं या फिर बुजुर्ग राम सेवक सिस्टम के इस चक्रव्यूह में पिसकर रह जाएंगे।

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